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Azamgarh News: अब तक करीब 70 बीघा खेत घाघरा में समाया, किसान चिंतित

Sat, 20 Sep 2025 01:19 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 20 Sep 2025 01:19 AM IST
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So far, about 70 bighas of land have been submerged in the Ghaghra river, and farmers are worried.
संवाद न्यूज एजेंसी
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लाटघाट। घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से अब बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नदी में तीन बैराजों से 29,5407 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। अब तक 60-70 बीघा जमीन कटान से नदी में समा चुकी है। वहीं, बाढ़ खंड विभाग खेतों का कटान रोकने के लिए परखू पाइन लगाकर काम चला रहा है। नदी का जलस्तर इस समय खतरे के निशान से डिघिया नाले पर 50 सेमी ऊपर और बदरहुआ नाले पर 12 सेमी नीचे है। नदी में गिरिजा बैराज से 131478 क्यूसेक, शारदा बैराज से 153584 और सरयू बैराज से 10345 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। कटान की रफ्तार ने किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। दो दिन से सहबदिया गांव के सामने बंधे की तरफ जा रही घाघरा नदी को रोकने के लिए सवा चार करोड़ की परियोजना बनाई गई थी, लेकिन वह अधूरी रह गई है। देवारा खास राजा के मजरा झगरहवा और सहबदिया गांव में आबादी के पास और खेत कटान की चपेट में हैं। अब तक करीब 60-70 बीघा खेत नदी में समा चुके हैं। घाघरा नदी का जलस्तर बदरहुआ नाले पर बृहस्पतिवार को शाम चार बजे 71.39 मीटर था जो शुक्रवार को 17 सेमी बढ़कर 71.56 मीटर हो गया। वहीं, डिघिया नाले पर 70.73 मीटर से 17 सेमी बढ़कर 70.90 मीटर हो गया। बदरहुआ पर न्यूनतम जलस्तर 70.25 मीटर, खतरा बिंदु 71.68 मीटर और अधिकतम 73.52 मीटर है। डिघिया नाले पर न्यूनतम जलस्तर 68.90 मीटर खतरा बिंदु 70.40 मीटर और अधिकतम 72.59 मीटर है। सहायक अभियंता बाढ़ खंड शिवकुमार ने बताया कि कटान को रोकने की विभाग पूरी कोशिश कर रहा है। इसके लिए कारगर उपाय परखी पाइन लगाकर खेती योग्य भूमि को कटने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है। घाघरा नदी की कटान से प्रति वर्ष किसान भूमिहीन होते जा रहे हैं। 2024 की कटान से करीब 135 किसानों की भूमि घाघरा में विलीन हुई थी। इसमें लगभग 95 से 100 किसानों को तहसील प्रशासन ने मुआवजा दिया था। किसानों की भूमि चाहे जितनी भी कट गई हो प्रति किसान को पांच हजार रुपये ही मुआवजा तहसील प्रशासन सगड़ी ने दिया था। गांव के इंदल पटेल, रामहरि, गुड्डू, दुर्गा पटेल, राम विजय पटेल, भागवत, जयद्रथ पटेल, मनोरथ, महाबल ,विनोद पटेल को पिछले साल का मुआवजा नहीं मिला। 2025 में 50 से अधिक किसानों की जमीन की कटान शुरू हो गई और यह किसान भूमि होते जा रहे हैं। संवाद
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