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हाईवे पर खड़े ट्रक दे रहे जानलेवा हादसों को दावत
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आजमगढ़। राष्ट्रीय राजमार्ग तीव्र गति से चलने योग्य बनाने का लाभ तो सभी को मिल रहा है पर जान का जोखिम भी बढ़ गया है। सड़क किनारे चालक अपने वाहन अक्सर रात में बेतरतीब खड़ा कर देते हैं जो अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। आए दिन हादसे हो रहे हैं जिनमें लोगों की जान भी बड़ी संख्या में जा रही है। पीछे से आने वाले तेज रफ्तार वाहन खड़े वाहन में टकरा जा रहे हैं। ऐसी कई घटनाएं हो चुकीं लेकिन लापरवाह वाहन चालकों पर आज तक लगाम नहीं लग सकी। नतीजा राहगीरों को जान देकर इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर जहां जगह-जगह बाजार सजे हैं। कहीं हाईवे किनारे ट्रकों की मरम्मत होती है तो कहीं होटलों के बाहर ट्रक खड़े रहते हैं। इन्हीं ट्रकों के कारण हादसे होते हैं। प्रशासन द्वारा समय-समय पर सड़क सुरक्षा अभियान चलाकर करोड़ों रुपये प्रचार-प्रसार पर बहाया जाता है। बावजूद सड़क सुरक्षा के नियम निर्देश कहीं भी धरातल पर देखने को नहीं मिलते हैं। लोगों का कहना है कि गोष्ठियों और सेमिनारों में तो वाहन चालकों को नियमों का पाठ पढ़ाया जा जाता है लेकिन हाईवे पर ट्रक और कंटेनर चालकों को समझाने वाला कोई नहीं है।
चौबीस घंटे सड़क के दोनों ओर ट्रक व भारी वाहनों का मेला लगा रहता है। सड़क किनारे चालक अपने वाहन अक्सर रात में बेतरतीब खड़ा कर देते हैं, जो अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। जिससे आए दिन हादसे भी हो रहे हैं, जिनमें लोगों की जान भी बड़ी संख्या में जा रही है। पीछे से आने वाले तेज रफ्तार वाहन खड़े वाहन में टकरा जा रहे हैं। ऐसी कई घटनाएं हो चुकीं, लेकिन लापरवाह वाहन चालकों पर आज तक लगाम नहीं लग सकी। कहने को तो संबंधित थानों के सिपाहियों को रात व दिन में हाईवे पर गश्त पर रहने के निर्देश हैं, लेकिन वह कभी कभार ही दिखाई देते हैं।
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ढाबों के पास नहीं होती चेकिंग
आजमगढ़। सबसे ज्यादा बड़े वाहन ढाबों पर खड़े नजर आते हैं। रात व दिन में यहां वाहन एक के पीछे एक खड़े रहते हैं। रात के समय तो आलम और भी भयंकर होता है, यहां से निकलने में भी डर बना रहता है। नियमित चेकिग न होने और चालान न होने की वजह से यहां हादसे का डर बना रहता है।
कोटवा से चेकपोस्ट तक खड़े हो रहे ट्रक
रानी की सराय। क्षेत्र के आजमगढ़-वाराणसी मार्ग पर बेलइसा, धर्मकाटा, शहीदवारा, रानी की सराय, चेकपोस्ट व कोटिला आदि स्थानों पर सड़कों पर ट्रक खड़े होते हैं। यही हाल चेकपोस्ट से जौनपुर को जाने वाले मार्ग का है। सड़क किनारे चालक अपने वाहन अक्सर रात में बेतरतीब ढंग से खड़ा कर देते हैं, जो अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। वहीं शहीदवारा के पास कुछ वाहन एजेंसियों के सामने भी सड़क की पटरियों पर वाहन खड़े होते हैं।
लाटघाट से महुला डगरा तक खड़े ट्रक दे रहे हादसे को दावत
लाटघाट। लाटघाट से महुला डगरा तक जगह-जगह वाहन खड़े होते हैं। यहां वाहनों की लंबी कतार लगी होती है। जिससे सड़क दुर्घटना होने का भय बना रहता है। वहीं स्थानीय थाने की पुलिस भी इन वाहनों के खिलाफ कुछ कार्रवाई नहीं करती है। जिससे इनका मनोबल हमेशा उंचा रहता है।
मामा की हुई थी मौत, भांजा हुआ था घायल
