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कूड़े के ढेर से रोटी का इंतजाम: शहर में कबाड़ बटोरकर परिवार चला रहे मासूम, कचरे में बीत रहा बचपन

Thu, 14 Dec 2023 05:26 PM IST
प्रगति चंद संवाद न्यूज एजेंसी, आजमगढ़।
संवाद न्यूज एजेंसी, आजमगढ़। Published by: प्रगति चंद Updated Thu, 14 Dec 2023 05:26 PM IST
सार

कई बच्चे तो ऐसे हैं जो भोर से ही पीठ पर बोरा लाद कर और हाथ में एक डंडा लेकर पूरी रात शहर क्षेत्र में भ्रमण कर कूड़े में कुछ अपने काम की चीज खोजते मिल जाते
हैं। 

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story of struggle of children who support families by collecting junk from garbage in Azamgarh
कूड़े के ढेर में मासूम। - फोटो : संवाद

विस्तार

बच्चों को पढ़ाना जरूरी है, बाल्यावस्था में कोई भी उनसे काम नहीं करा सकता। काम कराने पर कार्रवाई का निर्देश है। बावजूद इसके आज उन बच्चों की ओर कोई भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहा है जो कचरे के ढेर से पेट की रोटी का इंतजाम करते हैं। इन बच्चों का पूरा बचपन कूड़े के ढेर में ही बीत रहा है। जिससे इन्हें पेट भरने को रोटी नसीब हो रही है। उधर, जिम्मेदार अपनी कार्रवाई दुकानों व प्रतिष्ठानों तक ही सीमित कर रखे हैं।
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कई बच्चे तो ऐसे हैं जो भोर से ही पीठ पर बोरा लाद कर और हाथ में एक डंडा लेकर पूरी रात शहर क्षेत्र में भ्रमण कर कूड़े में कुछ अपने काम की चीज खोजते मिल जाते हैं। वर्तमान में शहर के उन स्थानों पर मैले कपड़ों में पीठ पर बोरी लादे मासूम लगभग हर समय देखने को मिल जाते हैं, जहां नगर पालिका परिषद ने अपने अस्थायी कूड़ा डंपिंग ग्राउंड बना रखा है। 
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शहर के पांडेय बाजार पानी की टंकी के पास व पुरानी जेल की जमीन पर बने अस्थायी डंपिंग ग्राउंड पर तो रात का वक्त छोड़ हर वक्त आठ से दस की संख्या में छह से 15 साल तक के बच्चे पीठ पर बोरी व हाथ में डंडा लिए कूड़े के ढेर के साथ अठखेलियां करते नजर आते हैं। नपा के अस्थाई कूड़ा घर में शहर से निकलने वाला कूड़ा डंप किया जाता है। ये मासूम इसी कूड़े के ढेर से प्लास्टिक, दफ्ती, लोहा, बोतल, शीशा आदि एकत्र करते हैं। जिसे कबाड़ी के यहां बेच कर इनके घरों का चूल्हा जलता है, जिससे इनका परिवार पलता है। इन बच्चों की ओर न तो श्रम विभाग का ही ध्यान जा रहा है न ही बाल श्रम पर लगाम की कवायद में जुटी पुलिस विभाग की एएचटीयू यूनिट ही इस ओर ध्यान देता है।
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क्या करें.. पेट का सवाल है खुद खाना है और परिवार को भी खिलाना है
नगर पालिका के अस्थाई कूड़ा घर पर बुधवार की सुबह आठ से दस की संख्या में मासूम मौजूद थे। यहां नपा द्वारा एकत्र किया जाने वाला कूड़ा ही इनके रोजी का माध्यम है तो वहीं रोटी का इंतजाम भी वे यहीं से करते हैं। मोबाइल निकालते ही ये बच्चे इधर उधर भागने लगे। बहुत समझाने पर कुछ बच्चे पास आए तो कहा कि क्या करें... पेट का सवाल है खुद तो खाना है ही परिवार को भी खिलाना है। किसी भी बच्चे ने अपना नाम व पता नहीं बताया। नाम-पता पूछने पर ये भागने लगे। 

मात्र छह साल की खुशी ने तोतली आवाज में कहा कि मजा आता है यहां आकर। बोतल तो बटोरते ही है वहीं खेलने के साथ ही पैसा भी मिलता है। ऐसे ही आठ साल के राहुल ने मोबाइल बंद कर जेब में रखने के बाद कहा कि पढ़ने का मन होता है लेकिन कैसे पढ़ें पापा कुछ करते नहीं और मां किसी तरह पाल रही है। कबाड़ बटोर कर बेचते हैं तो घर पर चूल्हा जलता है।

काम देने वालों तक कार्रवाई की होती है कवायद
बालश्रम पर लगाम लगाने को लेकर सरकार द्वारा कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्मूलन को लेकर लगातार श्रम विभाग, एएचटीयू व एनजीओ की संयुक्त टीम लगातार अभियान चला रही है। काम कराने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई होती है और बच्चों को मुक्त करा कर परिजनों को सौंप दिया जाता है। बस इतनी कवायद में बाद जिम्मेदारों की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है।

श्रम विभाग बेसिक शिक्षा विभाग को पत्र भेज देता है। इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग उन बच्चों को पढ़ने की कोई व्यवस्था करता है कि नहीं इसकी कोई जानकारी जिम्मेदारों के पास नहीं है। विभागीय आकड़ों के अनुसार मार्च 2023 से अब तक 81 बाल श्रमिकों को मुक्त करा कर परिजनों को सौंपा जा चुका है और संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई की गई है।


क्या कहते हैं अधिकारी
आजमगढ़ के श्रम प्रवर्तन अधिकारी देवेंद्र कुमार ने कहा कि दुकानों-प्रतिष्ठानों पर कार्य करने वाले बच्चों को मुक्त कराने के साथ ही संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इतना ही नहीं बेसिक शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर संबंधित बच्चों के पठन-पाठन की व्यवस्था का निर्देश दिया जाता है। जहां तक कूड़ा बीनने वाले बच्चों की बात है तो इनका कोई स्थाई पता-ठीकाना न होने के चलते इनके उन्मूलन की कोई कवायद नहीं हो पाती है। सिर्फ जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का कार्य लगातार किया जा रहा है।
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