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डिघिया में स्थिर तो बदरहुंआ में एक सेमी घटा जलस्तर

Wed, 04 Aug 2021 10:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 04 Aug 2021 10:57 PM IST
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Water level decreased by one cm in Badarhua if stable in Dighia
गांगेपुर रिंग बांध को बचाने के लिए हो रहा कार्य, निरीक्षण करते अधिक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंत? - फोटो : AZAMGARH
लाटघाट। सगड़ी तहसील के देवरांचल से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी का जलस्तर डिघिया गेज पर जहां स्थिर हो गया है। वहीं बदरहुंआ गेज पर नदी के जलस्तर में बुधवार को एक सेमी की कमी दर्ज की गई। इसके साथ ही नदी की कटान तेज हो गई है। नदी बगहवा गांव और गांगेपुर रिंग बांध का अस्तित्व मिटाने पर तुली हुई है।
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मंगलवार को डिघिया गेज पर घाघरा नदी का जलस्तर 70.65 मीटर दर्ज किया गया था। जो बुधवार को भी 70.65 मीटर ही रहा। वहीं मंगलवार को बदरहुंआ गेज पर नदी का जलस्तर 71.29 मीटर दर्ज किया गया था। जो बुधवार को एक सेेमी घटकर 71.28 मीटर हो गया। सगड़ी तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी की विनाशलीला लगातार जारी है। घाघरा नदी बगहवा गांव, और गांगेपुर के रिंग बांध का वजूद मिटाने पर तुली हुई हैं। महराजगंज ब्लाक के सेमरी हरैया ब्लाक देवारा खास राजा, अचल नगर में घाघरा नदी कटान कर रही है। वहीं घाघरा नदी हरैया विकासखंड के गांगेपुर में बने रिंग बांध को काटने पर आमादा है। गांगेपुर गांव को बचाने के लिए बाढ़ खंड द्वारा कराए गए काम को शारदा नदी की तेज धारा ने करीब 150 मीटर तक काट दिया है। वहीं बाढ़ खंड कटान रोकने के लिए बचाव कार्य में जुटा हुआ है।
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देवारा खास राजा क्षेत्र में घाघरा नदी बगहवा गांव के घरों के नजदीक पहुंच गई है। वही गांगेपुर में फसलों समेत खेतों को काटकर नदी ने अब गांव की तरफ रुख किया है। रिंग बांध से मात्र सात से 10 मीटर पर ही घाघरा कटान कर रही है। इससे गांव वाले चिंतित हैं। बगहवा गांव के शिवलखन, रोपन, रामशब्द, राजाराम, राजनारायण, सूरजभान, उदय भान आदि का घर कटने के कगार पर है। घाघरा नदी तहसील क्षेत्र के गांवों में किसानों की फसलों सहित भूमि का तेजी के साथ कटान कर रही है। वहीं बाढ़ खंड सिर्फ बालू भरी बोरी, बंबूक्रेट,पत्थर डालकर कटान को रोकने का प्रयास कर रहा है। गांगेपुर रिंग बांध को बचाने के लिए तीन ठोकर का अस्तित्व समाप्त होता नजर आ रहा है। शासन द्वारा करोड़ों रुपया लगाया गया है। अब संक्रामक बीमारियों ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं और कई गांवों में बुखार, खांसी, जुकाम से ग्रामीण पीड़ित हैं। सहायक अभियंता धनंजय यादव ने बताया कि इस पत्थर के केवल ढुलान और लदान का ही खर्च जोड़ा जाएगा। पत्थर का पैसा भुगतान में नहीं होगा क्योंकि इसका भुगतान पहले हो चुका है।
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