{"_id":"6043c0bb8ebc3ec79e7bb316","slug":"warning-not-to-start-work-without-getting-compensation-azamgarh-news-vns5784743134","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुआवजा मिले बगैर कार्य शुरू न होने देने की चेतावनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुआवजा मिले बगैर कार्य शुरू न होने देने की चेतावनी
विज्ञापन
सगड़ी के गागेपुर सियातहसील में घाघरा नदी के किनारे ठोकर बनाने के लिए पैमाइश करते अधिशासी अभियंत?
- फोटो : AZAMGARH
लाटघाट। बारिश के मौसम में घाघरा की कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की तरफ से 14 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत तीन ठोकरों का निर्माण किया जाना है। शनिवार को बाढ़ खंड के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य के लिए जगह चिह्नित किया। इस बीच सूचना मिलने पर ग्रामीण भी पहुंच गए। ग्रामीणों ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि मुआवजा मिले बगैर कार्य शुरू नहीं होंगे। और मुआवजा दिए बिना कार्य नहीं होने देने की चेतावनी दी।
सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तर तरफ बहने वाली घाघरा नदी के कटाव को रोकने के लिए सिंचाई विभाग 14 करोड़ रुपये से तीन ठोकर बनाने का काम करा रही है। शनिवार को अधिशासी अभियंता दलीप कुमार, अवर अभियंता अरबिंदो यादव और धनंजय यादव, सहायक अभियंता संजय कुमार और जयधर ठोकर निर्माण के बाबत पैमाइश के लिए पहुंचे। सूचना मिलने पर परसिया और मठिया गांव के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। किसानों की सहमति के बिना ही सिंचाई विभाग ने काम शुरू कराने का प्रयास किया। किसानों के खेत में गेहूं बोया गया है। उसी पर ठोकर बनना है। इस बीच बिना मुआवजा के ही ठोकर का निर्माण शुरू कराने की कोशिश पर ग्रामीण नाराज हो गए। किसानों ने चेतावनी दी कि बिना मुआवजा मिले ठोकर निर्माण के लिए मशीन नहीं चलने देंगे। ठोकर के दायरे में गांव के सतिराम, प्रकाश, सत्यदेव, चंद्रभान सहित कई अन्य किसानों की जमीन आ रही है। तीनों ठोकरों का निर्माण करीब चार हेक्टेयर जमीन पर किए जाने का प्रस्ताव है। ठोकर का हेड 70 मीटर और टेल 35 मीटर तथा बीच में 58 मीटर चौड़ा होगा। पहला ठोकर 200 मीटर, दूसरा 110 मीटर और तीसरा ठोकर 140 मीटर लंबा होगा। ग्रामीणों ने अधिशासी अभियंता को घेर कर कहा कि जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा, खेत से न गेहूं कटने देंगे और न मशीन चलने देंगे।
अधिशासी अभियंता दिलीप कुमार ने कहा कि जमीन अधिग्रहण में समय लगेगा। सर्किल के हिसाब से ही मुआवजा किसानों को दिया जाएगा। इसके लिए जिलाधिकारी से पत्राचार किया जाएगा। जिलाधिकारी ही तय करेंगे कि सर्किल रेट के आधार पर किसानों को कितना मुआवजा दिया जाए। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि निर्माण कार्य होने दें। अन्यथा बाढ़ का समय आने पर निर्माण कार्य नहीं हो सकेगा। इससे नदी जमीन काटकर बंधे के करीब पहुंच जाएगी। उधर ग्रामीणों ने अधिशासी अभियंता की बातों को मानने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि निर्माण हो जाने के बाद उन्हें हमें मुआवजा नहीं मिल पाएगा। इसलिए निर्माण से पूर्व उनकी जमीन का मुआवजा मिलना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तर तरफ बहने वाली घाघरा नदी के कटाव को रोकने के लिए सिंचाई विभाग 14 करोड़ रुपये से तीन ठोकर बनाने का काम करा रही है। शनिवार को अधिशासी अभियंता दलीप कुमार, अवर अभियंता अरबिंदो यादव और धनंजय यादव, सहायक अभियंता संजय कुमार और जयधर ठोकर निर्माण के बाबत पैमाइश के लिए पहुंचे। सूचना मिलने पर परसिया और मठिया गांव के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। किसानों की सहमति के बिना ही सिंचाई विभाग ने काम शुरू कराने का प्रयास किया। किसानों के खेत में गेहूं बोया गया है। उसी पर ठोकर बनना है। इस बीच बिना मुआवजा के ही ठोकर का निर्माण शुरू कराने की कोशिश पर ग्रामीण नाराज हो गए। किसानों ने चेतावनी दी कि बिना मुआवजा मिले ठोकर निर्माण के लिए मशीन नहीं चलने देंगे। ठोकर के दायरे में गांव के सतिराम, प्रकाश, सत्यदेव, चंद्रभान सहित कई अन्य किसानों की जमीन आ रही है। तीनों ठोकरों का निर्माण करीब चार हेक्टेयर जमीन पर किए जाने का प्रस्ताव है। ठोकर का हेड 70 मीटर और टेल 35 मीटर तथा बीच में 58 मीटर चौड़ा होगा। पहला ठोकर 200 मीटर, दूसरा 110 मीटर और तीसरा ठोकर 140 मीटर लंबा होगा। ग्रामीणों ने अधिशासी अभियंता को घेर कर कहा कि जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा, खेत से न गेहूं कटने देंगे और न मशीन चलने देंगे।
विज्ञापन
अधिशासी अभियंता दिलीप कुमार ने कहा कि जमीन अधिग्रहण में समय लगेगा। सर्किल के हिसाब से ही मुआवजा किसानों को दिया जाएगा। इसके लिए जिलाधिकारी से पत्राचार किया जाएगा। जिलाधिकारी ही तय करेंगे कि सर्किल रेट के आधार पर किसानों को कितना मुआवजा दिया जाए। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि निर्माण कार्य होने दें। अन्यथा बाढ़ का समय आने पर निर्माण कार्य नहीं हो सकेगा। इससे नदी जमीन काटकर बंधे के करीब पहुंच जाएगी। उधर ग्रामीणों ने अधिशासी अभियंता की बातों को मानने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि निर्माण हो जाने के बाद उन्हें हमें मुआवजा नहीं मिल पाएगा। इसलिए निर्माण से पूर्व उनकी जमीन का मुआवजा मिलना चाहिए।
विज्ञापन