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खड़ी फसल पर झूलते तारों का ग्रहण
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sun, 12 Apr 2015 11:43 PM IST
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किसानों के लिए उसकी फसल ही पूंजी है, जिसके सहारे वह अपनी सारी खुशियां बटोरता है। लेकिन उसकी फसल के ऊपर झूलते बिजली के तार ग्रहण बन गए हैं। प्राकृतिक आपदा के शिकार किसानों की रही-सही फसल अब बिजली विभाग की लापरवाही की भेंट चढ़ने लगी है।
बिजली के लटके जर्जर तारों से निकलने वाली चिंगारियां किसानों की जमा पूंजी को खाक में मिला दे रही है। किसानों की माने तो उन्होंने विभागीय अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई लेकिन उनकी बातों को विभाग अमल में नहीं लाया। दूसरी तरफ, अग्निशमन विभाग भी इन चुनौतियों का सामना करने की अपेक्षा संसाधनों के अभाव का रोना रोता है। विभाग ने बिजली विभाग को कोई नोटिस आदि जारी करने की कवायद भी नहीं की है।
गर्मी का मौसम शुरू होते ही जनपद में आग लगने की घटना आम हो गई। अगर पिछले तीन दिनों की स्थिति पर गौर करें तो गुरुवार को 22, शुक्रवार को आठ और शनिवार की शाम तीन बजे तक पांच स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हुईं। इनमें किसानों का सब कुछ जलकर राख हो गया।
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अगर इन घटनाओं के कारणों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा घटनाएं विद्युत तारों में हुई स्पार्किंग के कारण हुई हैं। फायर स्टेशन अधिकारी इंद्रासन यादव ने बताया कि इस संबंध में गुरुवार को जिलाधिकारी से वार्ता हुई। उन्हें सुझाव दिया गया कि अगर ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक काट दी जाए तो इन अगलगी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि यह हमारे हाथ में नहीं है। इसके लिए हमें शासन को पत्र लिखना होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के तार काफी नीचे तक लटके हुए हैं। जैसे ही थोड़ी सी हवा चलती है, यह तार आपस में सटते हैं और इनसे निकलने वाली चिंगारी गेहूं को अपनी चपेट में ले लेती है। जब तक फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंचती है, सब कुछ राख हो चुका होता है। - इंद्रासन यादव, फायर स्टेशन अधिकारी
विद्युत तारों में होने वाली स्पार्किंग से लगने वाली आग की घटनाओं को विभाग ने संज्ञान में लिया है। इस क्रम में क्षेत्रों को चिन्हित कर लटके तारों को बांधने का कार्य शुरु कर दिया गया है। जहानागंज और मुबारकपुर क्षेत्र में काम शुरु भी हो चुके हैं। - ओपी राम, अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड प्रथम
ग्रामीणों की जुबानी दर्द की कहानी
लाटघाट क्षेत्र में बिजली के तार काफी नीचे तक लटके हुए हैं। इनमें शार्ट होने से फसल में आग लग जाती है। लाटघाट में फायर स्टेशन न होने के कारण फोन करने पर रौनापार और आजमगढ़ से गाड़ी आती है। जब तक फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंचती है, सब कुछ नष्ट हो चुका होता है। अगर बाजार में एक छोटी गाड़ी भी होती तो क्षेत्र के लोगों को काफी सहूलियत हो जाती। - आशीष राय, तरौका
जहां जमीन उपलब्ध नहीं है, वहां पर काफी दिनों से जमीन के लिए प्रयास किया जा रहा है लेकिन यहां के लोग फायर स्टेशन के लिए जमीन देने को तैयार है। फिर भी फायर स्टेशन की स्थापना नहीं की जा रही है। हमलोग काफी दिनों से लाटघाट में फायर स्टेशन की मांग कर रहे हैं लेकिन हमारी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
- रामअवध मौर्य, मुहम्मदपुर गांव
