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सम्मान और हक की उठी आवाज

Wed, 26 Oct 2016 10:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ Updated Wed, 26 Oct 2016 10:34 PM IST
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Respect of the right to voice arose
जोकहरा स्थित श्रीरामानंद सरस्वती पुस्तकालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करती हीना देसाई।
श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय जोकहरा और आक्सफैम इंडिया के सहयोग से बुधवार को जोकहर में आयोजित कार्यक्रम में जनपद की संघर्षशील 14 महिलाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं को समान अवसर, सुरक्षा, सम्मान, समान अधिकार और न्याय दिलाने के लिए मुहिम छेड़ने का निर्णय लिया गया। 
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श्रीरामानंद सरस्वती पुस्तकालय के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में लगभग 250 महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस अवसर पर 14 महिलाओं को मुख्य अतिथि मंडलायुक्त नीलम अहलावत ने सम्मानित किया। इसके साथ ही हिंसा सहने से इनकार कर अपने लिए न्याय मांगने वाली एक 12 महिलाओं को भी सम्मानित किया गया। वहीं पुलिस और प्रशासन के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों जिनकी संबेदनशीलता और सहयोग से इन महिलाओं को सम्मानपूर्ण स्थान प्राप्त हो सका उनको डीआईजी धर्मवीर ने सम्मानपत्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान आक्सफैम इंडिया के कार्यक्रम अधिकारी विनोद सिन्हा और मेरी थोमस उपस्थित रहीं। पुस्तकालय की निदेशक हिना देसाई ने कहा कि जब तक हम हमारी बेटियों, मां-बहनों को सम्मान, सुरक्षा, समता, सुरक्षा और समानता का दर्जा नहीं देंगे हम स्वस्थ एवं विकासशील समाज की स्थापना नहीं कर पाएंगे।
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मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार भारत भारद्वाज ने कहा कि  स्त्री सशक्तीकरण का एक बड़ा पक्ष है। भारतीय  संविधान में हर नागरिक चाहे स्त्री हो या पुरुष को समान अधिकार और दर्जा दिया  है। लेकिन ऐसा है नहीं, स्त्री के साथ हमारा व्यवहार सम्मान जनक नहीं होता है। उन्होंने जयशंकर प्रसाद की कामायनी 'नारी तुम केवल श्रद्धा हो' की चर्चा करते हुए कहा कि कहने से नहीं स्त्री के प्रति सम्मान, चेतना और स्मिता की  पहचान नहीं रोका तो वह अधिकार से वंचित होगी। अध्यक्षता करते हुए पूर्व कुलपति और साहित्यकार विभूति नारायण राय ने कहा कि महिला हिंसा, घरेलू हिंसा पर काम  करने वाली महिलाओं को सम्मानित करना है।  पहले 10 से 20 गांव की महिलाओं का आना होता था उनके सम्मान और हक  की लड़ाई लड़ी गई। अब दूर-दूर से मऊ, गाजीपुर, बलिया से पीड़ित महिलाएं आ रही हैं। 
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