लाटघाट। लाटघाट बाजार में चल रही 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के चौथे दिन बृहस्पतिवार को दो चरणों में दो हजार लोगों ने आहुति दी। 13 जनवरी से चल रहे गायत्री महायज्ञ का समापन हुआ। आचार्य राजकुमार भृगु ने आए हुए श्रद्धालु और भक्तों को पूर्णाहुति के साथ सभी को एक-एक बुराई छोड़ने व एक एक अच्छाई को अपनाने का संकल्प दिलाया। विद्यारंभ संस्कार, दीक्षा संस्कार और हरितिमा संवर्धन के लिए एक एक वृक्ष लगाने का भी संकल्प दिया गया।
आचार्य राजकुमार भृगु ने कहा कि दीक्षा संस्कार और विद्या संस्कार में हजारों लोग सम्मिलित हुए। सभी ने संकल्प लिया कि हरितिमा संवर्धन के लिए एक एक वृक्ष लगाएं और यज्ञ को सफल बनाने का कार्य करेंगे। आयोजक रणविजय सिंह ने यज्ञ में आए हुए सभी का स्वागत अभिनंदन किया। आचार्य राजकुमार भृगु ने आध्यात्मिक प्रवचन करते हुए मार्मिक और वर्तमान समय में बुराई के विचार, भ्रष्टाचार आदि पर चर्चा करते हुए कहा कि इनसे जितना ही दूर होंगे उतना ही मानव जाति के साथ संसार की भलाई होगी। व्यक्ति को झुकना सीखना चाहिए क्योंकि मरे हुए लोग ही अकड़े होते हैं। झुकने से बल, बुद्धि, विद्या, संस्कार सब कुछ आसानी से प्राप्त हो जाता है।