आजमगढ़। बरदह थाना क्षेत्र के दुबरा बाजार के पास 25 नवंबर 2017 की रात तेज रफ्तार बाइक सड़क किनारे खड़े ट्रक में जा घुसी थी। जिसमें मामा अजय गौतम (30) और भांजा सूरज (18) दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों के माध्यम से घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान मामा की मौत हो गई जबकि भांजा का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा था। अजय शेखपुरा गांव का रहने वाला था। वह दीदारगंज थाना क्षेत्र के सुरहन गांव निवासी अपने दीदी के घर गया था। रात के समय अजय अपने भांजे सूरज के साथ किसी कार्यवश सुरहन बाजार से दुबरा बाजार जा रहा था।
गन्ना लदे खड़े ट्रक में कार घुसने से छह लोगों की हुई थी मौत
आजमगढ़। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के तेरही विद्युत उप केंद्र के पास आजमगढ़ फैजाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर 1 दिसंबर वर्ष 2017 किरात एक कार गन्ना लदे सड़क किनारे खड़ी ट्रक में घुस गई। दुर्घटना में एक महिला, 2 बच्चे, एक किशोरी समेत कुल 6 लोगों की मौत हो गई। जबकि एक महिला और एक 9 माह के बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई थी। बहराइच व लखीमपुर खीरी जिले के दो परिवारों के लोग कार से आजमगढ़ शहर के आसिफगंज पुरानी कोतवाली मोहल्ले के प्रभाकर सेठ के यहां आ रहे थे। मृतकों में पुलकेश (32) उनकी पत्नी शिल्पी सोनी (30) बेटी चाहत (10) एक और तीन वर्ष का बच्चा शामिल था। सभी लखीमपुर खीरी जिले के खजुरिया थाने के कमलापुर गांव के निवासी थे। वही बहराइच जिले के महीदपुरा गांव निवासी महेश सोनी (30) व उनकी तीन वर्षीय बच्ची की भी मौत हुई थी।
संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन डा. आरएन चौधरी ने बताया कि सड़कों पर बेतरतीब वाहन नहीं खड़े होने चाहिए। यदि ऐसा हो रहा तो गलत है। जहां तक रही ढाबों के पास वाहन खड़ा होने की तो ढाबा संचालकों को भी इसे लेकर जागरूक होना चाहिए। हालांकि इसे लेकर विभाग द्वारा अभियान भी चलाया गया था। अब फिर से इसे लेकर अभियान चलेगा। उक्त ट्रकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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राष्ट्रीय राजमार्ग पर जहां जगह-जगह बाजार सजे हैं। कहीं हाईवे किनारे ट्रकों की मरम्मत होती है तो कहीं होटलों के बाहर ट्रक खड़े रहते हैं। इन्हीं ट्रकों के कारण हादसे होते हैं। प्रशासन द्वारा समय-समय पर सड़क सुरक्षा अभियान चलाकर करोड़ों रुपये प्रचार-प्रसार पर बहाया जाता है। बावजूद सड़क सुरक्षा के नियम निर्देश कहीं भी धरातल पर देखने को नहीं मिलते हैं। लोगों का कहना है कि गोष्ठियों और सेमिनारों में तो वाहन चालकों को नियमों का पाठ पढ़ाया जा जाता है लेकिन हाईवे पर ट्रक और कंटेनर चालकों को समझाने वाला कोई नहीं है।
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चौबीस घंटे सड़क के दोनों ओर ट्रक व भारी वाहनों का मेला लगा रहता है। सड़क किनारे चालक अपने वाहन अक्सर रात में बेतरतीब खड़ा कर देते हैं, जो अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। जिससे आए दिन हादसे भी हो रहे हैं, जिनमें लोगों की जान भी बड़ी संख्या में जा रही है। पीछे से आने वाले तेज रफ्तार वाहन खड़े वाहन में टकरा जा रहे हैं। ऐसी कई घटनाएं हो चुकीं, लेकिन लापरवाह वाहन चालकों पर आज तक लगाम नहीं लग सकी। कहने को तो संबंधित थानों के सिपाहियों को रात व दिन में हाईवे पर गश्त पर रहने के निर्देश हैं, लेकिन वह कभी कभार ही दिखाई देते हैं।
