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अन्नदाता के आंसू से तर नहीं होंगे सियासी दुपट्टे
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Wed, 15 Apr 2015 12:24 AM IST
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दैवीय आपदा से जिले में बर्बाद हो चुकी खेती से किसान परिवार में हाहाकार मचा हुआ है। अब किसान सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता पर आसरा लगाए हुए हैं लेकिन उनमें संशय है कि किसे क्या मिलेगा। कहीं मुआवजा के नाम पर मजाक को नहीं किया जाएगा।
एक तो आपदा से किसान तबाही की कगार पर पहुंच चुके हैं, वहीं सदमे से किसान परिवार के दो लोगों की जान चली गई। अब देखना है कि उन्हें सरकार की ओर से क्या मदद मिलती है। फिलहाल दोनों परिवारों में मातम पसरा है।
फसल बर्बादी के सदमे से मरा किसान रामजनम पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर था।
पांचों के बीच तीन बीघा जमीन थी। बंटवारा तो हुआ नहीं है लेकिन नौ बिस्वा रकबा पर रामजनम खेती कर बड़े परिवार को पालता था। वह मजदूरी भी करता था। उसके परिवार में पत्नी सिमरती देवी के अलावा चार संतानें हैं। बड़े बेटे अवधेश की दिसंबर 2014 में हत्या हो गई। मौजूद लंकेश मजदूरी करता है। सुदर्शन (16) और पुत्री रानी 10वीं, रोशनी कक्षा पांच में पढ़ती है। सभी की जिम्मेदारी रामजनम के कंधों पर थी। फसल की बर्बादी देखकर सोमवार की रात बीमार पड़े रामजनम की भोर में मौत हो गई।
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दूसरी ओर, मृत खंझारी देवी के परिवार में पति रामकुमार के अलावा दो बेटे दिनेश और उमेश हैं। रामकुमार मजदूरी करता है। उसने बताया कि खेती का काम खंझारी ही देखती थी। फसल बर्बाद न हो, इसके लिए वह चितिंत रहती थी। दिन-रात मेहनतकर वह खलिहान में फसल पहुंचा चुकी थी। सोमवार की बारिश से सदमे में आ गई। बताते चले कि डेढ़ बीघा की खेती पति के नाम होने के कारण खंझारी को सरकारी योजना का कोई लाभ नहीं मिलना है।
25 की खेती नष्ट सहमे किसानः फसल के नष्ट होने से मरे किसान रामजनम के गांव सराय सादी में उसके जैसे 20 से 25 किसान हैं जिनकी खेती बर्बाद हो चुकी है। गांव के प्रधान सेखरज ने बताया कि वह इसकी सूचना जिला प्रशासन को दे दी गई है। अब देखना है कि जिला प्रशासन क्या करता है।
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एक तो आपदा से किसान तबाही की कगार पर पहुंच चुके हैं, वहीं सदमे से किसान परिवार के दो लोगों की जान चली गई। अब देखना है कि उन्हें सरकार की ओर से क्या मदद मिलती है। फिलहाल दोनों परिवारों में मातम पसरा है।
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फसल बर्बादी के सदमे से मरा किसान रामजनम पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर था।
पांचों के बीच तीन बीघा जमीन थी। बंटवारा तो हुआ नहीं है लेकिन नौ बिस्वा रकबा पर रामजनम खेती कर बड़े परिवार को पालता था। वह मजदूरी भी करता था। उसके परिवार में पत्नी सिमरती देवी के अलावा चार संतानें हैं। बड़े बेटे अवधेश की दिसंबर 2014 में हत्या हो गई। मौजूद लंकेश मजदूरी करता है। सुदर्शन (16) और पुत्री रानी 10वीं, रोशनी कक्षा पांच में पढ़ती है। सभी की जिम्मेदारी रामजनम के कंधों पर थी। फसल की बर्बादी देखकर सोमवार की रात बीमार पड़े रामजनम की भोर में मौत हो गई।
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दूसरी ओर, मृत खंझारी देवी के परिवार में पति रामकुमार के अलावा दो बेटे दिनेश और उमेश हैं। रामकुमार मजदूरी करता है। उसने बताया कि खेती का काम खंझारी ही देखती थी। फसल बर्बाद न हो, इसके लिए वह चितिंत रहती थी। दिन-रात मेहनतकर वह खलिहान में फसल पहुंचा चुकी थी। सोमवार की बारिश से सदमे में आ गई। बताते चले कि डेढ़ बीघा की खेती पति के नाम होने के कारण खंझारी को सरकारी योजना का कोई लाभ नहीं मिलना है।
25 की खेती नष्ट सहमे किसानः फसल के नष्ट होने से मरे किसान रामजनम के गांव सराय सादी में उसके जैसे 20 से 25 किसान हैं जिनकी खेती बर्बाद हो चुकी है। गांव के प्रधान सेखरज ने बताया कि वह इसकी सूचना जिला प्रशासन को दे दी गई है। अब देखना है कि जिला प्रशासन क्या करता है।