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आजमगढ़ के मदरसा शिक्षकों की एसआईटी जांच तेज, कलमबद्ध बयान दर्ज
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आजमगढ़। जनपद में तीन वर्ष पहले शासन के निर्देश पर अनुदानित मदरसों की हुई जांच में लगभग 16 अध्यापकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों में खामी दिखाई गई थी। रिपोर्ट के आधार पर मुख्यालय से इनके वेतन पर रोक लगा दी गई थी। बाद में विभागीय मिलीभगत से इनके ऊपर कोई कार्रवाई न कर वेतन को जारी कर दिया गया। प्रकरण की पुन: शासन से शिकायत की गई तो इसमें एसआईटी जांच बिठा दी गई है। पिछले दिनों एसआईटी की टीम जनपद में आई और जिलाधिकारी के माध्यम से सभी प्रबंधकों और शिक्षकों की बंद कमरे में बयान दर्ज किए गए। अब उम्मीद जताई जा रही है कि टीम तत्कालीन जांच अधिकारियों के भी बयान दर्ज करेगी। प्रकरण में कई लोगों के फंसने के आसार जताए जा रहे हैं।
जुलाई 2017 में शासन के निर्देश पर जनपद में 20 अनुदानित मदरसों की तीन सदस्यीय टीम ने जांच की थी। इसमें डिप्टी कलेक्टर निरंकार सिंह, एई डीआरडीए एनबी सिंह और एडीएसटीओ सुनील सिंह शामिल थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न मदरसों में मानक समेत अन्य कमियों के साथ 16 शिक्षकों-कर्मचारियों की नियुक्ति को भी अनियमित बताया गया था। डीएम की ओर से निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को रिपोर्ट भेजने के बाद इन शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगा दी गई थी। धीरे-धीर उक्त शिक्षकों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई न करते हुए सभी के वेतन बहाल कर दिए गए। मिलीभगत से बजट का आवंटन होता रहा और सभी के वेतन जारी हो गए। मामले की जानकारी जनपद में हुई कुछ लोगों की ओर से शासन में फिर शिकायत की गई। मामले सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचा। इसके बाद शासन के निर्देश पर मार्च 2020 में उक्त शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन पर फिर रोक लगा दी गई। इसके साथ ही प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। विवेचना की जिम्मेदारी निरीक्षक परशउराम सिंह को सौंपी गई है। पिछले दिनों गोपनीय तरीके से एसआईटी की टीम जनपद पहुंची और जांच रिपोर्ट से संबंधित प्रबंधकों और आरोपी शिक्षकों एवं कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए। इसमें जिला प्रशासन की ओर से भी सहयोग किया गया।प्रबंधकों और शिक्षकों के बयान दर्ज करने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि एसआईटी की टीम तत्कालीन जांच अधिकारियों के भी बयान दर्ज कर सकती है।
विभाग में मचा हड़कंप, कुछ कहने से बच रहे अधिकारी
आजमगढ़। फिलहाल एसआईटी की जांच शुरू होने से आरोपी शिक्षकों-कर्मचारियों के साथ ही विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भी हालत खराब है। क्योंकि तत्कालीन जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर उक्त शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन रोके गए थे। वेतन बहाल करने के लिए या तो जांच रिपोर्ट गलत साबित की जाती या फिर कोई अलग से जांच होती। बिना जांच या उक्त जांच रिपोर्ट के रद्द किए ही सभी के वेतन बहाल किए गए थे। इसमें जनपद से लेकर निदेशालय तक के अधिकनारियों की मिलीभगत थी। एसआईटी की जांच से सभी के होशश उड़े हुए हैं। इस संबंध में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी साहित्य निकष सिंह से बात की गई तो उन्होंने ऐसी किसी टीम के आने और जांच करने से ही इंकार कर दिया। इसके साथ ही व्यस्त होने का हवाला देते हुए फोन काट दिया।
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जुलाई 2017 में शासन के निर्देश पर जनपद में 20 अनुदानित मदरसों की तीन सदस्यीय टीम ने जांच की थी। इसमें डिप्टी कलेक्टर निरंकार सिंह, एई डीआरडीए एनबी सिंह और एडीएसटीओ सुनील सिंह शामिल थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न मदरसों में मानक समेत अन्य कमियों के साथ 16 शिक्षकों-कर्मचारियों की नियुक्ति को भी अनियमित बताया गया था। डीएम की ओर से निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को रिपोर्ट भेजने के बाद इन शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगा दी गई थी। धीरे-धीर उक्त शिक्षकों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई न करते हुए सभी के वेतन बहाल कर दिए गए। मिलीभगत से बजट का आवंटन होता रहा और सभी के वेतन जारी हो गए। मामले की जानकारी जनपद में हुई कुछ लोगों की ओर से शासन में फिर शिकायत की गई। मामले सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचा। इसके बाद शासन के निर्देश पर मार्च 2020 में उक्त शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन पर फिर रोक लगा दी गई। इसके साथ ही प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। विवेचना की जिम्मेदारी निरीक्षक परशउराम सिंह को सौंपी गई है। पिछले दिनों गोपनीय तरीके से एसआईटी की टीम जनपद पहुंची और जांच रिपोर्ट से संबंधित प्रबंधकों और आरोपी शिक्षकों एवं कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए। इसमें जिला प्रशासन की ओर से भी सहयोग किया गया।प्रबंधकों और शिक्षकों के बयान दर्ज करने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि एसआईटी की टीम तत्कालीन जांच अधिकारियों के भी बयान दर्ज कर सकती है।
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विभाग में मचा हड़कंप, कुछ कहने से बच रहे अधिकारी
आजमगढ़। फिलहाल एसआईटी की जांच शुरू होने से आरोपी शिक्षकों-कर्मचारियों के साथ ही विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भी हालत खराब है। क्योंकि तत्कालीन जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर उक्त शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन रोके गए थे। वेतन बहाल करने के लिए या तो जांच रिपोर्ट गलत साबित की जाती या फिर कोई अलग से जांच होती। बिना जांच या उक्त जांच रिपोर्ट के रद्द किए ही सभी के वेतन बहाल किए गए थे। इसमें जनपद से लेकर निदेशालय तक के अधिकनारियों की मिलीभगत थी। एसआईटी की जांच से सभी के होशश उड़े हुए हैं। इस संबंध में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी साहित्य निकष सिंह से बात की गई तो उन्होंने ऐसी किसी टीम के आने और जांच करने से ही इंकार कर दिया। इसके साथ ही व्यस्त होने का हवाला देते हुए फोन काट दिया।
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