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कहीं नौ दुर्गा तो कहीं बाल गणेश के साथ विराजमान हैं माता
आजमगढ़/ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Fri, 29 Sep 2017 12:02 AM IST
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स्थापित की गई भव्य प्रतिमा।
- फोटो : अमर उजाला
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आजमगढ़। विजयादशमी को लेकर जनपद में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। पूजा पंडालों में देवी प्रतिमाओं की स्थापना हो चुकी है। उनके पट लोगों के दर्शन के लिए खुल चुके हैं। नगर क्षेत्र में स्थापित प्रतिमाओं की सजावट उनके आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पूजा समितियों द्वारा मूर्ति से ज्यादा सजावट पर ध्यान दिया गया है।
अष्टमी के साथ ही विजयादशमी का पर्व भी शुरू हो चुका है। नगर क्षेत्र में इसकी चहल-पहल आसानी से देखी जा सकती है। गुरुवार को अष्टमी से ही लोग पूजा पंडालों में मां के अदभुत रूप के दर्शन करने पहुंचने लगे हैं।
पूजा समितियों द्वारा पंडालों के आसपास की गई आकर्षक सजावट लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। हर पूजा पंडाल में स्थापित मां की प्रतिमा अलग ही कहानी कहती है। किसी पंडाल में मां अपने विकराल रूप में दैत्य का वध करती हुई नजर आ रही हैं तो कहीं वह अपने नौ दुर्गा रूप विराजमान हैं।
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कहीं-कहीं शुभ के देवता बाल गणेश भी माता के साथ पंडाल की शोभा बढ़ा रहे हैं। वहीं पंडालों को सजाने में पूजा समितियों ने कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी है। कहीं थर्माकोल से पंडाल को सजाया गया है तो कहीं फोम से तो कहीं पंचमेवा से पंडाल को सजाया गया है।
किसी पूजा समिति ने चाइनीज झालरों से पंडालों के आसपास लाइटिंग कराई है तो किसी ने देशी झालरों का प्रयोग किया है। हर पूजा समिति की सजावट एक दूसरे से बढ़कर है। अब इनमें से किसकी मूर्ति सबसे अच्छी है और किसकी सजावट इसका फैसला दशहरे की भोर में होगा। विजेता पूजा समिति को शील्ड देकर सम्मानित किया जाएगा।
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अष्टमी के साथ ही विजयादशमी का पर्व भी शुरू हो चुका है। नगर क्षेत्र में इसकी चहल-पहल आसानी से देखी जा सकती है। गुरुवार को अष्टमी से ही लोग पूजा पंडालों में मां के अदभुत रूप के दर्शन करने पहुंचने लगे हैं।
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पूजा समितियों द्वारा पंडालों के आसपास की गई आकर्षक सजावट लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। हर पूजा पंडाल में स्थापित मां की प्रतिमा अलग ही कहानी कहती है। किसी पंडाल में मां अपने विकराल रूप में दैत्य का वध करती हुई नजर आ रही हैं तो कहीं वह अपने नौ दुर्गा रूप विराजमान हैं।
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कहीं-कहीं शुभ के देवता बाल गणेश भी माता के साथ पंडाल की शोभा बढ़ा रहे हैं। वहीं पंडालों को सजाने में पूजा समितियों ने कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी है। कहीं थर्माकोल से पंडाल को सजाया गया है तो कहीं फोम से तो कहीं पंचमेवा से पंडाल को सजाया गया है।
किसी पूजा समिति ने चाइनीज झालरों से पंडालों के आसपास लाइटिंग कराई है तो किसी ने देशी झालरों का प्रयोग किया है। हर पूजा समिति की सजावट एक दूसरे से बढ़कर है। अब इनमें से किसकी मूर्ति सबसे अच्छी है और किसकी सजावट इसका फैसला दशहरे की भोर में होगा। विजेता पूजा समिति को शील्ड देकर सम्मानित किया जाएगा।