{"_id":"6536b4eeeff73d5be806ff26","slug":"shivratan-is-teaching-black-pottery-making-in-rajasthan-azamgarh-news-c-258-1-svns1005-6454-2023-10-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Azamgarh News: शिवरतन राजस्थान में सिखा रहे ब्लैक पाटरी बनाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Azamgarh News: शिवरतन राजस्थान में सिखा रहे ब्लैक पाटरी बनाना
विज्ञापन
निजामाबाढ़। कस्बा के खास शिल्प ब्लैक पाटरी के कलाकर शिवरतन प्रजापति राजस्थान के अलवर में छात्रों को मिट्टी के बर्तन बनाने की कला सिखा रहे हैं। शिवरतन को मिट्ठी के सूक्ष्म बर्तन बनाने में महारथ हासिल है। उन्होंने डिजाइन, माइको आर्ट इन्ग्रेविंग व सिल्वर आर्ट पर शोध किया है। मिट्टी के ऊपर सिल्वर वर्क उनकी पुस्तैनी खासियत है।
शिवरतन के पूर्वज 1636 में गुजरात से निजामाबाद में आए थे। अपने कार्य के साथ इन्होंने क्षेत्रीय कुम्हारों को कला की नई दिशा दी। शिवरतन राजस्थान के अलवर में 2003 में अपने पिता के साथ डिजाइनर के रूप में ट्रेनिंग भी दे चुके हैं। यह जयपुर की यूनिवर्सिटी के स्पीक मैके प्रोग्राम में अपनी माता के साथ शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के सामने भी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। माचिस की एक तीली पर 18 पीस मिट्टी के बर्तन व एक रुपये के एक सिक्के पर 65 मिट्टी के बर्तन बनाने का रिकार्ड उनके नाम है।
वे इन दिनों मिट्टी की ज्वेलरी बना रहे हैं, जिसे महिलाएं खूब पसंद कर रही हैं। रक्षा बंधन में इनके हाथ की बनी मिट्टी की राखी खूब बिकी। राजस्थान में छात्र इनसे प्लेट, अगरबत्ती स्टैंड, पेपर वेट, शिवलिंग आदि बनाने व उसमें रंग भरने की कला सीख रहे हैं।
विज्ञापन
00000
राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुके हैं माता- पिता
शिवरतन प्रजापति के पिता राजेंद्र प्रसाद प्रजापति व माता कल्प देवी 1987 में राष्ट्रपति डॉ शंकर दंयाल शर्मा के हाथों राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं। राजेंद्र प्रसाद अपनी कला के बल पर डेनमार्क, लंदन, पेरिस, जर्मनी, इटली आदि देशों में भारत का मान बढ़ा चुके हैं। 1988 में अमेरिका में अमेरिका के राजदूत ने सम्मानित किया था। अपनी कलाकृति के लिए परिवार के अन्य सदस्य भी राज्य सरकार से सम्मानित हो चुके हैं। संवाद
विज्ञापन
शिवरतन के पूर्वज 1636 में गुजरात से निजामाबाद में आए थे। अपने कार्य के साथ इन्होंने क्षेत्रीय कुम्हारों को कला की नई दिशा दी। शिवरतन राजस्थान के अलवर में 2003 में अपने पिता के साथ डिजाइनर के रूप में ट्रेनिंग भी दे चुके हैं। यह जयपुर की यूनिवर्सिटी के स्पीक मैके प्रोग्राम में अपनी माता के साथ शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के सामने भी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं। माचिस की एक तीली पर 18 पीस मिट्टी के बर्तन व एक रुपये के एक सिक्के पर 65 मिट्टी के बर्तन बनाने का रिकार्ड उनके नाम है।
विज्ञापन
वे इन दिनों मिट्टी की ज्वेलरी बना रहे हैं, जिसे महिलाएं खूब पसंद कर रही हैं। रक्षा बंधन में इनके हाथ की बनी मिट्टी की राखी खूब बिकी। राजस्थान में छात्र इनसे प्लेट, अगरबत्ती स्टैंड, पेपर वेट, शिवलिंग आदि बनाने व उसमें रंग भरने की कला सीख रहे हैं।
विज्ञापन
00000
राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुके हैं माता- पिता
शिवरतन प्रजापति के पिता राजेंद्र प्रसाद प्रजापति व माता कल्प देवी 1987 में राष्ट्रपति डॉ शंकर दंयाल शर्मा के हाथों राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं। राजेंद्र प्रसाद अपनी कला के बल पर डेनमार्क, लंदन, पेरिस, जर्मनी, इटली आदि देशों में भारत का मान बढ़ा चुके हैं। 1988 में अमेरिका में अमेरिका के राजदूत ने सम्मानित किया था। अपनी कलाकृति के लिए परिवार के अन्य सदस्य भी राज्य सरकार से सम्मानित हो चुके हैं। संवाद