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Azamgarh News: जीवितपुत्रिका व्रत के लिए बाजारों में रही चहल-पहल
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बलिया/सागरपाली। सनातन धर्म में जीवितपुत्रिका व्रत का बड़ा महत्व है। जीवितपुत्रिका व्रत का संकल्प माताएं अपनी संतान की सुरक्षा, आयु की कामना के लिए करती हैं। इस वर्ष जीवितपुत्रिका व्रत 14 सितंबर दिन रविवार को पड़ रहा है। इस दिन महिलाएं संतान के सुख व आयु की कामना के निमित्त निर्जला व्रत रखती है। शुक्रवार को जीवितपुत्रिका व्रत को लेकर बाजार में भीड़ रही। दुकानों पर महिलाएं जीऊतिया गुथवाने, चावल व सत्तू की खरीदारी में लगी रहीं।
जीवितपुत्रिका के दिन पुत्र के सुख की कामना के लिए रखे जाने वाले इस व्रत के दिन महिलाएं जिऊतिया धागा धारण करती है। व्रती महिलाएं भगवान से आशीर्वाद पाकर इस धागे को गले या हाथ में धारण करती है। जिसे संतान की सुरक्षा व उनके निमित्त सुख प्रगति का प्रतीक माना जाता है। आचार्य अखिलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि जिऊतिया व्रत में भगवान जीमूत वाहन के साथ संतान की लंबी आयु और स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। यह व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी को किया जाता है। इस वर्ष जीवित पुत्रिका व्रत 14 सितंबर रविवार को बनाया जाएगा। 13 सितंबर शनिवार को दिन में 11 बजकर 4 मिनट से सप्तमी तिथि प्रारंभ होगा। पारण 15 सितंबर सोमवार की सुबह 6 बजकर 26 मिनट के बाद होगा। वृद्ध, रोगी एवं गर्भवती महिला आवश्यकतानुसार जल, चाय ग्रहण कर सकती हैं।
जिऊतिया मुहूर्त -
जिऊतिया व्रत-- 14 सितंबर, रविवार
पारण-- -15 सितंबर, सोमवार सुबह 6 बजकर 26 मिनट
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जीवितपुत्रिका के दिन पुत्र के सुख की कामना के लिए रखे जाने वाले इस व्रत के दिन महिलाएं जिऊतिया धागा धारण करती है। व्रती महिलाएं भगवान से आशीर्वाद पाकर इस धागे को गले या हाथ में धारण करती है। जिसे संतान की सुरक्षा व उनके निमित्त सुख प्रगति का प्रतीक माना जाता है। आचार्य अखिलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि जिऊतिया व्रत में भगवान जीमूत वाहन के साथ संतान की लंबी आयु और स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। यह व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी को किया जाता है। इस वर्ष जीवित पुत्रिका व्रत 14 सितंबर रविवार को बनाया जाएगा। 13 सितंबर शनिवार को दिन में 11 बजकर 4 मिनट से सप्तमी तिथि प्रारंभ होगा। पारण 15 सितंबर सोमवार की सुबह 6 बजकर 26 मिनट के बाद होगा। वृद्ध, रोगी एवं गर्भवती महिला आवश्यकतानुसार जल, चाय ग्रहण कर सकती हैं।
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जिऊतिया मुहूर्त -
जिऊतिया व्रत
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