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दुष्कर्मी पिता को मिला आजीवन कारावास
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लगभग पांच वर्षों से अपनी ही नाबालिग पुत्री को हवस का शिकार बनाने वाला दुष्कर्मी पिता को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही कुल 55 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। बुधवार को यह सजा विशेष न्यायाधीश पास्को कोर्ट रवीश कुमार अत्री ने सुनाई। घटना निजामाबाद थाना क्षेत्र की है।
इस मामले में दुष्कर्म की पीड़िता ने अपनी माता के साथ स्थानीय थाने पहुंचकर अपने पिता के विरुद्ध आठ अक्तूबर 2020 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोप है कि लगभग पांच वर्षों से पीड़िता के पिता उसके साथ दुष्कर्म कर रहा था। जब पीड़िता और उसकी मां विरोध करती थी तो अभियुक्त हाथ-पैर तोड़ने और जान से मारने की धमकी देता था। अंत में परेशान होकर पीड़िता और उसकी मां ने स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। जांचोपरांत पुलिस ने पीड़िता के पिता शोएब के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमे के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक अवधेश कुमार मिश्र ने पीड़िता, विवेचक अनवर अली, एसआई शिवशंकर सिंह, डिप्टी सीएमओ आरके चौधरी, डा.रोशन आरा और कास्टेबल सुमन पासवान को बतौर साक्षी अदालत में परीक्षित कराया। अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष के तर्को को सुनने के बाद दुष्कर्म के जुर्म में दुष्कर्मी पिता को दोषी पाया। उक्त सजा का निर्धारण किया।
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इस मामले में दुष्कर्म की पीड़िता ने अपनी माता के साथ स्थानीय थाने पहुंचकर अपने पिता के विरुद्ध आठ अक्तूबर 2020 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोप है कि लगभग पांच वर्षों से पीड़िता के पिता उसके साथ दुष्कर्म कर रहा था। जब पीड़िता और उसकी मां विरोध करती थी तो अभियुक्त हाथ-पैर तोड़ने और जान से मारने की धमकी देता था। अंत में परेशान होकर पीड़िता और उसकी मां ने स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। जांचोपरांत पुलिस ने पीड़िता के पिता शोएब के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। मुकदमे के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक अवधेश कुमार मिश्र ने पीड़िता, विवेचक अनवर अली, एसआई शिवशंकर सिंह, डिप्टी सीएमओ आरके चौधरी, डा.रोशन आरा और कास्टेबल सुमन पासवान को बतौर साक्षी अदालत में परीक्षित कराया। अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष के तर्को को सुनने के बाद दुष्कर्म के जुर्म में दुष्कर्मी पिता को दोषी पाया। उक्त सजा का निर्धारण किया।
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