आजमगढ़। पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते बाजार में महंगाई का असर दिखाई देने लगा है। बाहर से आने वाले कच्चे माल की मात्रा कम होने से उसका असर सरिया, सीमेंट, प्लंबर के सामानों पर पड़ा है। इनके दाम बढ़ने से लोगों के लिए मकान बनाना महंगा हो गया है।
घर बनाने में ईंट, सरिया, मोरंग, सीमेंट, पानी और वायरिंग की पाइप आदि सामान लगते हैं। मोरंग और गिट्टी को छोड़ दिया जाय तो अन्य सामानों की कीमतों पर पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर पड़ा है। बिल्डिंग मैटेरियल के विक्रेता अनुराग सिंह ने बताया कि सीमेंट की बोरी, पानी की टंकी, प्लास्टिक टोंटी, पानी और वायरिंग की पाइप बनाने में प्लास्टिक दाना का उपयोग होता है। यह माल बाहर से ही आता है। युद्ध के कारण कच्चा माल मिल नहीं पा रहा है। सीमेंट का दाम एक माह पूर्व 345 रुपये था। अब इसमें 10 रुपये प्रति बोरी बढ़ गया है। प्लंबर के सामान में भी पांच प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। सरिया बनाने में प्रयोग होने वाला अधिकांश कच्चा माल बाहर से आता है। जो सरिया फरवरी में 56-57 सौ रुपये क्विंटल थी वह अब 62-63 सौ रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। 500-600 रुपये प्रति क्विंटल तक सरिया का दाम बढ़ा है। ईंट भट्ठा संचालक विक्रम सिंह ने बताया कि गैस की किल्लत से हर तरफ कोयले की मांग बढ़ गई है। पहले एक टन कोयल साढ़े नौ हजार रुपये में आता है अब इसका दाम बढ़कर साढ़े 11 हजार रुपये हो गया है। कोयले का दाम बढ़ने का असर ईंट पर भी पड़ा है। पहले 14 हजार रुपये ट्राॅली ईंट थी लेकिन अब प्रति ट्राली पर 500 रुपये की बढ़ोतरी हो गई है।