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एफआईआर के बाद भी जलाई जार ही पराली
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जीयनपुर स्थित नवोदय विद्यालय के बगल में जलाई जा रही पराली।
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। धान कटाई की तेजी पकड़ने के साथ ही खेतों में पराली का जलाना भी शुरू हो गया है। यह जानते हुए भी इसका काला धुआं हमारी सेहत, खेती और पर्यावरण के लिए कितना घातक है, ये कार्य बदस्तूर जारी है। पराली के प्रबंधन के लिए कई आसान उपाय भी मौजूद हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एजीटी) के निर्देश के क्रम में पराली जलाने वाले किसानों के लिए दंड का प्रावधान किया गया है। एफआईआर भी कराई जा रही है। पराली जलाने की घटनाओं की मॉनीटरिग सेटलाइट से कराई जा रही है। इसके बाद भी लोग जनपद में पराली जला रहे हैं।
पराली जलाने से प्रदूषण फैलता है और वातावरण अशुद्ध होता है। इसके चलते घुटन महसूस होती है और सांस लेने में परेशानी होती है। अनेक प्रकार की बीमारियों का डर बना रहता है। साथ ही खेत की उर्वरा शक्ति कम होती है। इसके बाद भी लोग कम्बाइन मशीन से धान की कटाई कराकर बचे धान डंठल (पराली) को जला रहे हैं। सगड़ी क्षेत्र के जीयनपुर, अजमतगढ़, अंजानशहीद, चांदपट्टी, करमैनी, भीमबर, छीहीं, छिछोरी, बिंदवल, बिलरियागंज, सरगहा सागर, सगड़ी, हरैया, मनिकाडीह, जमीन हरखोरी, बनकट सहित पूरे क्षेत्र में धान के डंठल(पराली) को लोग जला रहे हैं। प्रशासन भी मूकदर्शक बना हुआ है।
15 हजार तक जुर्माने का प्रावधान
आजमगढ़। उप कृषि निदेशक डॉ. आरके मौर्य ने बताया कि पराली जलाने पर जिन किसानों का क्षेत्रफल दो एकड़ से कम है उन्हें प्रति घटना 2500 रुपये। पांच एकड़ तक क्षेत्रफल पर पांच हजार रुपये प्रति घटना और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल होने पर 15000 रुपये प्रति घटना की दर से अर्थदंड लगाया जाएगा।
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बढ़ रहा धरती का तापमान
आजमगढ़। उप कृषि निदेशक डॉ. आरके मौर्य ने बताया कि फसल अवशेष जलाए जाने से न केवल धरती का तापमान बढ़ रहा है, बल्कि पर्यावरण दूषित होने के साथ पशुओं के चारे की कमी एवं लाभदायक सूक्ष्मजीवों के नष्ट हो जाने से मृदा उर्वरता भी प्रभावित हो रही है। फसल अवशेष जलाए जाने का दुष्परिणाम वायु प्रदूषण के रूप में परिलक्षित हो रहा है। कतिपय स्थानों पर अग्निकांड जैसी भयानक घटनाएं भी घटित होती हैं।
कार्रवाई को संयुक्त टीम गठित
आजमगढ़। पराली जलाए जाने की घटना न हो, इसके लिए राजस्व विभाग, पुलिस विभाग एवं कृषि विभाग के अधिकारियों की टीम गठित कर दी गई है। निर्देशित किया गया है कि क्षेत्र में भ्रमण कर पराली न जलाने के बारे में किसानों को जागरूक करें। यदि कोई किसान पराली जलाता है तो राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में दंड की कार्रवाई सुनिश्चित करें। बिना स्ट्रॉ-रीपर लगाए यदि कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई की जाएगी तो उनके कंबाइन हार्वेस्टर को सीज करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
खेत में पराली जला रही थी महिला किसान, एफआईआर
गोरिया बाजार। बिलरियागंज थाने में तैनात दरोगा ने सोमवार को तहरीर देकर थाने में पराली जलाने वाले के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें बिलरियागंज थाने के पाती बुजुर्ग गांव निवासी चंदू देवी पत्नी बेचू राम को आरोपित किया है। पराली जलाने पर एफआईआर का जनपद में ये पहला मामला है। केस दर्ज कराने वाले दरोगा मो. सगीर खान के मुताबिक सोमवार को पाती बुजुर्ग गांव के पास धान के खेत में पराली जलाई जा रही थी। बिलरियागंज थाने के शेखूपुर गांव निवासी सरफुद्दीन का खेत पाती बुजुर्ग गांव निवासी चंदू देवी पत्नी बेचू राम (बटाई) अधिया पर खेती करने के ली है। चंदू देवी ही खेत से धान की फसल कटवाकर पराली को जलाई है। एसओ बिलरियागंज मनोज सिंह ने बताया कि घटना की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही।
