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घाघरा की धारा बंधे से दूर करने की कवायद तेज
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Tue, 12 May 2015 12:23 AM IST
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बाढ़ के समय में नदी का सबसे ज्यादा दबाव डिघिया नाले के पास देखने को मिलता है। ऐसे में हमेशा बंधे के टूटने के खतरा बना रहता है। इसके लिए डिघिया नाले के समीप से घाघरा की धारा को मोड़ने की पर काम शुरू हो गया है।
बरसात के मौसम में घाघरा अपने उग्र रूप में होती है। नदी के उग्र रूप का खामियाजा देवारावासियों और बांध को भुगतना पड़ता है। प्रतिवर्ष किसानों की जहां सैकड़ों एकड़ फसल घाघरा में विलीन हो जाती है। वहीं नदी के बढ़ते पानी के दबाव से बांध के टूटने का खतरा मंड़राता रहता है।
इसे देखते हुए नदी के बांध को टूटने से बचाने के लिए डिघिया नाला से एक किलो मीटर उत्तर घाघरा नदी में तीन मडपंप लगाकर घाघरा नदी की धारा को बदला जा रहा है। मडपंप से करीब 200 मीटर दूर तक का रेत नदी से निकाला जा रहा है। इस कार्य से निकलने वाली रेत को बोरे में भरकर बांध को सुरक्षित करने के लिए ऐपरन बनाया जाएगा। जो बाढ़ के समय में बांध को टूटने से बचाएगा। ठेकेदार सूरज सिंह ने बताया कि एक महीने में कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
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बरसात के मौसम में घाघरा अपने उग्र रूप में होती है। नदी के उग्र रूप का खामियाजा देवारावासियों और बांध को भुगतना पड़ता है। प्रतिवर्ष किसानों की जहां सैकड़ों एकड़ फसल घाघरा में विलीन हो जाती है। वहीं नदी के बढ़ते पानी के दबाव से बांध के टूटने का खतरा मंड़राता रहता है।
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इसे देखते हुए नदी के बांध को टूटने से बचाने के लिए डिघिया नाला से एक किलो मीटर उत्तर घाघरा नदी में तीन मडपंप लगाकर घाघरा नदी की धारा को बदला जा रहा है। मडपंप से करीब 200 मीटर दूर तक का रेत नदी से निकाला जा रहा है। इस कार्य से निकलने वाली रेत को बोरे में भरकर बांध को सुरक्षित करने के लिए ऐपरन बनाया जाएगा। जो बाढ़ के समय में बांध को टूटने से बचाएगा। ठेकेदार सूरज सिंह ने बताया कि एक महीने में कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
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