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नगरपालिका में आज भी धूल फांक रही वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा
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वीर कुंवर सिंह उद्यान।-प्लान खबर की फोटो
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। अंग्रेजी शासनकाल में कंपनी बाग के नाम से जाना जाने वाला कुंवर सिंह उद्यान आज भी वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा के लिए तरस रहा है। कई साल पहले कुंवर सिंह उद्यान के जीर्णोद्घार के समय इसे उस समय हटा दिया गया लेकिन आज तक इसे लगाया नहीं जा सका। कई बार सामाजिक संगठनों द्वारा इस दिशा में प्रयास किया गया लेकिन आश्वासनों के बोझ तले उनकी आवाज दब गई।
अंग्रेजों से देश की आजादी के लिए जिले के लोगों ने भी सराहनीय संघर्ष किया। जिसकी गाथा सुनाते जनपद में आज भी कई स्थल हैं। लेकिन संरक्षण के अभाव में इन स्थलों की हालत खस्ता हो गई है। 20 सितंबर 1857 में राजा बेनी माधव सिंह ने मंदुरी में अंग्रेजी सेना से लोहा लिया लेकिन दुर्भाग्य से वह इस जंग में पराजित हो गए। इसके बाद परगन सिंह ने जनपद के क्रांतिकारियों को जुटाकर अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता का बिगुल फूंक दिया। उन्होंने बिहार प्रांत के आरा जनपद के जगदीशपुर रियासत के राजा वीर कुंवर सिंह को अपने सहयोग के लिए बुलावा भेज दिया। उनके इस बुलावे पर वीर कुंवर सिंह अंग्रेजी सेना से लोहा लेते हुए आजमगढ़ पहुंच गए। यहां उन्होंने जनपद के रणबांकुरों को साथ लेकर पूरी योजना के साथ कंपनी बाग पर हमला कर दिया। कंपनी बाग में उस समय अंग्रेजों की सेना रहती थी, वह अपना गोला और असलहा बारूद यहीं जमा करते थे। भीषण संघर्ष के बाद वीर कुंवर सिंह ने अंग्रेजी सेना को पराजित कर कंपनी बाग पर कब्जा कर लिया। इसके बाद धीरे-धीरे कर पूरे आजमगढ़ को अंग्रेजी सेना के कब्जे से आजाद करा लिया। देश के आजाद होने के बाद कंपनी बाग का नाम बदलकर कुंवर सिंह उद्यान रख दिया गया। इस उद्यान में वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई। लेकिन नगरपालिका ने जब इस पार्क का जीर्णोद्घार शुरू किया तो उनकी प्रतिमा को नगरपालिका में रखवा दिया। पार्क का जीर्णोद्घार हो गया लेकिन उनकी प्रतिमा आज भी नगरपालिका में रखी धूल फांक रही है। कई बार सामाजिक संगठनों ने प्रतिका को स्थापित करने की मांग उठाई। लेकिन अधिकारियों के आश्वासन के बीच उनकी यह आवाज दबकर रह गई। आज भी कुंचर सिंह उद्यान को उनकी प्रतिमा के स्थापित होने का इंतजार है।
यह प्रतिमा हमारे समय में नहीं लगी थी। पहले लगी थी या नहीं हमें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। वर्तमान में नई प्रतिमा की स्थापना करने पर रोक लगी है। इसलिए हम इसमें कुछ नहीं कर सकते है।
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शुभनाथ प्रसाद, ईओ नगरपालिका।
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अंग्रेजों से देश की आजादी के लिए जिले के लोगों ने भी सराहनीय संघर्ष किया। जिसकी गाथा सुनाते जनपद में आज भी कई स्थल हैं। लेकिन संरक्षण के अभाव में इन स्थलों की हालत खस्ता हो गई है। 20 सितंबर 1857 में राजा बेनी माधव सिंह ने मंदुरी में अंग्रेजी सेना से लोहा लिया लेकिन दुर्भाग्य से वह इस जंग में पराजित हो गए। इसके बाद परगन सिंह ने जनपद के क्रांतिकारियों को जुटाकर अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता का बिगुल फूंक दिया। उन्होंने बिहार प्रांत के आरा जनपद के जगदीशपुर रियासत के राजा वीर कुंवर सिंह को अपने सहयोग के लिए बुलावा भेज दिया। उनके इस बुलावे पर वीर कुंवर सिंह अंग्रेजी सेना से लोहा लेते हुए आजमगढ़ पहुंच गए। यहां उन्होंने जनपद के रणबांकुरों को साथ लेकर पूरी योजना के साथ कंपनी बाग पर हमला कर दिया। कंपनी बाग में उस समय अंग्रेजों की सेना रहती थी, वह अपना गोला और असलहा बारूद यहीं जमा करते थे। भीषण संघर्ष के बाद वीर कुंवर सिंह ने अंग्रेजी सेना को पराजित कर कंपनी बाग पर कब्जा कर लिया। इसके बाद धीरे-धीरे कर पूरे आजमगढ़ को अंग्रेजी सेना के कब्जे से आजाद करा लिया। देश के आजाद होने के बाद कंपनी बाग का नाम बदलकर कुंवर सिंह उद्यान रख दिया गया। इस उद्यान में वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई। लेकिन नगरपालिका ने जब इस पार्क का जीर्णोद्घार शुरू किया तो उनकी प्रतिमा को नगरपालिका में रखवा दिया। पार्क का जीर्णोद्घार हो गया लेकिन उनकी प्रतिमा आज भी नगरपालिका में रखी धूल फांक रही है। कई बार सामाजिक संगठनों ने प्रतिका को स्थापित करने की मांग उठाई। लेकिन अधिकारियों के आश्वासन के बीच उनकी यह आवाज दबकर रह गई। आज भी कुंचर सिंह उद्यान को उनकी प्रतिमा के स्थापित होने का इंतजार है।
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यह प्रतिमा हमारे समय में नहीं लगी थी। पहले लगी थी या नहीं हमें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। वर्तमान में नई प्रतिमा की स्थापना करने पर रोक लगी है। इसलिए हम इसमें कुछ नहीं कर सकते है।
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शुभनाथ प्रसाद, ईओ नगरपालिका।