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Azamgarh News: महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रहीं संगीता
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मधुमक्खी पालन करतीं संगीता। संवाद
- फोटो : Archive
दुर्गा आजीविका स्वयं सहायता समूह सराय मोहन से जुड़ीं संगीता मधुमक्खी पालन के जरिए स्वरोजगार की मिसाल पेश कर रही हैं। प्रशिक्षण लेने के बाद सितंबर 2023 में इन्होंने दो बॉक्स से मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी।
अब उनके पास कुल 10 बॉक्स हैं। इसके जरिए वह अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही हैं। एक बॉक्स की लागत करीब 4,500 रुपये आती है।
संगीता ने बताया कि एक बॉक्स से 10 दिन में लगभग चार किलो शहद का उत्पादन होता है। नवंबर से बॉक्स लगने शुरू हो जाते हैं और यह प्रक्रिया अप्रैल तक चलती है। उन्होंने बताया कि शहद 550 से 600 रुपये प्रति किलो की दर से बिक जाता है। इसके लिए बाजार भी नहीं जाना पड़ता। शहद खरीदने लोग घर तक खुद आ जाते हैं।
मधुमक्खी पालन का यह उत्पादन चक्र करीब चार महीने तक चलता है। आजीविका मिशन से जुड़कर संगीता ने छोटे स्तर पर स्वरोजगार शुरू किया और धीरे-धीरे अपने काम का विस्तार किया। उनका प्रयास ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा है।
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घर पर मधुमक्खी पालन से अच्छी आमदनी हो रही है। हर माह 120 से 130 किलो शहद निकल जाता है। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी का बॉक्स अंबेडकर नगर से आता है। इस बार कुछ और बॉक्स बढ़ाना है, जिससे शहद का उत्पादन और बढ़ सके।
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अब उनके पास कुल 10 बॉक्स हैं। इसके जरिए वह अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही हैं। एक बॉक्स की लागत करीब 4,500 रुपये आती है।
संगीता ने बताया कि एक बॉक्स से 10 दिन में लगभग चार किलो शहद का उत्पादन होता है। नवंबर से बॉक्स लगने शुरू हो जाते हैं और यह प्रक्रिया अप्रैल तक चलती है। उन्होंने बताया कि शहद 550 से 600 रुपये प्रति किलो की दर से बिक जाता है। इसके लिए बाजार भी नहीं जाना पड़ता। शहद खरीदने लोग घर तक खुद आ जाते हैं।
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मधुमक्खी पालन का यह उत्पादन चक्र करीब चार महीने तक चलता है। आजीविका मिशन से जुड़कर संगीता ने छोटे स्तर पर स्वरोजगार शुरू किया और धीरे-धीरे अपने काम का विस्तार किया। उनका प्रयास ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा है।
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घर पर मधुमक्खी पालन से अच्छी आमदनी हो रही है। हर माह 120 से 130 किलो शहद निकल जाता है। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी का बॉक्स अंबेडकर नगर से आता है। इस बार कुछ और बॉक्स बढ़ाना है, जिससे शहद का उत्पादन और बढ़ सके।