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संक्रामक बीमारियों ने पसारे पांव
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Sat, 20 Aug 2016 11:44 PM IST
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बाढ़
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सगड़ी तहसील क्षेत्र के देवारा क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग जितना घाघरा के प्रकोप से नहीं परेशान हैं, उससे अधिक उपेक्षा को लेकर दुखी हैं। लगभग एक महीने से बाढ़ के पानी से घिरे चक्की गांव में आज तक दवा का छिड़काव नहीं हुआ। इसके चलते संक्रामक बीमारियों ने अपने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं।
देवारावासी घाघरा की कटान के आदी हो चुके हैं। इसलिए वह इसकी विभीषिका झेलने के लिए पहले से ही तैयार होते हैं। वह स्वत: ही अपना आशियाना उजाड़कर दूसरी जगह जा बसते हैं लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा दुख प्रशासन की उदासीनता के कारण होता है क्योंकि प्रशासन बाढ़ से घिरे गांव के ग्रामीणों की मदद का दावा तो करता है लेकिन मदद उन तक नहीं पहुंच पाती है। हरैया ब्लॉक का चक्की गांव लगभग एक माह से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है।
गांव के लोग प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम अब तक गांव में नहीं पहुुंची है। गांव में दवा का छिड़काव न होने के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। पानी के कारण गांव में संक्रामक बीमारियां फैल रही है। लोग मलेरिया, टाइफायड, खुजली आदि बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। ग्रामीणों के आवागमन के लिए प्रशासन ने तीन नाव लगाई है लेकिन ग्रामीणों द्वारा और नाव लगाने की मांग की जा रही है जिसे प्रशासन अनसुना कर रहा है।
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हरैया ब्लाक के देवारा खास राजा ग्राम सभा का चक्की गांव तीन पुरवों रामलखन का पुरवा, जंगी का पुरवा और रामकृपाल का पुरवा में बंटा है। जिसकी आबादी लगभग दो हजार है। रामलखन का पुरा में 100 घर, रामकृपाल का पुरा में 150 घर और जंगी का पुरा में 50 घर हैं। चक्की गांव के तीनों पुरवों को मिलाकर 450 घर थे जिसमें 150 घरों को घाघरा अपनी धारा में विलीन कर चुकी है। लगभग एक महीने से गांव पानी से चारों ओर से घिरा हुआ है।
गांव में चारो ओर गंदगी व्याप्त है। गांव के बीमार लोगों को बाहर जाकर अपना इलाज करना पड़ रहा है। गांव के चारों ओर लगे पानी के कारण लोगों को अपने पशुओं के चारे की व्यवस्था करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान ईनरावती देवी ने कहा कि गांव के लोगों को जो राहत मिलनी चाहिए वह नहीं मिल रही है। गांव में न तो दवा का छिड़काव हुआ और हैंडपंपों की मरम्मत हुई। मजबूरन गांव के लोगों को प्रदूषित पानी पीना पड़ रहा है।
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देवारावासी घाघरा की कटान के आदी हो चुके हैं। इसलिए वह इसकी विभीषिका झेलने के लिए पहले से ही तैयार होते हैं। वह स्वत: ही अपना आशियाना उजाड़कर दूसरी जगह जा बसते हैं लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा दुख प्रशासन की उदासीनता के कारण होता है क्योंकि प्रशासन बाढ़ से घिरे गांव के ग्रामीणों की मदद का दावा तो करता है लेकिन मदद उन तक नहीं पहुंच पाती है। हरैया ब्लॉक का चक्की गांव लगभग एक माह से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है।
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गांव के लोग प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम अब तक गांव में नहीं पहुुंची है। गांव में दवा का छिड़काव न होने के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। पानी के कारण गांव में संक्रामक बीमारियां फैल रही है। लोग मलेरिया, टाइफायड, खुजली आदि बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। ग्रामीणों के आवागमन के लिए प्रशासन ने तीन नाव लगाई है लेकिन ग्रामीणों द्वारा और नाव लगाने की मांग की जा रही है जिसे प्रशासन अनसुना कर रहा है।
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हरैया ब्लाक के देवारा खास राजा ग्राम सभा का चक्की गांव तीन पुरवों रामलखन का पुरवा, जंगी का पुरवा और रामकृपाल का पुरवा में बंटा है। जिसकी आबादी लगभग दो हजार है। रामलखन का पुरा में 100 घर, रामकृपाल का पुरा में 150 घर और जंगी का पुरा में 50 घर हैं। चक्की गांव के तीनों पुरवों को मिलाकर 450 घर थे जिसमें 150 घरों को घाघरा अपनी धारा में विलीन कर चुकी है। लगभग एक महीने से गांव पानी से चारों ओर से घिरा हुआ है।
गांव में चारो ओर गंदगी व्याप्त है। गांव के बीमार लोगों को बाहर जाकर अपना इलाज करना पड़ रहा है। गांव के चारों ओर लगे पानी के कारण लोगों को अपने पशुओं के चारे की व्यवस्था करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान ईनरावती देवी ने कहा कि गांव के लोगों को जो राहत मिलनी चाहिए वह नहीं मिल रही है। गांव में न तो दवा का छिड़काव हुआ और हैंडपंपों की मरम्मत हुई। मजबूरन गांव के लोगों को प्रदूषित पानी पीना पड़ रहा है।