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Azamgarh News: संस्कृत विद्यालयों के 21 शिक्षकों, कर्मियों का वेतन रोका, आदेशों में विरोधाभास से बढ़ी उलझन
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आजमगढ़। जिले में एसआईटी जांच के दायरे में आए अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों के 21 शिक्षक एवं शिक्षणेतर कर्मचारियों का वेतन अवरुद्ध किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्व में डीआईओएस की ओर से जारी आदेश और बाद के पत्राचार में स्पष्टता न होने से विभागीय स्तर पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसे लेकर वित्त एवं लेखाधिकारी ने इस प्रकरण में स्पष्टीकरण तलब किया है।
जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) द्वारा 26 जून 2025 को जारी आदेश में एसआईटी जांच पूर्ण होने और उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन मिलने तक संबंधित शिक्षक एवं कर्मचारियों का वेतन अवरुद्ध करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, इसके बाद 25 दिसंबर 2025 को जारी वेतन भुगतान संबंधी आदेश में उक्त अवरोध आदेश का कोई उल्लेख नहीं किया गया।
इसके चलते यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि पूर्व आदेश को निरस्त किया गया है या वह अब भी प्रभावी है। इस विरोधाभास को लेकर वित्त एवं लेखाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने यह जानना चाहा है कि क्या 26 जून 2025 का आदेश किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा निष्प्रभावी किया गया है। यदि ऐसा है तो संबंधित आदेश उपलब्ध कराया जाए, अन्यथा स्थिति स्पष्ट की जाए। वहीं, विभागीय पत्राचार में यह भी कहा गया है कि यदि उच्चाधिकारियों द्वारा वेतन अवरुद्ध करने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं है, तो कर्मचारियों का वेतन रोके रखना न्यायोचित नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर, डीआईओएस का मत है कि जब तक मूल आदेश को औपचारिक रूप से निरस्त नहीं किया जाता, तब तक वेतन भुगतान का निर्णय सक्षम प्राधिकारी या न्यायालय स्तर पर ही संभव है। फिलहाल, पूरे प्रकरण में उच्चाधिकारियों के स्पष्ट दिशा-निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।
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एसआईटी जांच के परिप्रेक्ष्य में 26 जून 2025 को जारी आदेश के अनुसार संबंधित शिक्षक एवं कर्मचारियों का वेतन अवरुद्ध किया गया था। वर्तमान में प्राप्त पत्राचार में उक्त आदेश के निरस्तीकरण अथवा निष्प्रभावी किए जाने संबंधी कोई स्पष्ट निर्देश उपलब्ध नहीं है। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।- अजय कुमार, डीआईओएस आजमगढ़।
संयुक्त शिक्षा निदेशक के नेतृत्व में बैठक हुई थी। इसमें जेडी सर के निर्देश पर और कोर्ट के आदेश पर भुगतान किया गया है। पूर्व में डीआईओएस उपेंद्र कुमार ने किसके आदेश पर वेतन रोका था मुझे नहीं पता लेकिन वेतन रोकने के लिए किसी भी उच्चाधिकारियों का कोई आदेश नहीं था। वह स्वयं ही वेतन रोक दिए थे जिसके खिलाफ शिक्षक कोर्ट भी गए थे।- वीरेंद्र प्रताप सिंह, एडीआईओएस आजमगढ़।
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जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) द्वारा 26 जून 2025 को जारी आदेश में एसआईटी जांच पूर्ण होने और उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन मिलने तक संबंधित शिक्षक एवं कर्मचारियों का वेतन अवरुद्ध करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, इसके बाद 25 दिसंबर 2025 को जारी वेतन भुगतान संबंधी आदेश में उक्त अवरोध आदेश का कोई उल्लेख नहीं किया गया।
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इसके चलते यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि पूर्व आदेश को निरस्त किया गया है या वह अब भी प्रभावी है। इस विरोधाभास को लेकर वित्त एवं लेखाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने यह जानना चाहा है कि क्या 26 जून 2025 का आदेश किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा निष्प्रभावी किया गया है। यदि ऐसा है तो संबंधित आदेश उपलब्ध कराया जाए, अन्यथा स्थिति स्पष्ट की जाए। वहीं, विभागीय पत्राचार में यह भी कहा गया है कि यदि उच्चाधिकारियों द्वारा वेतन अवरुद्ध करने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं है, तो कर्मचारियों का वेतन रोके रखना न्यायोचित नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर, डीआईओएस का मत है कि जब तक मूल आदेश को औपचारिक रूप से निरस्त नहीं किया जाता, तब तक वेतन भुगतान का निर्णय सक्षम प्राधिकारी या न्यायालय स्तर पर ही संभव है। फिलहाल, पूरे प्रकरण में उच्चाधिकारियों के स्पष्ट दिशा-निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।
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एसआईटी जांच के परिप्रेक्ष्य में 26 जून 2025 को जारी आदेश के अनुसार संबंधित शिक्षक एवं कर्मचारियों का वेतन अवरुद्ध किया गया था। वर्तमान में प्राप्त पत्राचार में उक्त आदेश के निरस्तीकरण अथवा निष्प्रभावी किए जाने संबंधी कोई स्पष्ट निर्देश उपलब्ध नहीं है। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।- अजय कुमार, डीआईओएस आजमगढ़।
संयुक्त शिक्षा निदेशक के नेतृत्व में बैठक हुई थी। इसमें जेडी सर के निर्देश पर और कोर्ट के आदेश पर भुगतान किया गया है। पूर्व में डीआईओएस उपेंद्र कुमार ने किसके आदेश पर वेतन रोका था मुझे नहीं पता लेकिन वेतन रोकने के लिए किसी भी उच्चाधिकारियों का कोई आदेश नहीं था। वह स्वयं ही वेतन रोक दिए थे जिसके खिलाफ शिक्षक कोर्ट भी गए थे।- वीरेंद्र प्रताप सिंह, एडीआईओएस आजमगढ़।