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Azamgarh News: साहब...मेरे पास इतने ही रुपये हैं, लोन सेटल कर दीजिए
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आजमगढ़। साहब...मेरे पास इतते ही रुपये हैं। इससे ज्यादा नहीं दे पाएंगे। बहुत मजबूर हैं। इतने में ही लोन सेटल कर दीजिए। उक्त बातें एक महिला के है जो शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिकारी से गुहार लगाते हुए कह रही थी। जहां संबंधित अधिकारी मुख्य प्रबंधक वसूली ने मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला का लोन सेटल कराया।
जिले की एक महिला के नाम से 70 हजार रुपये का लोन था। जहां वह 20,000 रुपये लेकर आई थी। लेकिन बैंक मैनेजर इतने रुपये में लोन सेटल नहीं कर रहा था। तभी महिला ने रोते हुए, हाथ जोड़कर मुख्य प्रबंधक वसूली से गुहार लगाई। इसके बाद उन्होंने 25,000 रुपये में लोन का सेटलमेंट कराया।
बता दें कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से कोर्ट परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया। आयोजन जिला जज जय प्रकाश पाण्डेय की अध्यक्षता में हुआ। उन्होंने कहा कि लोक अदालत आम आदमी के लिए उपलब्ध महत्वपूर्ण वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र है, इसके माध्यम से विवाद का निपटारा निशुल्क और त्वरित किया जाता है। लोक अदालत में 11,44,433 मामले चिह्नित किये गये थे। इसमें 95,328 मामलों का निस्तारण हुआ। वहीं 16,69,49,443 रुपये का समझौता हुआ। प्रीलिटिगेशन स्तर पर 80,947 और कोर्ट से 14,381 दीवानी और फौजदारी मामले निस्तारित हुए। वहीं 15 दंपतियों का विवाद सुलझाकर उन्हें एक साथ विदा किया गया।
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100 से ज्यादा लगे थे काउंटर
राष्ट्रीय लोक अदालत में 100 से ज्यादा काउंटर लगे हुए थे। इस वजह से लोक अदालत में आये हुए लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। जिले में स्थित बैंकों के काउंटर अलग-अलग लगे हुए थे।
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लोन जमा किया फिर भी आ रहा नोटिस
देवगांव निवासी राजकुमार अपनी पत्नी के साथ लोक अदालत में आए थे। जहां उसने बताया कि उसने लोन पर ई-रिक्शा लिया था। उसने लोन के रुपये जमा कर दिए हैं। इसके बाद भी उसके पास नोटिस आई है।
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विपक्षी को दिया गया नोटिस
मधनापार निवासी पतिराम यादव ने बताया कि उसे लोक अदालत की जानकारी नहीं थी। उसके पास जो नोटिस आनी थी उस नोटिस को उसके विपक्षी को दे दिया गया था। किसी के माध्यम से जानकारी होने पर वह आया है।
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जिले की एक महिला के नाम से 70 हजार रुपये का लोन था। जहां वह 20,000 रुपये लेकर आई थी। लेकिन बैंक मैनेजर इतने रुपये में लोन सेटल नहीं कर रहा था। तभी महिला ने रोते हुए, हाथ जोड़कर मुख्य प्रबंधक वसूली से गुहार लगाई। इसके बाद उन्होंने 25,000 रुपये में लोन का सेटलमेंट कराया।
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बता दें कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से कोर्ट परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया। आयोजन जिला जज जय प्रकाश पाण्डेय की अध्यक्षता में हुआ। उन्होंने कहा कि लोक अदालत आम आदमी के लिए उपलब्ध महत्वपूर्ण वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र है, इसके माध्यम से विवाद का निपटारा निशुल्क और त्वरित किया जाता है। लोक अदालत में 11,44,433 मामले चिह्नित किये गये थे। इसमें 95,328 मामलों का निस्तारण हुआ। वहीं 16,69,49,443 रुपये का समझौता हुआ। प्रीलिटिगेशन स्तर पर 80,947 और कोर्ट से 14,381 दीवानी और फौजदारी मामले निस्तारित हुए। वहीं 15 दंपतियों का विवाद सुलझाकर उन्हें एक साथ विदा किया गया।
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100 से ज्यादा लगे थे काउंटर
राष्ट्रीय लोक अदालत में 100 से ज्यादा काउंटर लगे हुए थे। इस वजह से लोक अदालत में आये हुए लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। जिले में स्थित बैंकों के काउंटर अलग-अलग लगे हुए थे।
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लोन जमा किया फिर भी आ रहा नोटिस
देवगांव निवासी राजकुमार अपनी पत्नी के साथ लोक अदालत में आए थे। जहां उसने बताया कि उसने लोन पर ई-रिक्शा लिया था। उसने लोन के रुपये जमा कर दिए हैं। इसके बाद भी उसके पास नोटिस आई है।
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विपक्षी को दिया गया नोटिस
मधनापार निवासी पतिराम यादव ने बताया कि उसे लोक अदालत की जानकारी नहीं थी। उसके पास जो नोटिस आनी थी उस नोटिस को उसके विपक्षी को दे दिया गया था। किसी के माध्यम से जानकारी होने पर वह आया है।