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कोई निकला यूक्रेन से बाहर तो कोई बंकरों में अब भी कैद

Sun, 27 Feb 2022 11:29 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 27 Feb 2022 11:29 PM IST
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Some came out of Ukraine and some are still imprisoned in bunkers
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वहां मेडिकल की पढ़ाई करने गए जनपद के छात्र फंसे हुए हैं। इनमें कई छात्र तो यूक्रेन से बाहर निकल चुके हैं तो कई छात्र अभी बंकरों में रात और दिन गुजारने को विवश हैं। वहीं उनके परिजन उनकी सकुशल वापसी को लेकर चिंतित है। सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई से परिजन संतुष्ट हैं लेकिन उन्हें अपने बच्चों की चिंता खाए जा रही है।
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सगड़ी: यूक्रेन में फंसी सगड़ी के खातीबपुर गांव की एमबीबीएस छात्रा रेनू यादव शनिवार को ही बस द्वारा रोमानिया के लिए प्रस्थान किया था लेकिन जाम के चलते 30 घंटे बीतने के बाद भी रोमानिया नहीं पहुंच पाई। परिजन चिंतित हैं। परिजनों से हुई बात में रेनू ने बताया कि यूक्रेन और रोमानिया सीमा पर जाम लगा है जिसके चलते परिजन चिंतित हैं। वहीं रविवार को देर शाम किसी तरह से बात हो पाई उसके बाद पूरी बात नहीं हो पाई और फोन कट गया।वहीं परिजन चिंतित है और घर वापसी के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं।
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निजामाबाद: तहसील क्षेत्र के सोफीपुर गांव के दो छात्र यूक्रेन में फंसे थे जो बस से चलकर रोमानिया तक पहुंचे हैं। इसकी जानकारी उन्होंने परिजनों को मेसेज के जरिए दी। गिरिजेश यादव ने कहा कि केंद्र सरकार से गुजारिश है कि यूक्रेन की लड़ाई में भारतीयों की मदद हिंदुस्तान सरकार करे। जिससे भारतीय और अपने परिवार के लोग सकुशल वतन लौट सकें। अमित यादव और अवनीश कुमार यादव से वीडियो कॉलिंग बात होने के बाद यह पता चला है कि वह दोनों युवक यूक्रेन में बस के रास्ते चल दिए हैं और रोमानिया तक पहुंचे हैं।
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श्रेया यादव भी रोमानिया बार्डन के लिए निकली
सरायमीर। थाना क्षेत्र के पवई लाडपुर गांव निवासी डॉ. नरेंद्र यादव की पुत्री श्रेया यादव यूक्रेन में ओडेशा नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। उनके पिता डॉ. नरेंद्र यादव ने बताया कि पुत्री श्रेया यादव से बात हुई उसने बताया कि शनिवार को 12बजे दिन में रोमानिया बार्डर के लिए निकली है। बहुत से छात्र और छात्राएं रूम से पैदल ही निकल कर वाहन की तलाश में हैं। अभी कोई वाहन नहीं मिला है कि रुमानिया बार्डर पर पहुंच जाएं। श्रेया यादव के पिता डा नरेंद्र यादव, माता डॉ रीता यादव बहुत ही उदास हैं। जैसे ही मोबाइल की घंटी बजती है जल्दी से फोन उठाकर बात करते हैं कि मेरी पुत्री का ही तो फोन नहीं है।

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अभी बंकर में ही है अनुष्का
आजमगढ़। नगर के सिधारी मुहल्ला निवासी अजय प्रताप सिंह की पुत्र अनुष्का सिंह भी यूक्रेन में रहकर मेडिकल की पढ़ाई करती हैं। जो रूस द्वारा किए गए आक्रमण में फंसी हुई हैं। पिता अजय प्रताप सिंह ने बताया कि वह लोग बेटी की सकुशल वापसी को लेकर चिंतित हैं। उनकी पुत्री अभी बंकरों में फंसी हुई हैं। फोन पर हुई बात में उसने बताया कि बहुत से छात्र उसके साथ बंकर में हैं। वह लोग खारकीव यूक्रेन की राजधानी में हैं। एंबेसी से उन्हें बंकर में ही रहने का निर्देश दिया है। कर्फ्यू लगा हुआ है जिसके कारण वह लोग बाहर भी नहीं निकल सकते हैं। लेकिन जो छात्र बार्डर से नजदीक हैं वह लोग निकल गए लेकिन जो छात्र बार्डर से दूर हैं वह लोग निकल नहीं पा रहे हैं। उसकी चिंता हमें खाए जा रही है।
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