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दलितों से भी बदतर हैं हालात

Sun, 08 May 2016 11:49 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़ Updated Sun, 08 May 2016 11:49 PM IST
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Things are worse than Dalits
संगोष्ठी
सच्चर कमेटी और जस्टिस रंगराजन की रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया कि मुसलमानों के हालात दलितों से भी बदतर हैं। ये बातें रविवार को शिब्ली एकेडमी हाल में एसोसिएशन फार वेलफेयर मेडिकल एंड लीगल असिस्टेंस (ओमेला), दारुल मुसन्नफीन और मदरसा जामियतुल फलाह बिलरियागंज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'शिक्षा के अवसर और बढ़ती चुनौतियां' विषयक संगोष्ठी में बंगलुरु से आए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सैय्यद जमीर पाशा ने कहीं।
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उन्होंने कहा कि अल्लामा शिब्ली नोमानी एक ऐसी हस्ती थे जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र काफी काम किया। उनका मानना था कि आने वाले दिनों में विज्ञान टेक्नालाजी का स्कोप बढ़ेगा। इसलिए उन्होंने दीनी तालिम के साथ अंग्रेजी और विज्ञान की शिक्षा पर काफी जोर दिया और कई विद्यालय बनवाए। उन्होंने कहा सच्चर कमेटी की रिपोर्ट जब पटल पर रखी गई तो केंद्र और प्रदेश की सरकारें हरकत में आईं। इसका नतीजा रहा कि पहले जहां मुस्लिम गरीब बच्चों को स्कालरशिप नहीं मिल पाती थी, आज मिलने लगी है। जो उनकी शिक्षा में मददगार साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि यह हिंदुस्तान हमारा भी है।
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हमें भी सरकार की योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए और शिक्षा के दायरे को बढ़ाने के लिए आगे आना होगा। ताकि हमारे समाज के बच्चे भी उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकें। शिक्षा से ही तरक्की कर सकते हैं और तरक्की से गरीबी दूर हो सकती है। हैदराबाद से आए डा. फखरुद्दीन ने कहा कि आज हमारे समाज के लोग को तालीम हासिल करने के बाद सरकारी नौकरी नहीं मिल रही है। इसके कारण लोग रोजीरोटी से जुड़ जा रहे हैं।
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अगर शिक्षा के साथ-साथ मेडिकल और टेक्निकल शिक्षा ग्रहण करते तो इंजीनियर और डाक्टर होते। उन्होंने कहा कि हमने देखा हमारे समाज के बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित है क्योंकि आज भी मुस्लिम समाज के विद्यालय बहुत है। इससे ज्यादा क्रिश्चियन और पंजाबी के विद्यालय है। पैरामेडिकल के क्षेत्र में तो क्रिश्चियन समुदाय का एकाधिकार है। इंजीनियर कलीमुल हफीज, डा. रेहान सूरी, डा. सलमान अहमद ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर ओमेला के अध्यक्ष डा. जावेद अख्तर, मदरसा जामियतुल फलाह के नाजिम मौलाना ताहिर मदनी, डा. जावेद अली, मास्टर तरिक, डा. वाहिद अली, डा. अमीर आलम, डा. फुरकान आदि मौजूद रहे। संगोष्ठी की अध्यक्षता सेवानिवृत्ति प्रोफेसर फखरुल इस्लाम ने संचालन डा. महमूद ने किया। 
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