हमारे क्षेत्र में आग लगने की घटनाएं ज्यादा होती हैं। फोन करने पर जब तक आजमगढ़ और रौनापार से फायर ब्रिगेड की गाड़ी आती है, तब तक सब कुछ नष्ट हो चुका होता है। काफी दिनों बाद देवारा क्षेत्र में फायर स्टेशन निर्माण की मांग पूरी हुई तो वह भी महराजगंज में बन रहा है। इसका हमें कुछ खास फायदा नहीं होगा।
- नारद सिंह पटेल, बलुआ गांव
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बिजली के लटके जर्जर तारों से निकलने वाली चिंगारियां किसानों की जमा पूंजी को खाक में मिला दे रही है। किसानों की माने तो उन्होंने विभागीय अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई लेकिन उनकी बातों को विभाग अमल में नहीं लाया। दूसरी तरफ, अग्निशमन विभाग भी इन चुनौतियों का सामना करने की अपेक्षा संसाधनों के अभाव का रोना रोता है। विभाग ने बिजली विभाग को कोई नोटिस आदि जारी करने की कवायद भी नहीं की है।
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गर्मी का मौसम शुरू होते ही जनपद में आग लगने की घटना आम हो गई। अगर पिछले तीन दिनों की स्थिति पर गौर करें तो गुरुवार को 22, शुक्रवार को आठ और शनिवार की शाम तीन बजे तक पांच स्थानों पर आग लगने की घटनाएं हुईं। इनमें किसानों का सब कुछ जलकर राख हो गया।
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अगर इन घटनाओं के कारणों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा घटनाएं विद्युत तारों में हुई स्पार्किंग के कारण हुई हैं। फायर स्टेशन अधिकारी इंद्रासन यादव ने बताया कि इस संबंध में गुरुवार को जिलाधिकारी से वार्ता हुई। उन्हें सुझाव दिया गया कि अगर ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक काट दी जाए तो इन अगलगी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि यह हमारे हाथ में नहीं है। इसके लिए हमें शासन को पत्र लिखना होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के तार काफी नीचे तक लटके हुए हैं। जैसे ही थोड़ी सी हवा चलती है, यह तार आपस में सटते हैं और इनसे निकलने वाली चिंगारी गेहूं को अपनी चपेट में ले लेती है। जब तक फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंचती है, सब कुछ राख हो चुका होता है। - इंद्रासन यादव, फायर स्टेशन अधिकारी
विद्युत तारों में होने वाली स्पार्किंग से लगने वाली आग की घटनाओं को विभाग ने संज्ञान में लिया है। इस क्रम में क्षेत्रों को चिन्हित कर लटके तारों को बांधने का कार्य शुरु कर दिया गया है। जहानागंज और मुबारकपुर क्षेत्र में काम शुरु भी हो चुके हैं। - ओपी राम, अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड प्रथम
ग्रामीणों की जुबानी दर्द की कहानी
लाटघाट क्षेत्र में बिजली के तार काफी नीचे तक लटके हुए हैं। इनमें शार्ट होने से फसल में आग लग जाती है। लाटघाट में फायर स्टेशन न होने के कारण फोन करने पर रौनापार और आजमगढ़ से गाड़ी आती है। जब तक फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंचती है, सब कुछ नष्ट हो चुका होता है। अगर बाजार में एक छोटी गाड़ी भी होती तो क्षेत्र के लोगों को काफी सहूलियत हो जाती। - आशीष राय, तरौका
जहां जमीन उपलब्ध नहीं है, वहां पर काफी दिनों से जमीन के लिए प्रयास किया जा रहा है लेकिन यहां के लोग फायर स्टेशन के लिए जमीन देने को तैयार है। फिर भी फायर स्टेशन की स्थापना नहीं की जा रही है। हमलोग काफी दिनों से लाटघाट में फायर स्टेशन की मांग कर रहे हैं लेकिन हमारी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
- रामअवध मौर्य, मुहम्मदपुर गांव
हमारे क्षेत्र में आग लगने की घटनाएं ज्यादा होती हैं। फोन करने पर जब तक आजमगढ़ और रौनापार से फायर ब्रिगेड की गाड़ी आती है, तब तक सब कुछ नष्ट हो चुका होता है। काफी दिनों बाद देवारा क्षेत्र में फायर स्टेशन निर्माण की मांग पूरी हुई तो वह भी महराजगंज में बन रहा है। इसका हमें कुछ खास फायदा नहीं होगा।
- नारद सिंह पटेल, बलुआ गांव