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‘हथियार’ बिन मैदान में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय
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आजमगढ़। प्रदूषण से शहर की आबो-हवा में जहर घुल रहा है जिससे लोग बीमार पड़ रहे हैं। इसे रोकने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय को दी गई है लेकिन वह भी संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है। न तो विभाग के पास स्टाफ है और न ही प्रयोगशाला। ऐसे हालात में जनपद में प्रदूषण कैसे मापा जा सकता है। हालांकि विभाग द्वारा इसके लिए कई बार शासन को प्रस्ताव भेजा गया लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिल सकी। ऐसे में साफ कहा जा सकता है कि बैठौली में बना क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय निष्प्रयोज्य साबित हो रहा है। जब विभाग के पास संसाधन ही नहीं तो वह कैसे प्रदूषण को नियंत्रण करने की दिशा में अपने सुझाव रख सकते हैं। जनपद में प्रदूषण फैल रहा है, चाहे वह ध्वनि हो या वायु या फिर जल प्रदूषण, दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। प्रदूषण से मानव जीवन और जीव जंतुओं को भारी परेशानी होती है। जनपद में जनसंख्या और विकास के साथ ही यातायात और वाहनों की संख्या में भी वृद्धि होने के कारण ध्वनि प्रदूषण बढ़ने लगा है। अत्यधिक शोर की वजह से सुनने की शक्ति भी जाने का खतरा रहता है। प्रदूषण रोकने के लिए शहर के बैठौली में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय बना है। यहां कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति भी हुई है जो कार्यालय में बैठकर अपनी ड्यूटी का कोरम पूरा करते हैं। विभाग का रोना है कि यहां न तो प्रयोगशाला है और न ही प्रदूषण मापक यंत्र। इतना ही नहीं क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आजमगढ़ का चार्ज वाराणसी के अधिकारी को मिला है। इससे यह साफ लगता है कि क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय निष्प्रयोज्य साबित हो रहा है। आजमगढ़ मंडल मुख्यालय है। अब तक यहां प्रदूषण नहीं मापा जा सका है।
लेकिन अभी तक शासन से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसके लिए शासन को दोबारा प्रस्ताव भेजा जाएगा जिससे यहां प्रयोगशाला बन सके। जिले में प्रदूषण मापने की मशीन नहीं लगाई गई है। ऐसे में एक्यूआई क्या है यह बता पाना मुश्किल है।
ओएस सिद्दीकी, वैज्ञानिक सहायक क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, आजमगढ़।
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लेकिन अभी तक शासन से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसके लिए शासन को दोबारा प्रस्ताव भेजा जाएगा जिससे यहां प्रयोगशाला बन सके। जिले में प्रदूषण मापने की मशीन नहीं लगाई गई है। ऐसे में एक्यूआई क्या है यह बता पाना मुश्किल है।
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ओएस सिद्दीकी, वैज्ञानिक सहायक क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, आजमगढ़।