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Azamgarh News: सपा ने धर्मेंद्र यादव पर दूसरी बार जताया भरोसा
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आजमगढ़। लोकसभा चुनाव का आचार संहिता लागू होते ही सपा ने आजमगढ़ सीट पर प्रत्याशी को लेकर लगाए जा रहे कयासों पर विराम लगा दिया। सपा ने इस सीट पर एक बार फिर धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाया है। उपचुनाव में मिली हार के बाद पार्टी ने एक बार फिर इन पर भरोसा जताया है।
आजमगढ़ लोकसभा सीट मुलायम परिवार के लिए खास है। इस सीट पर सपा अपने बर्चस्व को खत्म नहीं करना चाहती है। इसलिए कयास लगाए जा रहे थे इस बार भी इस सीट पर मुलायम परिवार से ही कोई मैदान में आएगा। शनिवार को पार्टी ने कयासों पर विराम लगाते हुए धर्मेंद्र यादव पर भरोसा जताते हुए उन्हें एक बार फिर इस सीट से मैदान में उतारा है।
धर्मेंद्र यादव मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई अभय राम यादव के पुत्र हैं। उन्होंने 2004 में अपने राजनीतिक कैरियर की शुरूआत की और मैनपुरी सीट से सांसद बने। इसके बाद 2009 और 2014 का लोकसभा चुनाव बदायूं सीट से जीतकर सांसद बने। 2019 में मोदी लहर में भाजपा की संघमित्रा के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
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इसके बाद अखिलेश यादव के आजमगढ़ सीट छोड़ने के बाद हुए उपचुनाव में उन्हें आजमगढ़ से मैदान में उतारा गया। इस चुनाव में उन्हें भाजपा के दिनेश लाल यादव निरहुआ से हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि धर्मेंद्र यादव भले ही चुनाव हार गए थे लेकिन अपनी कुशल व्यवहार से लोगों को अपना मुरीद बना गए थे। इस चुनाव भाजपा के दिनेश लाल यादव को कुल तीन लाख 12 हजार 768 वोट मिले थे। जबकि धर्मेंद्र यादव को तीन लाख चार हजार 89 मत प्राप्त हुए थे। इस प्रकार धर्मेंद्र यादव को 8679 मतों से हार का सामना करना पड़ा था।
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आजमगढ़ लोकसभा सीट मुलायम परिवार के लिए खास है। इस सीट पर सपा अपने बर्चस्व को खत्म नहीं करना चाहती है। इसलिए कयास लगाए जा रहे थे इस बार भी इस सीट पर मुलायम परिवार से ही कोई मैदान में आएगा। शनिवार को पार्टी ने कयासों पर विराम लगाते हुए धर्मेंद्र यादव पर भरोसा जताते हुए उन्हें एक बार फिर इस सीट से मैदान में उतारा है।
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धर्मेंद्र यादव मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई अभय राम यादव के पुत्र हैं। उन्होंने 2004 में अपने राजनीतिक कैरियर की शुरूआत की और मैनपुरी सीट से सांसद बने। इसके बाद 2009 और 2014 का लोकसभा चुनाव बदायूं सीट से जीतकर सांसद बने। 2019 में मोदी लहर में भाजपा की संघमित्रा के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
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इसके बाद अखिलेश यादव के आजमगढ़ सीट छोड़ने के बाद हुए उपचुनाव में उन्हें आजमगढ़ से मैदान में उतारा गया। इस चुनाव में उन्हें भाजपा के दिनेश लाल यादव निरहुआ से हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि धर्मेंद्र यादव भले ही चुनाव हार गए थे लेकिन अपनी कुशल व्यवहार से लोगों को अपना मुरीद बना गए थे। इस चुनाव भाजपा के दिनेश लाल यादव को कुल तीन लाख 12 हजार 768 वोट मिले थे। जबकि धर्मेंद्र यादव को तीन लाख चार हजार 89 मत प्राप्त हुए थे। इस प्रकार धर्मेंद्र यादव को 8679 मतों से हार का सामना करना पड़ा था।