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कृषि विश्वविद्यालय में 15 जुलाई से शुरू होगी पढ़ाई
अमर उजाला ब्यूरो आजमगढ़।
Updated Sat, 13 Jun 2015 11:47 PM IST
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प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन श्रीवास्तव और आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अख्तर हसीब ने शनिवार को कोटवा में निर्माणाधीन कृषि विश्वविद्यालय कैंपस का निरीक्षण किया।
इस दौरान प्रमुख सचिव ने कार्यदायी संस्था को जल्द अधूरे कार्यों को पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सत्र में 15 जुलाई से यहां पर पठन-पाठन शुरू होगा। इसलिए वह कार्यों में तेजी लाएं और शीघ्रता से पूरा करें। इसके बाद, प्रमुख सचिव कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा में आयोजित गुणवत्तायुक्त धान बीज उत्पादन तकनीकी पर रोजगारपरक व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस बार औसत से कम बारिश होने की संभावना जताई जा रही है।
इसलिए किसान कम समय में पैदा होने वाले और कम पानी में होने वाले धान के बीज की रोपाई करें। अगर इसके बाद भी कोई समस्या आती है तो केंद्र के वैज्ञानिकों से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि हो सके तो कम पानी में पैदा होने वाले मक्का और बाजरे की खेती करें क्योंकि कम पानी में पैदा होने वाली यह सबसे अच्छी फसल है।
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उन्होंने किसानों से कहा कि किसानों की हर प्रकार से मदद के लिए वैज्ञानिक तैयार हैं। इसलिए किसानों को चाहिए कि किसी भी प्रकार की समस्या के लिए वह हमारे वैज्ञानिकों की सलाह लेने से हिचकें नहीं। इसके बाद, उन्होंने सर्किट हाउस में कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस मौके पर डीएम सुहास एलवाई, निदेशक प्रसार डा. एसपी सिंह, ज्वाइंट डायरेक्टर उदय कुमार, डा. एसके यादव, उपनिदेशक कृषि आरबी सिंह, मऊ आशुतोष मिश्रा, कृषि वैज्ञानिक डा. आरके सिंह, डा. रणधीर नायक, डा. एलके वर्मा, आरपीके सिंह आदि उपस्थित थे।
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इस दौरान प्रमुख सचिव ने कार्यदायी संस्था को जल्द अधूरे कार्यों को पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सत्र में 15 जुलाई से यहां पर पठन-पाठन शुरू होगा। इसलिए वह कार्यों में तेजी लाएं और शीघ्रता से पूरा करें। इसके बाद, प्रमुख सचिव कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा में आयोजित गुणवत्तायुक्त धान बीज उत्पादन तकनीकी पर रोजगारपरक व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस बार औसत से कम बारिश होने की संभावना जताई जा रही है।
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इसलिए किसान कम समय में पैदा होने वाले और कम पानी में होने वाले धान के बीज की रोपाई करें। अगर इसके बाद भी कोई समस्या आती है तो केंद्र के वैज्ञानिकों से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि हो सके तो कम पानी में पैदा होने वाले मक्का और बाजरे की खेती करें क्योंकि कम पानी में पैदा होने वाली यह सबसे अच्छी फसल है।
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उन्होंने किसानों से कहा कि किसानों की हर प्रकार से मदद के लिए वैज्ञानिक तैयार हैं। इसलिए किसानों को चाहिए कि किसी भी प्रकार की समस्या के लिए वह हमारे वैज्ञानिकों की सलाह लेने से हिचकें नहीं। इसके बाद, उन्होंने सर्किट हाउस में कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस मौके पर डीएम सुहास एलवाई, निदेशक प्रसार डा. एसपी सिंह, ज्वाइंट डायरेक्टर उदय कुमार, डा. एसके यादव, उपनिदेशक कृषि आरबी सिंह, मऊ आशुतोष मिश्रा, कृषि वैज्ञानिक डा. आरके सिंह, डा. रणधीर नायक, डा. एलके वर्मा, आरपीके सिंह आदि उपस्थित थे।