यूक्रेन से आजमगढ़ लौटे छात्र ने सुनाई आपबीती: रात-रातभर स्टेशन और बॉर्डर पर लगानी पड़ी लाइन , सरकार को कहा शुक्रिया
आजमगढ़ के लक्षिरामपुर गांव निवासी अनिल विश्वकर्मा के पुत्र विनीत की शुक्रवार सुबह
यूक्रेन से सकुशल घर वापसी हुई।
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मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गए आजमगढ़ शहर से सटे लक्षिरामपुर गांव निवासी अनिल विश्वकर्मा के पुत्र विनीत विश्वकर्मा की शुक्रवार की सुबह घर वापसी हुई। उसके सकुशल घर पहुंचते परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं विनीत ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि सरकार ने काफी सराहनीय प्रयास किया।
विनीत ने बताया कि 24 फरवरी को यूक्रेन में स्थिति खराब होने के बाद ही 25 फरवरी को वह अपने साथियों के साथ ब्लैक सागर के तट पर स्थित ओडेशा मेडिकल यूनिवर्सिटी से अपने घर के लिए निकल गया था। लेकिन, सफर के दौरान काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
अफ्रीकन और पाकिस्तानी छात्रों ने बहुत मचाया उत्पात
तमाम मुश्किलों को पार करते हुए चार मार्च की सुबह विनीत आजमगढ़ शहर स्थित अपने घर पहुंच सका। उसने बताया कि रात-रात भर रेलवे स्टेशन और बॉर्डर पर लाइन में खड़ा होना पड़ रहा था। अफ्रीकन और पाकिस्तानी छात्रों ने बहुत उत्पात मचाया था।
हंगरी बॉर्डर पार कर पहुंचा भारत
यूक्रेन में मुश्किल की इस घड़ी में हर चीज का दाम बहुत ज्यादा वसूला जा रहा था। किसी तरह हंगरी बॉर्डर पार कर राहत की सांस ली। वहां से भारतीय दूतावास ने बहुत मदद की। सभी को होटल व खाने-पीने के सामान उपलब्ध कराए गए। फिर हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट से एयरफोर्स के सी-17 प्लेन से गुरुवार को गाजियाबाद पहुंचा।
वहां से राज्य सरकार के द्वारा उपलब्ध कराई गई कार से आजमगढ़ निवासी चार छात्र सड़क मार्ग से अपने-अपने घर पहुंचे। कार से निःशुल्क घर तक पहुंचने पर परिजन बहुत खुश दिखाई दिए। उन्होंने घर पहुंचने पर अपने बेटे का स्वागत किया और सरकार के प्रयास की सराहना की और शुक्रिया कहा।