{"_id":"33a8f09b8fa54d53228413696eb1371e","slug":"women-strongly-hariaudha-radha-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नारी का सशक्त रूप है हरिऔध की राधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नारी का सशक्त रूप है हरिऔध की राधा
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 08 Feb 2016 12:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डीएवी डिग्री कालेज सभागार में रविवार को केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा और दयानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में हरिऔध साहित्य में समाज और स्त्री विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए बिहार से आई प्रो. पूनम सिन्हा ने कहा कि हरिऔध जी ने नारी पात्रों में राधा का मार्मिक चित्रण करते हुए संपूर्ण नारी को एक सशक्त संदेश दिया। प्रिय प्रवास हरिऔध का प्रसिद्धि प्राप्त प्रबंध काव्य है। हरिऔध की राधा एक सशक्त भारतीय नारी का रूप है।
भारतीय भाषा केंद्र जेएनयू नई दिल्ली के प्रो. ओपी सिंह ने कहा कि हरिऔध का प्रिय प्रवास (1914) खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य हैं। इस महाकाव्य पर हरिऔध जी को 1936 में साहित्य वाचस्पति की उपाधि से विभूषित किया गया। हरियाणा के प्रो. नरेश मिश्र ने कहा कि हरिऔध की जन्मभूमि पर आकर गर्व का अनुभव कर रहा हूं।
मध्य प्रदेश के प्रो. टीएन शुक्ल ने कहा कि हरिऔध का व्यक्तित्व पंडित मदन मोहन मालवीय ने समझा और उन्हें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अवैतनिक रूप से सेवा का अवसर दिया। लखनऊ से आई प्रो. परशुराम पाल ने कहा कि राधा-कृष्ण के माध्यम से मानवीय प्रेम को हरिऔध ने इतनी ऊंचाई दी कि यह व्यक्ति, परिवार, समाज की सीमाओं को पार करता हुआ विश्व प्रेम में परिवर्तित हुआ।
विज्ञापन
कानपुर की डा. दया दीक्षित ने विचार रखा। अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार लालसा लाल तरंग ने कहा कि हरिऔध साहित्य में समाज और स्त्री विषय का चयन कर डा. गीता सिंह ने आजमगढ़ के साहित्य परंपरा को वर्तमान में आगे बढ़ाया।
संयोजिका विभागाध्यक्ष हिंदी डा. गीता सिंह और प्राचार्य डा. शुचिता श्रीवास्तव ने आभार प्रकट किया। संचालन सबके दावेदार के संपादक पंकज गौतम ने किया। संगोष्ठी में प्रबंध समिति के मंत्री श्रीनाथ सहाय, डा. कन्हैया सिंह, डा. प्रेमशीला शुक्ला, डा. सुमन, डा. कमलेश वर्मा, डा. सरोज सिंह, डा. विनोद सिंह आदि ने संबोधित किया।
विज्ञापन
भारतीय भाषा केंद्र जेएनयू नई दिल्ली के प्रो. ओपी सिंह ने कहा कि हरिऔध का प्रिय प्रवास (1914) खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य हैं। इस महाकाव्य पर हरिऔध जी को 1936 में साहित्य वाचस्पति की उपाधि से विभूषित किया गया। हरियाणा के प्रो. नरेश मिश्र ने कहा कि हरिऔध की जन्मभूमि पर आकर गर्व का अनुभव कर रहा हूं।
विज्ञापन
मध्य प्रदेश के प्रो. टीएन शुक्ल ने कहा कि हरिऔध का व्यक्तित्व पंडित मदन मोहन मालवीय ने समझा और उन्हें काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अवैतनिक रूप से सेवा का अवसर दिया। लखनऊ से आई प्रो. परशुराम पाल ने कहा कि राधा-कृष्ण के माध्यम से मानवीय प्रेम को हरिऔध ने इतनी ऊंचाई दी कि यह व्यक्ति, परिवार, समाज की सीमाओं को पार करता हुआ विश्व प्रेम में परिवर्तित हुआ।
विज्ञापन
कानपुर की डा. दया दीक्षित ने विचार रखा। अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार लालसा लाल तरंग ने कहा कि हरिऔध साहित्य में समाज और स्त्री विषय का चयन कर डा. गीता सिंह ने आजमगढ़ के साहित्य परंपरा को वर्तमान में आगे बढ़ाया।
संयोजिका विभागाध्यक्ष हिंदी डा. गीता सिंह और प्राचार्य डा. शुचिता श्रीवास्तव ने आभार प्रकट किया। संचालन सबके दावेदार के संपादक पंकज गौतम ने किया। संगोष्ठी में प्रबंध समिति के मंत्री श्रीनाथ सहाय, डा. कन्हैया सिंह, डा. प्रेमशीला शुक्ला, डा. सुमन, डा. कमलेश वर्मा, डा. सरोज सिंह, डा. विनोद सिंह आदि ने संबोधित किया।