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Azamgarh News: लखनऊ से होगी ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति की निगरानी
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आजमगढ़। जल जीवन मिशन के संचालित जिले की सभी ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाओं को लखनऊ से सीधे जोड़ा जाएगा। इन योजनाओं में सेंसर युक्त उपकरण लगाए जाएंगे।
इससे कितना पानी नदी से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से होते हुए टंकी तक पहुंचा, उसकी सूचना लखनऊ में बैठे अधिकारी देख सकेंगे। जिले की अब तक 23 परियोजनाएं सीधे लखनऊ से जुड़ चुकी हैं।
जल जीवन मिशन के अधिशासी अभियंता हेमंत सिंह ने बताया कि एससीएडीए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, इसके माध्यम से रियल टाइम सूचनाएं दिखाई देती हैं, साथ ही भेजी जाती हैं।
जल जीवन मिशन में इस प्रणाली से सभी ग्राम समूह पेयजल योजनाओं को पूर्ण किया जा रहा है। प्रत्येक ग्राम समूह पेयजल योजनाओं को डब्लूटीपी यानि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा जाएगा। साथ ही जिले में स्थापित हो रही सभी 1461 परियोजनाओं में एक सेंसर लगाया जाएगा।
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इस सेंसर के जरिए सभी परियोजनाएं सीधे लखनऊ से जुड़ेंगी। जैसे चुनाव के समय वेब कास्टिंग के माध्यम से पोलिंग बूथ का रियल टाइम प्रसारण पूरे देश में डिजिटल प्लेटफार्म पर देखा जाता है।
उसी प्रकार एससीएडीए के माध्यम से संबंधित नदी से रॉ-वाटर के रूप में कितना पानी लिया जा रहा है और कितना पानी टंकी पर एवं गांवों में किस समय भेजा जा रहा है, इसकी मॉनीटरिंग अब सीधे प्रदेश मुख्यालय से हो सकेगी।
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इससे कितना पानी नदी से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से होते हुए टंकी तक पहुंचा, उसकी सूचना लखनऊ में बैठे अधिकारी देख सकेंगे। जिले की अब तक 23 परियोजनाएं सीधे लखनऊ से जुड़ चुकी हैं।
जल जीवन मिशन के अधिशासी अभियंता हेमंत सिंह ने बताया कि एससीएडीए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, इसके माध्यम से रियल टाइम सूचनाएं दिखाई देती हैं, साथ ही भेजी जाती हैं।
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जल जीवन मिशन में इस प्रणाली से सभी ग्राम समूह पेयजल योजनाओं को पूर्ण किया जा रहा है। प्रत्येक ग्राम समूह पेयजल योजनाओं को डब्लूटीपी यानि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ा जाएगा। साथ ही जिले में स्थापित हो रही सभी 1461 परियोजनाओं में एक सेंसर लगाया जाएगा।
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इस सेंसर के जरिए सभी परियोजनाएं सीधे लखनऊ से जुड़ेंगी। जैसे चुनाव के समय वेब कास्टिंग के माध्यम से पोलिंग बूथ का रियल टाइम प्रसारण पूरे देश में डिजिटल प्लेटफार्म पर देखा जाता है।
उसी प्रकार एससीएडीए के माध्यम से संबंधित नदी से रॉ-वाटर के रूप में कितना पानी लिया जा रहा है और कितना पानी टंकी पर एवं गांवों में किस समय भेजा जा रहा है, इसकी मॉनीटरिंग अब सीधे प्रदेश मुख्यालय से हो सकेगी।