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कई यंत्र हैं। किसान इसका प्रयोग कर अपने खेत की उर्वरा शक्ति को बढ़ा सकते हैं। पराली जलाने से भूमि की उर्वरता कम होती है। फसलों के सहायक सूक्ष्म जीव मर जाते हैं। इससे वायु प्रदूषण भी फैल रहा है। इसे देखते हुए एफआईआर और अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। डॉ. आरके मौर्य, उप कृषि निदेशक
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पराली जलाने से प्रदूषण फैलता है और वातावरण अशुद्ध होता है। इसके चलते घुटन महसूस होती है और सांस लेने में परेशानी होती है। अनेक प्रकार की बीमारियों का डर बना रहता है। साथ ही खेत की उर्वरा शक्ति कम होती है। इसके बाद भी लोग कम्बाइन मशीन से धान की कटाई कराकर बचे धान डंठल (पराली) को जला रहे हैं। सगड़ी क्षेत्र के जीयनपुर, अजमतगढ़, अंजानशहीद, चांदपट्टी, करमैनी, भीमबर, छीहीं, छिछोरी, बिंदवल, बिलरियागंज, सरगहा सागर, सगड़ी, हरैया, मनिकाडीह, जमीन हरखोरी, बनकट सहित पूरे क्षेत्र में धान के डंठल(पराली) को लोग जला रहे हैं। प्रशासन भी मूकदर्शक बना हुआ है।
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15 हजार तक जुर्माने का प्रावधान
आजमगढ़। उप कृषि निदेशक डॉ. आरके मौर्य ने बताया कि पराली जलाने पर जिन किसानों का क्षेत्रफल दो एकड़ से कम है उन्हें प्रति घटना 2500 रुपये। पांच एकड़ तक क्षेत्रफल पर पांच हजार रुपये प्रति घटना और पांच एकड़ से अधिक क्षेत्रफल होने पर 15000 रुपये प्रति घटना की दर से अर्थदंड लगाया जाएगा।
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बढ़ रहा धरती का तापमान
आजमगढ़। उप कृषि निदेशक डॉ. आरके मौर्य ने बताया कि फसल अवशेष जलाए जाने से न केवल धरती का तापमान बढ़ रहा है, बल्कि पर्यावरण दूषित होने के साथ पशुओं के चारे की कमी एवं लाभदायक सूक्ष्मजीवों के नष्ट हो जाने से मृदा उर्वरता भी प्रभावित हो रही है। फसल अवशेष जलाए जाने का दुष्परिणाम वायु प्रदूषण के रूप में परिलक्षित हो रहा है। कतिपय स्थानों पर अग्निकांड जैसी भयानक घटनाएं भी घटित होती हैं।
कार्रवाई को संयुक्त टीम गठित
आजमगढ़। पराली जलाए जाने की घटना न हो, इसके लिए राजस्व विभाग, पुलिस विभाग एवं कृषि विभाग के अधिकारियों की टीम गठित कर दी गई है। निर्देशित किया गया है कि क्षेत्र में भ्रमण कर पराली न जलाने के बारे में किसानों को जागरूक करें। यदि कोई किसान पराली जलाता है तो राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में दंड की कार्रवाई सुनिश्चित करें। बिना स्ट्रॉ-रीपर लगाए यदि कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई की जाएगी तो उनके कंबाइन हार्वेस्टर को सीज करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
खेत में पराली जला रही थी महिला किसान, एफआईआर
गोरिया बाजार। बिलरियागंज थाने में तैनात दरोगा ने सोमवार को तहरीर देकर थाने में पराली जलाने वाले के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें बिलरियागंज थाने के पाती बुजुर्ग गांव निवासी चंदू देवी पत्नी बेचू राम को आरोपित किया है। पराली जलाने पर एफआईआर का जनपद में ये पहला मामला है। केस दर्ज कराने वाले दरोगा मो. सगीर खान के मुताबिक सोमवार को पाती बुजुर्ग गांव के पास धान के खेत में पराली जलाई जा रही थी। बिलरियागंज थाने के शेखूपुर गांव निवासी सरफुद्दीन का खेत पाती बुजुर्ग गांव निवासी चंदू देवी पत्नी बेचू राम (बटाई) अधिया पर खेती करने के ली है। चंदू देवी ही खेत से धान की फसल कटवाकर पराली को जलाई है। एसओ बिलरियागंज मनोज सिंह ने बताया कि घटना की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही।
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कई यंत्र हैं। किसान इसका प्रयोग कर अपने खेत की उर्वरा शक्ति को बढ़ा सकते हैं। पराली जलाने से भूमि की उर्वरता कम होती है। फसलों के सहायक सूक्ष्म जीव मर जाते हैं। इससे वायु प्रदूषण भी फैल रहा है। इसे देखते हुए एफआईआर और अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। डॉ. आरके मौर्य, उप कृषि निदेशक