आजमगढ़। बारिश का पानी 72 घंटे बाद भी कोल घाट और गुरु टोला से नहीं निकल पाया है। सीवर के इस पानी में सड़न होने लगी है, जिससे तीन दिनों में पानी काला पड़ गया है। दुर्गंध के कारण सांस लेना दूभर है। लोगों को इसी पानी से होकर रोजमर्रा की वस्तुएं खरीदने जाने को मजबूर हैं।
गुरुटोला में दुर्गा-शनि मंदिर, हनुमानगढ़ी मंदिर के आसपास का क्षेत्र जलमग्न है। इलाके के घरों में तीन दिनों से पानी भरा हुआ है। अब उससे दुर्गंध उठने लगी है। इसमें सांस लेना दुश्वार है। इसी सटे कोलघाट ग्राम सभा में जलभराव है। दरअसल दोनों बस्तियों के बीच नाला है, जिससे शहर के कई मुहल्लों की जल निकासी होती है। नाले का ही पानी उफनाकर दोनों मुहल्लों में फैला है। तीन पंपसेट लगाकर नाले का पानी नदीं में छोड़ा जा रहा है लेकिन यह नाकाफी साबित हो रहा है। गुरु टोला और कोलघाट में एकत्रित पानी में सड़न पैदा होने से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा पैदा हो गया है। इलाके में शुद्ध पेयजल की भी किल्लत हो गई है। रोजमर्रा का सामान लेने भी गंदे पानी से होकर जाना पड़ रहा है। कोलघाट मुहल्ले में शनिवार रात कुछ इलाकों की विद्युत आपूर्ति बहाल हो गई लेकिन अधिकांश भाग की आपूर्ति सामान्य नहीं हो पाई। गुरुटोला और कोलघाट के बीच नाला है। कोलघाट गांव है और गुरुटोला शहरी क्षेत्र, जिसका फायदा उठाकर लोगों ने नालों पर कब्जा कर रखा है। नाले और नालियों के अधिकांश हिस्सों पर कब्जे के चलते जल निकासी ठीक से नहीं हो पाती है। बृहस्पतिवार को बरसे पानी से नगर के निचले इलाके तीन दिन से जलमग्न हैं। शहर के दूसरे हिस्सों का पानी भी इसी ओर से नदी में जाता, जिससे स्थिति विकट हो गई है। राजकरन यादव राजू, ग्राम प्रधान कोलघाट ने बताया कि जलभराव का मुख्य कारण नाले पर अतिक्रमण है। कई बार प्रशासन से इसकी शिकायत की गई लेकिन कुछ नहीं हुआ। जलमग्न क्षेत्रों के लोगों को खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई जा रहा है। साइफन के पर एक पर बड़ा पंप लगाया जाए तो समस्या हल होगी। आशीष यादव, निवासी कोलघाट ने कहा कि बांध के समीप शहर और कोलघाट को जोड़ना वाले नाले का कार्य अधूरा पड़ा है। क्षेत्र का सारा का पानी मंदिर के पीछे भरता है। गंदे पानी की वजह से वहां जलकुंभी हो गई है। बारिश के बाद पानी घरों में घुसने से हालात बदतर हो गए हैं।