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Azamgarh News: महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में स्थापित हुई रांगेय राघव की शोधपीठ
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चक्रपानपुर। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान और परंपराओं की संरक्षण में विश्वविद्यालय की भूमिका कार्यक्रम करते हुए रांगेय राघव शोधपीठ की स्थापना की। इसमें अब छात्र रांगेय राघव पर अनुसंधान भी कर सकते हैं। इस दौरान कुलपति द्वारा विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए संघर्ष करने वाले सिपाहियों का सम्मान किया गया।
आगरा में जन्मे रांगेय राघव हिंदी के उन विशिष्ट और बहुमुखी प्रतिभा वाले रचनाकारों में से हैं, जो बहुत ही कम उम्र लेकर इस संसार में आए। लेकिन जिन्होंने अल्पायु में ही एक साथ उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार, आलोचक, नाटककार, कवि, इतिहासवेत्ता तथा रिपोर्ताज लेखक के रूप में स्वयं को प्रतिस्थापित कर दिया। साथ ही अपने रचनात्मक कौशल से हिंदी की महान सृजनशीलता के दर्शन करा दिए। रांगेय राघव हिंदी भाषी नहीं होते हुए भी हिंदी साहित्य के विभिन्न धरातलों पर युगीन सत्य से उपजा महत्वपूर्ण साहित्य उपलब्ध करा दिया। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर जीवनीपरक उपन्यासों का ढेर लगा दिया।
महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा रांगेय राघव जी का व्यक्तित्व बहुआयामी था। उन्होंने साहित्य की कई विधाओं में स्थाई महत्व का रचनात्मक योगदान दिया । उनके विशिष्ट व्यक्तित्व के निर्माण में आगरा शहर का महत्वपूर्ण योगदान था। कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता प्रो. सत्य केतु शास्त्री (लखनऊ विश्वविद्यालय) ने भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में विश्वविद्यालय और शिक्षकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। कहा कि भारत देश के भार का अर्थ है ज्ञान और उस ज्ञान में जो रत है वह भारत है और उसी भारत के लोग भारतीय हैं।
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महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय निर्माण की मुहिम चलने वाले सिपाहियों को भी विश्वविद्यालय परिसर में प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। बताते चलें कि 2019 के आम चुनाव के पहले विश्वविद्यालय नहीं तो वोट नहीं का नारा देते हुए दिसंबर 2018 में जनपद के सभी तहसील व 22 ब्लॉकों से होती हुई बहिष्कार यात्रा निकलने के बाद जिला मुख्यालय पर 4 जनवरी 2019 से अनिश्चितकालीन अनवरत अनशन शुरू किया। जिसके 45वें दिन दिनांक 18 जनवरी 2019 को विधानसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री जी ने आजमगढ़ में राज्य आवासीय विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा की।
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आगरा में जन्मे रांगेय राघव हिंदी के उन विशिष्ट और बहुमुखी प्रतिभा वाले रचनाकारों में से हैं, जो बहुत ही कम उम्र लेकर इस संसार में आए। लेकिन जिन्होंने अल्पायु में ही एक साथ उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार, आलोचक, नाटककार, कवि, इतिहासवेत्ता तथा रिपोर्ताज लेखक के रूप में स्वयं को प्रतिस्थापित कर दिया। साथ ही अपने रचनात्मक कौशल से हिंदी की महान सृजनशीलता के दर्शन करा दिए। रांगेय राघव हिंदी भाषी नहीं होते हुए भी हिंदी साहित्य के विभिन्न धरातलों पर युगीन सत्य से उपजा महत्वपूर्ण साहित्य उपलब्ध करा दिया। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर जीवनीपरक उपन्यासों का ढेर लगा दिया।
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महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा रांगेय राघव जी का व्यक्तित्व बहुआयामी था। उन्होंने साहित्य की कई विधाओं में स्थाई महत्व का रचनात्मक योगदान दिया । उनके विशिष्ट व्यक्तित्व के निर्माण में आगरा शहर का महत्वपूर्ण योगदान था। कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता प्रो. सत्य केतु शास्त्री (लखनऊ विश्वविद्यालय) ने भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण में विश्वविद्यालय और शिक्षकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। कहा कि भारत देश के भार का अर्थ है ज्ञान और उस ज्ञान में जो रत है वह भारत है और उसी भारत के लोग भारतीय हैं।
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महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय निर्माण की मुहिम चलने वाले सिपाहियों को भी विश्वविद्यालय परिसर में प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। बताते चलें कि 2019 के आम चुनाव के पहले विश्वविद्यालय नहीं तो वोट नहीं का नारा देते हुए दिसंबर 2018 में जनपद के सभी तहसील व 22 ब्लॉकों से होती हुई बहिष्कार यात्रा निकलने के बाद जिला मुख्यालय पर 4 जनवरी 2019 से अनिश्चितकालीन अनवरत अनशन शुरू किया। जिसके 45वें दिन दिनांक 18 जनवरी 2019 को विधानसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री जी ने आजमगढ़ में राज्य आवासीय विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा की।