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ढाबों के पास नहीं होती चेकिंग
आजमगढ़। सबसे ज्यादा बड़े वाहन ढाबों पर खड़े नजर आते हैं। रात व दिन में यहां वाहन एक के पीछे एक खड़े रहते हैं। रात के समय तो आलम और भी भयंकर होता है, यहां से निकलने में भी डर बना रहता है। नियमित चेकिग न होने और चालान न होने की वजह से यहां हादसे का डर बना रहता है।
कोटवा से चेकपोस्ट तक खड़े हो रहे ट्रक
रानी की सराय। क्षेत्र के आजमगढ़-वाराणसी मार्ग पर बेलइसा, धर्मकाटा, शहीदवारा, रानी की सराय, चेकपोस्ट व कोटिला आदि स्थानों पर सड़कों पर ट्रक खड़े होते हैं। यही हाल चेकपोस्ट से जौनपुर को जाने वाले मार्ग का है। सड़क किनारे चालक अपने वाहन अक्सर रात में बेतरतीब ढंग से खड़ा कर देते हैं, जो अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। वहीं शहीदवारा के पास कुछ वाहन एजेंसियों के सामने भी सड़क की पटरियों पर वाहन खड़े होते हैं।
लाटघाट से महुला डगरा तक खड़े ट्रक दे रहे हादसे को दावत
लाटघाट। लाटघाट से महुला डगरा तक जगह-जगह वाहन खड़े होते हैं। यहां वाहनों की लंबी कतार लगी होती है। जिससे सड़क दुर्घटना होने का भय बना रहता है। वहीं स्थानीय थाने की पुलिस भी इन वाहनों के खिलाफ कुछ कार्रवाई नहीं करती है। जिससे इनका मनोबल हमेशा उंचा रहता है।
मामा की हुई थी मौत, भांजा हुआ था घायल
आजमगढ़। बरदह थाना क्षेत्र के दुबरा बाजार के पास 25 नवंबर 2017 की रात तेज रफ्तार बाइक सड़क किनारे खड़े ट्रक में जा घुसी थी। जिसमें मामा अजय गौतम (30) और भांजा सूरज (18) दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों के माध्यम से घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान मामा की मौत हो गई जबकि भांजा का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा था। अजय शेखपुरा गांव का रहने वाला था। वह दीदारगंज थाना क्षेत्र के सुरहन गांव निवासी अपने दीदी के घर गया था। रात के समय अजय अपने भांजे सूरज के साथ किसी कार्यवश सुरहन बाजार से दुबरा बाजार जा रहा था।
गन्ना लदे खड़े ट्रक में कार घुसने से छह लोगों की हुई थी मौत
आजमगढ़। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के तेरही विद्युत उप केंद्र के पास आजमगढ़ फैजाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर 1 दिसंबर वर्ष 2017 किरात एक कार गन्ना लदे सड़क किनारे खड़ी ट्रक में घुस गई। दुर्घटना में एक महिला, 2 बच्चे, एक किशोरी समेत कुल 6 लोगों की मौत हो गई। जबकि एक महिला और एक 9 माह के बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई थी। बहराइच व लखीमपुर खीरी जिले के दो परिवारों के लोग कार से आजमगढ़ शहर के आसिफगंज पुरानी कोतवाली मोहल्ले के प्रभाकर सेठ के यहां आ रहे थे। मृतकों में पुलकेश (32) उनकी पत्नी शिल्पी सोनी (30) बेटी चाहत (10) एक और तीन वर्ष का बच्चा शामिल था। सभी लखीमपुर खीरी जिले के खजुरिया थाने के कमलापुर गांव के निवासी थे। वही बहराइच जिले के महीदपुरा गांव निवासी महेश सोनी (30) व उनकी तीन वर्षीय बच्ची की भी मौत हुई थी।
संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन डा. आरएन चौधरी ने बताया कि सड़कों पर बेतरतीब वाहन नहीं खड़े होने चाहिए। यदि ऐसा हो रहा तो गलत है। जहां तक रही ढाबों के पास वाहन खड़ा होने की तो ढाबा संचालकों को भी इसे लेकर जागरूक होना चाहिए। हालांकि इसे लेकर विभाग द्वारा अभियान भी चलाया गया था। अब फिर से इसे लेकर अभियान चलेगा। उक्त ट्रकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।