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Azamgarh News: चली गई ठंड... 20 हजार परिषदीय बच्चों को नहीं मिला स्वेटर
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शैक्षिक सत्र समाप्ति की ओर है। ठिठुरन भरी ठंड अलविदा हो रही है। मगर, आजमगढ़ जिले के 20 हजार परिषदीय बच्चे बिना स्वेटर के ही पूरी ठंड गुजार दिए। इन बच्चों को ड्रेस, बैग और स्वेटर आदि के लिए धन उपलब्ध नहीं हो पाया। जिम्मेदार यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि इनके अभिभावकों का केवाईसी अपडेट नहीं है। मगर, इस समस्या के समाधान के लिए विभाग ने कोई पहल नहीं की।
जिले में बेसिक शिक्षा परिषद के 1724 प्राथमिक विद्यालय, 458 उच्च प्राथमिक व 524 कंपोजिट विद्यालय चल रहे हैं। इनमें पढ़ रहे बच्चों को ड्रेस, बैग, स्वेटर के साथ ही स्टेशनरी के लिए उनके अभिभावकों के खाते में प्रति छात्र 1200 रुपये डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजे जाते हैं। ताकि बच्चों की पढ़ाई के खर्च का बोझ अभिभावकों पर न पड़े। इस वर्ष कुल तीन लाख 56 हजार बच्चों को डीबीटी से पैसा भेजा जाना था। इनमें से करीब 20700 ऐसे बच्चे थे जिनका आधार नहीं बन पाया या फिर उनके अभिभावकाें के खाते की केवाइसी व आधार लिंक नहीं था। जिसके कारण वह डीबीटी के माध्यम से भेजे जानी वाली 1200 रुपये की धनराशि पाने से वंचित रह गए। ऐसे में जिन अभिभावकों की आर्थिक स्थिति ठीक थी, उन्होंने अपने बच्चों का ड्रेस, जूता-मोजा खरीद लिए, लेकिन जिनकी कमजोर रही उनके बच्चे विद्यालय बिना जूता-मोजा व स्वेटर के स्कूल पहुंच रहे हैं।
बीएसए समीर ने कहा कि जिनके अभिभावकों को डीबीटी की धनराशि नहीं मिली है, उनके आधार का सत्यापन कराया जा रहा है। कुछ का सत्यापन हो चुका है। उन्हें यह धनराशि स्थानांतरित की जा रही है। शेष सभी बच्चों के लिए डीबीटी धनराशि जल्द स्थानांतरित कर दी जाएगी।
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जिले में बेसिक शिक्षा परिषद के 1724 प्राथमिक विद्यालय, 458 उच्च प्राथमिक व 524 कंपोजिट विद्यालय चल रहे हैं। इनमें पढ़ रहे बच्चों को ड्रेस, बैग, स्वेटर के साथ ही स्टेशनरी के लिए उनके अभिभावकों के खाते में प्रति छात्र 1200 रुपये डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजे जाते हैं। ताकि बच्चों की पढ़ाई के खर्च का बोझ अभिभावकों पर न पड़े। इस वर्ष कुल तीन लाख 56 हजार बच्चों को डीबीटी से पैसा भेजा जाना था। इनमें से करीब 20700 ऐसे बच्चे थे जिनका आधार नहीं बन पाया या फिर उनके अभिभावकाें के खाते की केवाइसी व आधार लिंक नहीं था। जिसके कारण वह डीबीटी के माध्यम से भेजे जानी वाली 1200 रुपये की धनराशि पाने से वंचित रह गए। ऐसे में जिन अभिभावकों की आर्थिक स्थिति ठीक थी, उन्होंने अपने बच्चों का ड्रेस, जूता-मोजा खरीद लिए, लेकिन जिनकी कमजोर रही उनके बच्चे विद्यालय बिना जूता-मोजा व स्वेटर के स्कूल पहुंच रहे हैं।
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बीएसए समीर ने कहा कि जिनके अभिभावकों को डीबीटी की धनराशि नहीं मिली है, उनके आधार का सत्यापन कराया जा रहा है। कुछ का सत्यापन हो चुका है। उन्हें यह धनराशि स्थानांतरित की जा रही है। शेष सभी बच्चों के लिए डीबीटी धनराशि जल्द स्थानांतरित कर दी जाएगी।
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