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लालगंज में भी कान्हा गोशाला के लिए प्रस्ताव तैयार
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आजमगढ़। नगरपालिका आजमगढ़ और माहुल में कान्हा गोशाला की मंजूरी मिलने के बाद अब लालगंज में भी कान्हा गोशाला के लिए डीपीआर तैयार कर ली गई है। गोशाला के लिए निजामुद्दीनपुर में उसर की 0.513 हेक्टेयर भूमि भी तलाश ली गई है। इसे कान्हा गोशाला के नाम करने के लिए फाइल जिलाधिकारी के पास भेज दी गई है। भूमि कान्हा गोशाला के नाम होने के बाद डीपीआर को मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा।
गोकशी पर रोक के बाद छुट्टा पशुओं की संख्या में तेजी से इजाफा हो हा है। इसका खामियाजा किसानों को फसलों के नुकसान के रूप में उठाना पड़ रहा है। अधिकारियों पर छुट्टा मवेशियों की समस्या से निजात दिलाने का दबाव बढ़ रहा है। इसके लिए कान्हो गोशाला पर फिर से जोर दिया जा रहा है। जनपद में अभी तक कान्हा गोशाला के लिए माहुल नगर पंचायत और आजमगढ़ नगर पालिका का प्रस्ताव मंजूर हो चुका है। दोनों ही निकायों के लिए धनराशि भी जारी हो चुकी है। ये अलग बात है कि अभी तक दोनों ही स्थानों पर निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। इसके साथ ही नगरपालिका मुबारकपुर, नगर पंचायत निजामाबाद और अतरौलिया का प्रस्ताव शासन में पहले ही विचाराधीन है। ईओ लालगंज रामबचन यादव ने नगरपंचायत में 30 पशुओं की क्षमता वाली आस्थायी गोशाला में मवेशी रखे गए हैं। इसके बाद भी इसकी संख्या बढ़ाने का दवाब है। इसे लेकर कान्हा गोशाला की योजना बनाई गई है। लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार कर ली गई है। पहले तहसील प्रशासन की ओर से खानजहांपुर में भङूमि देने की बात कही गई थी, लेकिन उसमें विवाद सामने आ गया था। अब बदल कर निजामुद्दीनपुर में भूमि देने की बात कही गई है। तहसील प्रशासन की ओर से भूमि कान्हा गोशाला के नाम करने के लिए फाइल जिलाधिकारी के पास भेजी गई है। भूमि नाम होने और कब्जा मिलने का बाद डीपीआर मंजूरी के शासन को भेजा जाएगा। धनवांटन होने के बाद काम शुरू कराया जाएगा।
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समस्याओं से मिलेगी मुक्ति
आजमगढ़। निकायों के अधीन पहले भी कांजी हाउस में आवारा पशुओं को रखे जाने का प्रावधान था, लेकिन वर्तमान में किसी निकाय में कांजी हाउस संचालित नहीं है। वर्षों पहले ये बंद हो चुके हैं। कान्हा गोशाला योजना से आवारा पशुओं की लाइलाज बीमारी का कुछ हद तक हल निकलेगा। गोवंश सहित कई अन्य आवारा पशु सड़कों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर परेशानी का सबब बनते हैं। कई बार उनके साथ क्रूरता होती है तो अक्सर जख्म, बीमारियों से वे घिर जाते हैं। इस योजना में ऐसे ही पशुओं को सुरक्षित रखने का बेहतर व हाईटेक स्थान बनाया जाना है। जहां पक्का निर्माण, चारा, पानी, बायो गैस प्लांट, सौर ऊर्जा आदि का बंदोबस्त रहेगा।
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गोकशी पर रोक के बाद छुट्टा पशुओं की संख्या में तेजी से इजाफा हो हा है। इसका खामियाजा किसानों को फसलों के नुकसान के रूप में उठाना पड़ रहा है। अधिकारियों पर छुट्टा मवेशियों की समस्या से निजात दिलाने का दबाव बढ़ रहा है। इसके लिए कान्हो गोशाला पर फिर से जोर दिया जा रहा है। जनपद में अभी तक कान्हा गोशाला के लिए माहुल नगर पंचायत और आजमगढ़ नगर पालिका का प्रस्ताव मंजूर हो चुका है। दोनों ही निकायों के लिए धनराशि भी जारी हो चुकी है। ये अलग बात है कि अभी तक दोनों ही स्थानों पर निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। इसके साथ ही नगरपालिका मुबारकपुर, नगर पंचायत निजामाबाद और अतरौलिया का प्रस्ताव शासन में पहले ही विचाराधीन है। ईओ लालगंज रामबचन यादव ने नगरपंचायत में 30 पशुओं की क्षमता वाली आस्थायी गोशाला में मवेशी रखे गए हैं। इसके बाद भी इसकी संख्या बढ़ाने का दवाब है। इसे लेकर कान्हा गोशाला की योजना बनाई गई है। लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार कर ली गई है। पहले तहसील प्रशासन की ओर से खानजहांपुर में भङूमि देने की बात कही गई थी, लेकिन उसमें विवाद सामने आ गया था। अब बदल कर निजामुद्दीनपुर में भूमि देने की बात कही गई है। तहसील प्रशासन की ओर से भूमि कान्हा गोशाला के नाम करने के लिए फाइल जिलाधिकारी के पास भेजी गई है। भूमि नाम होने और कब्जा मिलने का बाद डीपीआर मंजूरी के शासन को भेजा जाएगा। धनवांटन होने के बाद काम शुरू कराया जाएगा।
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समस्याओं से मिलेगी मुक्ति
आजमगढ़। निकायों के अधीन पहले भी कांजी हाउस में आवारा पशुओं को रखे जाने का प्रावधान था, लेकिन वर्तमान में किसी निकाय में कांजी हाउस संचालित नहीं है। वर्षों पहले ये बंद हो चुके हैं। कान्हा गोशाला योजना से आवारा पशुओं की लाइलाज बीमारी का कुछ हद तक हल निकलेगा। गोवंश सहित कई अन्य आवारा पशु सड़कों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर परेशानी का सबब बनते हैं। कई बार उनके साथ क्रूरता होती है तो अक्सर जख्म, बीमारियों से वे घिर जाते हैं। इस योजना में ऐसे ही पशुओं को सुरक्षित रखने का बेहतर व हाईटेक स्थान बनाया जाना है। जहां पक्का निर्माण, चारा, पानी, बायो गैस प्लांट, सौर ऊर्जा आदि का बंदोबस्त रहेगा।
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