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जलस्तर में कमी के साथ कटान में तेजी जारी

Fri, 06 Aug 2021 11:36 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 06 Aug 2021 11:36 PM IST
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With the decrease in the water level, the speed of erosion continues
लाटघाट। सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी के जलस्तर में कमी का क्रम लगातार जारी है। जलस्तर में कमी के साथ ही कटान में तेजी दर्ज की जा रही है। वहीं बोल्डर की कमी के कारण कटान को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। इस बात को लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
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बृहस्पतिवार को डिघिया गेज पर घाघरा नदी का जलस्तर 70.63 मीटर दर्ज किया गया था जो शुक्रवार को 70.55 मीटर हो गया। वहीं बदरहुंआ गेज पर बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर 71.25 मीटर दर्ज किया गया था जो शुक्रवार को घाघरा नदी का जलस्तर 71.20 मीटर हो गया। बोल्डर के अभाव में घाघरा काटते हुए आगे बढ़ रही है। घाघरा की कटान रोकने के लिए बंबू, क्रेट, मिट्टी, बालू, गिट्टी डाल कर लाखों रुपए की चपत लगाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जितनी बोरी डाली गई अगर बोल्डर डाला गया होता तो कटान रुक गई होती और किसानों की जमीन कटने से बच जाती। आज तो गांगेपुर गांव के करीब 400 घर बंधे के जो अंदर हैं उस पर भी आफत आ गई है। रात की नींद लोगों की उड़ गई है।रामजन्म यादव ने कहा कि यह पूरी लापरवाही अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग की है। जिस के नाते यह हम किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन घाघरा में बिलीन हो गई और अब आबादी की ओर बढ़ रही है। विभाग की लापरवाही के चलते हम भूमिहीन होते जा रहे हैं और विभाग बालू, गिट्टी डालकर बांध कटान रोकने के प्रयास में है।
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ग्रामीणों ने लगाया पत्थर में गड़बड़ी का आरोप
लाटघाट। गांगेपुर के पूर्व प्रधान रामनिवास यादव, रमेश यादव, राजेश यादव ने बताया कि यहां जो पत्थर लाया जा रहा है यह वही पत्थर हैं जो यहां से मात्र पांच किमी दूर टेकनपुर के पास स्टॉक कर रखा गया है। उसी पत्थर को बाढ़ खंड विभाग द्वारा 2012/ 13 में घाघरा की कटान को रोकने के लिए मिर्जापुर सोनभद्र से मंगाया गया था। जिनको भदौरा गांगेपुर में डंप किया गया था। विगत वर्ष तीन अगस्त 2020 को जब जोकहरा रिंग बांध टूटा तो उसको बांधने के लिए वही पत्थर लगभग 1400 घन मीटर उठाकर डाला गया था। बाढ़ समाप्त होने पर विभाग ने वही पत्थर जेसीबी मशीन से निकलवाकर फिर टेकनपुर रेगुलेटर के पास 1200 घन मीटर डंप कर दिया। फिर वही पत्थर गांगेपुर रिंग बांध को बचाने में डाला जा रहा है। सहायक अभियंता धनंजय यादव ने बताया कि इस पत्थर के केवल ढुलान और लदान का ही खर्च जोड़ा जाएगा। पत्थर का पैसा भुगतान में नहीं होगा क्योंकि इसका भुगतान पहले हो चुका है।
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