फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   The BSP leader killed in the battle of supremacy

वर्चस्व की जंग में गई बसपा नेता की जान

Thu, 16 Jul 2015 11:36 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आजमगढ़
ब्यूरो अमर उजाला, आजमगढ़ Updated Thu, 16 Jul 2015 11:36 PM IST
विज्ञापन
The BSP leader killed in the battle of supremacy
गंभीरपुर के सरसेना खालसा गांव में करीब आठ माह पहले हुई बसपा नेता विजय बहादुर की हत्या वर्चस्व की जंग में हुई थी। पुलिस ने बुधवार की शाम फरिहां मोड़ से भाड़े के दो शूटरों को गिरफ्तार इस हत्याकांड का खुलासा किया। शूटरों को गांव के ही एक व्यक्ति ने एक लाख रुपये की सुपारी दी थी।
विज्ञापन


पुलिस लाइंस में गुरुवार को एएसपी नगर विनोद कुमार ने बताया कि सरसेना खालसा गांव के रहने वाले बसपा नेता विजय बहादुर की उन्हीं के गांव के उब्बैदुल्लाह और शौकत के बीच वर्चस्व की जंग चलती थी। उनकी सास फूला देवी के पार्टी पदाधिकारी होने से विजय के आगे इन दोनों की नहीं चलती थी। आरोप है कि उब्बैदुल्लाह और शौकत खेत के बगल की ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा कर रहे थे, जिसका विजय ने विरोध किया था।
विज्ञापन


बकौल एएसपी, विजय बहादुर से परेशान इन लोगों ने उन्हें रास्ते से हटाने के लिए गांव के ही आपराधिक छवि के एक व्यक्ति से संपर्क साधा। उसने जौनपुर के खेतासराय के मोहियुद्दीनपुर गांव के एहसान खान और सुंबुलपुर गांव के  अनीश को विजय की हत्या के लिए एक लाख रुपये की सुपारी दी। इसके बाद छह नवंबर 2014 की रात एहसान और अनीश खालसा गांव पहुंचे। वहां उन्हें शौकत ने लाइसेंसी राइफल और तमंचा दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बाद इन लोगों ने विजय की हत्या कर दी। बुधवार की शाम एहसान और अनीश फरिहां मोड़ पर उब्बैदुल्लाह से सुपारी की रकम लेने आए थे, जब उन्हें पकड़ लिया गया। गिरफ्तारी करने वाली टीम में एसओ गंभीरपुर एसएन वर्मा, स्वाट टीम और सर्विलांस टीम के अधिकारी शामिल थे। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त राइफल और मोबाइल भी बरामद कर लिया। पुलिस फरार अन्य तीनों आरोपियों की तलाश कर रही है।

बेगुनाहों ने काटी ढाई माह की जेल ः विजय बहादुर की हत्या के बाद उनकी सास फूला देवी ने मेहनगर के गौरा गांव निवासी अशोक सिंह और भूपेंद्र सिंह के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घटना का कारण गौरा गांव में चल रहा कोटे का विवाद बताया गया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कर जेल भेज दिया, मगर आरोपियों ने पेशी के दौरान कोर्ट में अपनी व्यथा सुनाई और बेगुनाह होने का सबूत सौंपा।

इसके बाद 25 जनवरी को ढाई महीने बाद ये दोनों रिहा हो गए। विजय बहादुर की गौरा गांव में ससुराल है। उनकी सास अपने गांव का कोटा लेना चाहती थीं, जबकि अशोक और भूपेंद्र सिंह उनके खिलाफ थे। 31 दिसंबर 2014 को इसे लेकर गांव में पंचायत भी हुई थी। इसमें विवाद हो गया। इधर बीच छह नवंबर 2014 को विजय की हत्या हो गई और सास का शक अशोक और भूपेंद्र की तरफ घूम गया।


इस मामले की जांच सीओ सदर कर रहे थे, लेकिन फूला देवी ने डीआईजी के यहां प्रार्थना पत्र देकर सीओ पर पक्षपात का आरोप लगाया था। इसके बाद जांच बलिया के बैरिया के सीओ को दे दी गई। उनकी जांच में भी अशोक और भूपेंद्र निर्दोष पाए गए। इसके बाद पुन: जांच एसओ गंभीरपुर और क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। तमाम बिंदुओं पर जांच करने, सर्विलांस, मोबाइल की कॉल डिटेल आदि का अध्ययन करने के बाद पुलिस वारदात की तह तक पहुंची।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed