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शिब्ली एकेडमी इतिहास और इल्म का है खजाना

Mon, 18 Nov 2019 11:12 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 18 Nov 2019 11:12 PM IST
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Shibli Academy is a treasure of history and education
शिब्ली पीजी कालेज में शिब्ली डे पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते रेहान अहमद। - फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। शिब्ली नेशनल महाविद्यालय में सोमवार को शिब्ली डे का शुभारंभ तिलावत-ए-कलाम पाक से हुआ। महाविद्यालय के प्रबंधक शाह आलम गुड्डू जमाली ने कहा कि शिब्ली नोमानी नामक एक राष्ट्रवादी विद्वान और शिक्षाविद ने 1883 में यहां आधुनिक शिक्षा अकादमी की स्थापना की। शिब्ली एकेडमी इतिहास और इल्म का खजाना है।
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मुल्क की आजादी के दौरान यह शहर और इस शहर में बना शिब्ली नेशनल कॉलेज क्रांतिकारियों का मरकज भी रहा है। जिस समय अंग्रेजों के खिलाफ कोई खुलकर बोल नहीं सकता था, उस दौर में कालेज के नाम के साथ नेशनल शब्द जोड़ना अल्लामा शिब्ली नोमानी की दूरदर्शिता का परिचायक है। उपाध्यक्ष अफसर गजनवी ने कहा कि अल्लामा शिब्ली नोमानी के नाम पर वर्ष 1914 में स्थापित शिब्ली एकेडमी में देश के पहले राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद, महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरु, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी जैसी शख्सियतों के उर्दू में लिखे पत्र भी यहां मौजूद हैं। अध्यक्षता कर रहे हैं शिब्ली एकेडमी के स्कॉलर उमैर सिद्दीक नदवी ने कहा कि तत्कालीन राष्ट्रपति जाकिर हुसैनप्रबंध समिति के सदस्य भी रहे।
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शिब्ली इंटर कालेज के प्राचार्य निसार अहमद ने कहा कि आज ही के दिन वह चिराग बुझ गया जिसने पूरब में आजमगढ़ जैसे शहर में तालीम के लिए शिब्ली कालेज की स्थापना की। संचालन कर रहे डॉ. अलाउद्दीन ने कहा कि तीन जून 1857 को नोमानी का जन्म विंदवल गांव में हुआ था। शिब्ली कालेज आज भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में स्वर्णिम सफर तय कर रहा है। कार्यक्रम में महाविद्यालय के पूर्व प्रबंधक फैज अहमद एडवोकेट की पुस्तक अल्लामा शिब्ली नोमानी की अल फारुक का हिंदी अनुवाद का विमोचन किया गया। प्राचार्य डॉ. मसूद अख्तर, पूर्व प्राचार्य डा. गयास असद खान, प्रबंध समिति के संयुक्त सचिव मोहम्मद हसीब,असलम एडवोकेट, अबू साद, मो. नोमान ,शाह आबिद, डा. शफकत अलाउद्दीन, डा. खालिद, डा. आजाद इस्लाही, डा. खालिद शमीम, डा.एसजेड अली, कलीम अहमद, डा.बीके सिंह आदि रहे।
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