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मार्गदर्शक होता है साहित्यः वसीम अहमद
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Thu, 04 Feb 2016 12:00 AM IST
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शिब्ली नेशनल इंटर कॉलेज में लगे पुस्तक मेले के तीसरे दिन बुधवार को राष्ट्र निर्माण में पुस्तकालयों की भूमिका विषय पर गोष्ठी की गई। इसमें बेसिक शिक्षा एवं ऊर्जा राज्यमंत्री वसीम अहमद ने कहा कि पाठ्यक्रम की पुस्तकें जहां लोगों को ज्ञान अर्जित कराती हैं, वहीं साहित्य मार्ग दर्शन करता है। ऐसे में छात्रों का रुझान दोनों पुस्तकों की ओर होना चाहिए।
कहा कि किताबें नौनिहालों को ज्ञान अर्जन कराती हैं। इन्हीं नौनिहालों से राष्ट्र का निर्माण होता है। कहा कि पुस्तकालयों की ऐतिहासिक भूमिका रही है। आजादी के आंदोलन में शिब्ली एकेडमी जैसी संस्था के पुस्तकालय की महती भूमिका रही है।
कहा कि साहित्य भारतीय समाज की रीढ़ है और आजमगढ़ की धरती, जहां पर साहित्य उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी के रूप में देखने को मिला। जिले के साहित्यकारों राहुल, कैफी, शिब्ली नोमानी का भी जिक्र किया। बोले, लोहिया और अंबेडकर के विचारों को इन किताबों ने ही गांव-गांव पहुंचाने का कार्य किया।
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डीडीसी ऋतु सुहास ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान का प्रवाह है। ज्ञान मंदिरों में पुस्तकालय प्राण है। गोष्ठी को साहित्यकार डा. राजाराम सिंह, उर्दू विभागाध्यक्ष डा. शबाबुद्दीन, शिब्ली एकेडमी के सचिव अब्दुल मन्नान आदि ने संबोधित किया।
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कहा कि किताबें नौनिहालों को ज्ञान अर्जन कराती हैं। इन्हीं नौनिहालों से राष्ट्र का निर्माण होता है। कहा कि पुस्तकालयों की ऐतिहासिक भूमिका रही है। आजादी के आंदोलन में शिब्ली एकेडमी जैसी संस्था के पुस्तकालय की महती भूमिका रही है।
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कहा कि साहित्य भारतीय समाज की रीढ़ है और आजमगढ़ की धरती, जहां पर साहित्य उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी के रूप में देखने को मिला। जिले के साहित्यकारों राहुल, कैफी, शिब्ली नोमानी का भी जिक्र किया। बोले, लोहिया और अंबेडकर के विचारों को इन किताबों ने ही गांव-गांव पहुंचाने का कार्य किया।
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डीडीसी ऋतु सुहास ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान का प्रवाह है। ज्ञान मंदिरों में पुस्तकालय प्राण है। गोष्ठी को साहित्यकार डा. राजाराम सिंह, उर्दू विभागाध्यक्ष डा. शबाबुद्दीन, शिब्ली एकेडमी के सचिव अब्दुल मन्नान आदि ने संबोधित किया।