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जीवनशैली बदलने से बढ़ रही स्लीप एपनिया की बीमारी

Fri, 25 Feb 2022 11:53 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 25 Feb 2022 11:53 PM IST
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Sleep apnea disease increasing due to lifestyle change
यदि आपको बैठे-बैठे नींद आने के साथ खर्राटा भरने की समस्या है तो सतर्क हो जाइए। तत्काल चिकित्सक से इलाज कराएं। समय से इलाज नहीं शुरू हुआ तो यह बीमारी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। समय से इलाज कराने पर इससे निजात मिल सकती है। मेडिकल की भाषा में इस बीमारी को स्लीप एपनिया सिंड्रोम कहते हैं। पहले यह बीमारी 40 साल से अधिक उम्र वालों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब लगभग हर उम्र के लोग इसकी चपेट में आते जा रहे हैं।
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जिला मंडलीय चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि पहले स्लीप एपनिया की बीमारी 40 वर्ष से अधिक के लोगों में होती थी। अब यह बीमारी की चपेट में 18 से 40 साल के उम्र के लोग भी आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार बदलती जीवन शैली इसकी मुख्य वजह है। स्लीप एपनिया सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी है, जिसका जुड़ाव शरीर के वजन से होता है। अगर शरीर का वजन अधिक है तो खून में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। इसके साथ ही कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगती है। यहीं कारण है कि संबंधित व्यक्ति को नींद सी आनी लगती है। कभी कभी गाड़ी चलाते समय, घर या आफिस में बैठते समय झपकी आनी लगती है। इस बीमारी में ब्रीदिंग डिसऑर्डर की समस्या होती है। स्लीप एपनिया में सोते वक्त बार-बार सांस रुकती और चलती है। खतरनाक बात ये है कि इसमें नींद में ही सांस रुक जाती है और व्यक्ति को पता भी नहीं चलता है। कई बार झटके से सांस आती है और नींद टूट जाती है। इस बीमारी के शिकार लोगों के दिमाग में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है, जिससे कई और समस्याएं पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है।
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स्लीप एपनिया का इलाज संभव
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि स्लीप एपनिया भले ही एक गंभीर बीमारी है, लेकिन इसका इलाज संभव हैं। इस बीमारी में पीठ के बल सोने पर तेज खर्राटे आते हैं। ऐसे में आपको करवट से सोना चाहिए। इसके इलाज में कई बार एक ऐसा माउथपीस लगाया जाता है जिससे जबड़े पर दबाव पड़ता है। कई मामलों में सर्जरी की जाती है। कुछ इलाज के तरीके में एक ऐसे डिवाइस का यूज किया जाता है जिससे सोते समय आपके वायुमार्ग खुला रह सकते हैं। अगर आपको नींद में सांस रुकने के जैसा या फिर दिनभर थकान और चिड़चिड़ापन रहता है, तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
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