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महान रचनाकार और युगद्रष्टा थे प्रेमचंद
अमर उजाला ब्यूरो आजमगढ़।
Updated Fri, 31 Jul 2015 11:38 PM IST
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कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को जिला पंचायत सभागर में आयोजित विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें लोगों ने मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। साथ ही उनके व्यक्तित्व-कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनको क्रांतिकारी, युगद्रष्टा, महान रचनाकार बताया गया।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों, सामाजिक शोषण, आर्थिक असमानता पर करारा प्रहार किया। उनकी रचनाएं शोषण मुक्त और समता मूलक समाज बनाने का संदेश देती हैं। पूर्व प्रधानाचार्य रविंद्रनाथ राय ने मुंशी प्रेमचंद को उपन्यास सम्राट बताते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में गांव, गरीब और किसान मुख्य धुरी रहे। शिक्षक कन्हैया लाल यादव ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद जनवादी साहित्यकारों की श्रेणी में खड़े हैं। अपनी रचनाओं में उन्होंने साहित्य की स्थापित और प्रचलित धारा के विपरीत ग्रामीण भारत की समस्याओं पर फोकस किया। इस मौके पर डा. हरिराम सिंह यादव, एसके सत्येन, परवेज अहमद, सुरेंद्र यादव सहित अन्य लोग मौजूद थे।
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गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष हवलदार यादव ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों, सामाजिक शोषण, आर्थिक असमानता पर करारा प्रहार किया। उनकी रचनाएं शोषण मुक्त और समता मूलक समाज बनाने का संदेश देती हैं। पूर्व प्रधानाचार्य रविंद्रनाथ राय ने मुंशी प्रेमचंद को उपन्यास सम्राट बताते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में गांव, गरीब और किसान मुख्य धुरी रहे। शिक्षक कन्हैया लाल यादव ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद जनवादी साहित्यकारों की श्रेणी में खड़े हैं। अपनी रचनाओं में उन्होंने साहित्य की स्थापित और प्रचलित धारा के विपरीत ग्रामीण भारत की समस्याओं पर फोकस किया। इस मौके पर डा. हरिराम सिंह यादव, एसके सत्येन, परवेज अहमद, सुरेंद्र यादव सहित अन्य लोग मौजूद थे।
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