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जिले की साहित्यिक समृद्धि का द्योतक है 'सप्तपर्णी'
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sun, 31 Jan 2016 11:53 PM IST
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प्रगतिशील चेतना की संवाहक पत्रिका 'सप्तपर्णी' के तीसरे अंक का
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रविवार को नेहरू हाल विमोचन हुआ। इसमें उपस्थित साहित्यकारों और अन्य लोगों
ने पत्रिका के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए।
अध्यक्षता करते हुए प्रलेस के जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार लालसा लाल तरंग ने कहा कि हिंदी की लघु पत्रिकाओं में सप्तपर्णी ने अपने तीसरे ही अंक से जो सम्मान प्राप्त कर लिया है, वह आजमगढ़ की साहित्यिक समृद्धि का द्योतक है।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित पत्रिकाओं की तुलना में सप्तपर्णी अधिक विविधता पूर्ण और ज्ञानवर्धक है। डा. बद्रीनाथ ने कहा कि सीमित संसाधनों के बीच आजमगढ़ में इस प्रकार का प्रयास सराहनीय है। डा. प्रेम बहादुर सिंह ने कहा कि रविंद्रनाथ टैगोर पर केंद्रित इस अंक के माध्यम से सप्तपर्णी ने अपनी विश्वसनीयता को और भी पुख्ता कर दिया है।
डा. शशिभूषण प्रशांत ने कहा कि इस पत्रिका के आलेख अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हैं। इसका आकलन प्रबुद्घ वर्ग स्वयं करेगा और अपनी इस गुणवत्ता के कारण सप्तपर्णी आज संदर्भ के रूप में शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बन गई है। हिंदी के वरिष्ठ प्रवक्ता डा. जगदंबा प्रसाद दुबे ने कहा कि सप्तपर्णी ने अपने पहले ओर दूसरे अंक से ऐसा आभास करा दिया था कि वह निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेगी।
तीसरे अंक के कलेवर को देखकर हम आश्चर्य कर सकते हैं कि एक लघु पत्रिका अपनी गुणवत्ता और महत्ता के प्रति इतनी सजग है। भोजपुरी के वरिष्ठ कवि राम प्रकाश शुक्ल निर्मोही ने कहा कि स्त्री विमर्श पर सप्तपर्णी का तीखा और धारदार मिजाज हिंदी के पाठकों के लिए एक खुराक की तरह साबित होगा।
कार्यक्रम में डा. वेद प्रकाश उपाध्याय, डा. आलोक मिश्र, शिक्ष्का नेता वेदपाल सिंह, डा. सोनी पांडेय, आशा सिंह, प्रभु नारायण पांडेय प्रेमी, जगदीश प्रसाद बरनवाल आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर डा. रामदरश सिंह, रमेश मौर्य, डा. जगदंबा दुबे, सीताराम पांडेय, अंकुर सहाय, राजमंगल पांडेय, दीपक अग्रवाल, सपना बनर्जी, दिनेश श्रीवास्तव, एसके दत्ता, सुरेंद्र सिंह, विजय प्रकाश आदि उपस्थित थे। बृजेश सिंह और अर्चना सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।
अध्यक्षता करते हुए प्रलेस के जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार लालसा लाल तरंग ने कहा कि हिंदी की लघु पत्रिकाओं में सप्तपर्णी ने अपने तीसरे ही अंक से जो सम्मान प्राप्त कर लिया है, वह आजमगढ़ की साहित्यिक समृद्धि का द्योतक है।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित पत्रिकाओं की तुलना में सप्तपर्णी अधिक विविधता पूर्ण और ज्ञानवर्धक है। डा. बद्रीनाथ ने कहा कि सीमित संसाधनों के बीच आजमगढ़ में इस प्रकार का प्रयास सराहनीय है। डा. प्रेम बहादुर सिंह ने कहा कि रविंद्रनाथ टैगोर पर केंद्रित इस अंक के माध्यम से सप्तपर्णी ने अपनी विश्वसनीयता को और भी पुख्ता कर दिया है।
डा. शशिभूषण प्रशांत ने कहा कि इस पत्रिका के आलेख अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हैं। इसका आकलन प्रबुद्घ वर्ग स्वयं करेगा और अपनी इस गुणवत्ता के कारण सप्तपर्णी आज संदर्भ के रूप में शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बन गई है। हिंदी के वरिष्ठ प्रवक्ता डा. जगदंबा प्रसाद दुबे ने कहा कि सप्तपर्णी ने अपने पहले ओर दूसरे अंक से ऐसा आभास करा दिया था कि वह निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेगी।
तीसरे अंक के कलेवर को देखकर हम आश्चर्य कर सकते हैं कि एक लघु पत्रिका अपनी गुणवत्ता और महत्ता के प्रति इतनी सजग है। भोजपुरी के वरिष्ठ कवि राम प्रकाश शुक्ल निर्मोही ने कहा कि स्त्री विमर्श पर सप्तपर्णी का तीखा और धारदार मिजाज हिंदी के पाठकों के लिए एक खुराक की तरह साबित होगा।
कार्यक्रम में डा. वेद प्रकाश उपाध्याय, डा. आलोक मिश्र, शिक्ष्का नेता वेदपाल सिंह, डा. सोनी पांडेय, आशा सिंह, प्रभु नारायण पांडेय प्रेमी, जगदीश प्रसाद बरनवाल आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर डा. रामदरश सिंह, रमेश मौर्य, डा. जगदंबा दुबे, सीताराम पांडेय, अंकुर सहाय, राजमंगल पांडेय, दीपक अग्रवाल, सपना बनर्जी, दिनेश श्रीवास्तव, एसके दत्ता, सुरेंद्र सिंह, विजय प्रकाश आदि उपस्थित थे। बृजेश सिंह और अर्चना सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।