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मरीज की मौत पर हंगामा, तीमारदारों ने किया प्रदर्शन
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बलरामपुर। जिला अस्पताल में तीन दिनों से इलाज करा रहे मरीज की शुक्रवार को मौत हो गई। मरीज की मौत के बाद परिजन आक्रोशित हो उठे और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिसर में ही हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान तीमदारों ने कुछ देर तक नारेबाजी कर प्रदर्शन भी किया।
अंबेडकर नगर जिले के रामनगर निवासी 65 वर्षीय सिरपत पुत्र स्व. संग्राम डायबिटीज के मरीज थे। हालत गंभीर होने पर परिजन उन्हें जिला अस्पताल आजमगढ़ लाकर भर्ती कराए थे। तीन दिनों से उनका जिला अस्पताल में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान शुक्रवार की सुबह उनकी मौत हो गई। सिरपत की मौत के बाद परिजन आक्रोशित हो उठे और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने परिसर में ही कुछ देर तक अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। परिजनों का आरोप था कि भर्ती करने के बाद कोई डॉक्टर उन्हें देखने नहीं आया। इतना ही नहीं शुक्रवार को ओपीडी में मरीज को दिखाने के लिए कर्मचारियों से कई बार स्ट्रेचर की व्यवस्था करने को कहा गया लेकिन स्ट्रेचर भी नहीं मिल सका, जिसके चलते वे अपने मरीज को ओपीडी में भी डॉक्टर को नहीं दिखा सके। बाद में अस्पताल प्रशासन के लोगों ने ही मृतक के परिजनों व तीमारदारों को समझा कर हंगामा समाप्त करवाया।
अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप गलत है। मृतक का शुगर काफी अधिक बढ़ गया था। डॉक्टर व अन्य स्टाफ लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए थे और इलाज कर रहे थे। गंभीर बीमारी के चलते उनकी मौत हुई है। - डॉ. एके सिंह, एसआईसी, जिला अस्पताल, आजमगढ़।
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अंबेडकर नगर जिले के रामनगर निवासी 65 वर्षीय सिरपत पुत्र स्व. संग्राम डायबिटीज के मरीज थे। हालत गंभीर होने पर परिजन उन्हें जिला अस्पताल आजमगढ़ लाकर भर्ती कराए थे। तीन दिनों से उनका जिला अस्पताल में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान शुक्रवार की सुबह उनकी मौत हो गई। सिरपत की मौत के बाद परिजन आक्रोशित हो उठे और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने परिसर में ही कुछ देर तक अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। परिजनों का आरोप था कि भर्ती करने के बाद कोई डॉक्टर उन्हें देखने नहीं आया। इतना ही नहीं शुक्रवार को ओपीडी में मरीज को दिखाने के लिए कर्मचारियों से कई बार स्ट्रेचर की व्यवस्था करने को कहा गया लेकिन स्ट्रेचर भी नहीं मिल सका, जिसके चलते वे अपने मरीज को ओपीडी में भी डॉक्टर को नहीं दिखा सके। बाद में अस्पताल प्रशासन के लोगों ने ही मृतक के परिजनों व तीमारदारों को समझा कर हंगामा समाप्त करवाया।
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अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप गलत है। मृतक का शुगर काफी अधिक बढ़ गया था। डॉक्टर व अन्य स्टाफ लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए थे और इलाज कर रहे थे। गंभीर बीमारी के चलते उनकी मौत हुई है। - डॉ. एके सिंह, एसआईसी, जिला अस्पताल, आजमगढ़।
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