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तत्कालीन ईओ और अध्यक्ष पर कार्रवाई की संस्तुति

Tue, 09 Jan 2018 11:46 PM IST
आजमगढ़ ब्यूरो
आजमगढ़ ब्यूरो Updated Tue, 09 Jan 2018 11:46 PM IST
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Recommendation of action at the then EO and Chairman
रिपोर्ट - फोटो : amar ujala
 पालिका में नियम विरुद्ध  90 दैनिक सफाईकर्मियों को पांच साल के लिए ठेके पर रख लाखों का गबन करने के मामले में तत्कालीन अध्यक्ष ने जांच अधिकारी को भेजे जवाब में सिर्फ 12 माह के लिए ही निविदा निकालने की जानकारी होने की बात कह गड़बड़ी का सारा ठीकरा तत्कालीन पालिका अधिकारियों और कर्मचारियों पर ही फोड़ दिया। वहीं, वर्तमान ईओ की ओर से गड़बड़ी और हेरीफेरी की पुष्टि की गई है।
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जांच अधिकारी ने गड़बड़ी और हेरीफेरी के मामले में तत्कालीन ईओ और अध्यक्ष को दोषी बताते हुए विधि अनुरूप कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। जिलाधिकारी की ओर से इसका परीक्षण करने के बाद कार्रवाई के शासन को भेजा जाएगा।
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शासन ने वर्ष 2004-05 में पालिका को आधे वार्डों में जिलाधिकारी की अनुमति से आउटसोर्सिंग से दैनिक सफाईकर्मी रखने के निर्देश दिए थे। पिछले दिनों ईओ की ओर से जांच के दौरान सफाई व्यवस्था गड़बड़ मिलने पर इसकी जानकारी डीएम को दी गई। डीएम की ओर से मामले की जांच की गई तो पता चला कि 90 में से सिर्फ 20-30 सफाईकर्मी ही काम पर आते हैं और भुगतान पूरे का निकाल लिया जाता है।
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मामले की जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व वीके गुप्ता को सौंपी गई। जांच के दौरान पता चला कि 2016 में तत्कालीन पालिध्याक्ष इंदिरा देवी जायसवाल और ईओ दिनेश विश्वकर्मा की ओर से जिलाधिकारी की बिना अनुमति के ही एक सेवा प्रदाता कंपनी को 90 सफाईकर्मियों की ठेका दे दिया गया।


शासन की ओर से निविदा एक ही वर्ष के लिए निकालने की अनुमति थी, लेकिन इसे पांच साल के लिए कर दिया गया। जनवरी 2017 से अगस्त 2017 तक प्रतिमाह 90 साफाईकर्मियों के नाम पर 56.28 लाख रुपये निकाले गए, लेकिन काम 20-30 कर्मचारियों से कराया गया। मामले में तत्कालीन पाकिाध्यक्ष इंदिरा देवी जासवाल और ईओ को नवंबर माह में नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। पालिकाध्यक्ष ने अपने जवाब में एक साल के लिए ही निविदा निकालने की बात कही है।

बाद में अनुबंध बदलने की बात कह उन्होंने सारी ठीकरा तत्कालीन ईओ और कर्मचारियों पर थोप दिया है। वतर्मान ईओ ने अपने जवाब में कहा है कि तत्कालीन ईओ की ओर से सेवा प्रदाता को अनियमित भुगतान के बारे में मोटिस जारी करने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अभिलेखों में हेराफेरी की गई। इससे तत्कालीन ईओ और पालिकाध्यक्ष पर साठगांठ कर शासन की नीति के खिलाफ कार्य करने, अनियमित भुगतान करने, अभिलेख में हेराफेरी करने का दोष सिद्ध हुआ है।


जांच अधिकारी ने रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दोनों पर विधि अनुरूप कार्रवाई की संस्तुति की है। जिलाधिकारी की ओर से इसके परीक्षण के बाद कार्रवाई के शासन को भेजने की उम्मीद जताई जा रही है।

जांच अधिकारी की ओर से रिपोर्ट सौंप दी गई है। रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण के बाद ही कार्रवाई के संबंध में कुछ कहा जा सकता है।
चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी
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