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जलवायु परिवर्तन के लिए हम जिम्मेदार
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Fri, 05 Feb 2016 11:39 PM IST
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शिब्ली नेशनल इंटर कॉलेज में चल रहे पुस्तक मेले मेें शुक्रवार को ‘प्रकृति की रक्षा, जीवन रक्षा’ विषय पर संगोष्ठी में पर्यावरण विज्ञानी डा. सुनील कुमार झा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के लिए ईश्वर नहीं, हम मानव जाति के लोग जिम्मेदार हैं। कहा कि आजमगढ़ में 15 से अधिक ताल हैं, जिनके अस्तित्व को बचाने के लिए युवाओं को आगे आना होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो आने वाले समय में भयानक परिणाम देखने पड़ेंगे।
कहा कि उन्नाव, फिरोजाबाद, रायबरेली के पानी में फ्लोराइड की मात्रा बढ़ जाने से कई तरह की विसंगतियों को आमंत्रण मिल रहा है। कहा कि वाराणसी में गंगा के पानी और भूजल में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ी है जो जीवन के संकट को और अधिक गहराती है। हरियाणा, पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा कि राशन उत्पादन में रिकार्ड बनाने वाला इलाका आज डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियों का प्लेटफार्म बन गया है। यह सब कीटनाशक और रासायनिक खाद के इस्तेमाल से हुआ है। कहा कि यदि इसे नहीं रोका गया तो धरती को बंजर होने से नहीं बचाया जा सकता।
उन्होंने सुंदरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में लड़े गए आंदोलनों पर चर्चा की। डा. मसूद अख्तर ने कहा कि विज्ञान समाज को दृष्टि देता है और वैज्ञानिक दृष्टि से युवा आगे बढ़ें तो निश्चित ही समाज आगे बढ़ेगा। प्राचार्य डा. गयास अहमद ने कहा कि विविध विषय पर विमर्श और पुस्तक मेला आजमगढ़ को सृजन का नया आयाम जैसा है। यह प्रयोग विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ता है।
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इस मौके पर डा. एम जेड अली, डा. अब्दुल्लाह, मौलाना उमेर, यासिर बेग, परितोष, डा. प्रशांत, डा. गोवर्धन पांडेय, बृजेश सिंह, अबू मोहम्मद, डा. जावेद, नियाज दाउदी, तारिक आदि मौजूद थे। उधर, पुस्तक मेले में शुक्रवार को बाल मंडप में फातिमा स्कूल, जीडी ग्लोबल और शिब्ली नर्सरी के विद्यार्थियों ने एकांकी प्रस्तुत की। हरियाणा से आए रंगकर्मियों ने ‘बिन पानी सब सून’ पर एकांकी प्रस्तुत की।
स्कूली बच्चों ने मत फाड़ो कागज, कटेंगे पेड़ हमारे... गीत से हो रही अंधाधुंध पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने का आह्वान किया। इसी क्रम में विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के बच्चों ने प्रकृति और जीवन थीम पर विद्यार्थियों ने चित्रकला और रेखाचित्र बनाया।
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कहा कि उन्नाव, फिरोजाबाद, रायबरेली के पानी में फ्लोराइड की मात्रा बढ़ जाने से कई तरह की विसंगतियों को आमंत्रण मिल रहा है। कहा कि वाराणसी में गंगा के पानी और भूजल में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ी है जो जीवन के संकट को और अधिक गहराती है। हरियाणा, पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा कि राशन उत्पादन में रिकार्ड बनाने वाला इलाका आज डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियों का प्लेटफार्म बन गया है। यह सब कीटनाशक और रासायनिक खाद के इस्तेमाल से हुआ है। कहा कि यदि इसे नहीं रोका गया तो धरती को बंजर होने से नहीं बचाया जा सकता।
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उन्होंने सुंदरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में लड़े गए आंदोलनों पर चर्चा की। डा. मसूद अख्तर ने कहा कि विज्ञान समाज को दृष्टि देता है और वैज्ञानिक दृष्टि से युवा आगे बढ़ें तो निश्चित ही समाज आगे बढ़ेगा। प्राचार्य डा. गयास अहमद ने कहा कि विविध विषय पर विमर्श और पुस्तक मेला आजमगढ़ को सृजन का नया आयाम जैसा है। यह प्रयोग विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ता है।
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इस मौके पर डा. एम जेड अली, डा. अब्दुल्लाह, मौलाना उमेर, यासिर बेग, परितोष, डा. प्रशांत, डा. गोवर्धन पांडेय, बृजेश सिंह, अबू मोहम्मद, डा. जावेद, नियाज दाउदी, तारिक आदि मौजूद थे। उधर, पुस्तक मेले में शुक्रवार को बाल मंडप में फातिमा स्कूल, जीडी ग्लोबल और शिब्ली नर्सरी के विद्यार्थियों ने एकांकी प्रस्तुत की। हरियाणा से आए रंगकर्मियों ने ‘बिन पानी सब सून’ पर एकांकी प्रस्तुत की।
स्कूली बच्चों ने मत फाड़ो कागज, कटेंगे पेड़ हमारे... गीत से हो रही अंधाधुंध पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने का आह्वान किया। इसी क्रम में विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के बच्चों ने प्रकृति और जीवन थीम पर विद्यार्थियों ने चित्रकला और रेखाचित्र बनाया।