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Azamgarh News: आचार्य की रचनाओं के अध्ययन की जरूरत

Sat, 25 Apr 2026 12:44 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Apr 2026 12:44 AM IST
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The need to study the works of Acharya
35 आचार्य चंद्रबलि पांडेय जयंती कार्यक्रम में अति​थियों का स्वागत करते हुए। श्रोत-आयोजक
आजमगढ़। हिन्दी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आचार्य चंद्रबली पांडेय की जयंती शुक्रवार को नेहरू हाल में मनाई गई। इस दौरान बदलते परिवेश में आचार्य चंद्रबली पांडेय की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई।
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विधायक अखिलेश यादव ने कहा कि आचार्य चंद्रबली पांडेय के साहित्यिक योगदान को समझने के लिए उनकी रचनाओं का अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल जयंती पर ही नहीं, बल्कि समय-समय पर ऐसे आयोजनों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा होनी चाहिए। मनोज सिंह ने कहा कि हिन्दी और हिंदुस्तान का संगम हमारी संस्कृति और सभ्यता की पहचान है।
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हिन्दी के उत्थान के लिए आचार्य के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके त्याग और समर्पण के कारण उन्हें दधीचि की उपमा दी गई, जबकि उनके स्वभाव में कबीर जैसी स्पष्टता और निर्भीकता थी। साहित्यकार सुभाष तिवारी कुंदन ने कहा कि आचार्य चंद्रबली पांडेय केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार हैं और आजमगढ़ की अमूल्य धरोहर हैं। इस मौके पर पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम प्रकाश राय, दुर्गेश पांडेय, विवेक जायसवाल, हरिनारायण उपाध्याय, मदन मोहन आदि मौजूद थे।
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