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घरों में नमाज तो अल्लाह की राह में होगी कुर्बानी
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शहर के तकिया मुहल्ले से बकरीद के लिए खरिदारी करते लोग।
- फोटो : AZAMGARH
आजमगढ़। हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की यादगार में ईद-उल-अजहा का त्योहार पूरी दुनियां में बड़ी ही अकीदत के साथ शनिवार को प्रात: काल नमाज अदा कर मनाया जाएगा। इसके बाद कुर्बानी का दौर शुरु होगा, जो देर रात तक चलेगा। यह त्योहार तीन दिनों तक मनाया जाता है। तीनों दिन कुर्बानी कराए जाने का सिलसिला जारी रहता है। शनिवार को बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा। लोग प्रात: सात बजे बकरीद की नमाज लोग अपने-अपने घरो में अदा करेंगे। कोरोना संक्रमण के कारण सरकार द्वारा जारी की गई गाइड लाइन के अनुसार बकरीद की नमाज मस्जिदों में पांच-पांच की संख्या में अदा की जाएगी। जिला प्रशासन द्वारा भी उलेमाओं की बैठक कराकर सार्वजनिक रुप से कुर्बानी नहीं कराए जाने और नमाज अदा किए जाने के प्रति दिशा निर्देश दिए जा चुके है।
कुर्बानी के अमल का कोई विकल्प नहीं : मुफ्ती अहमदुल्लाह
सरायमीर। मदरसा इस्लामिया अरबिया बैतुल ओलूम के नाजिम मुफ्ती अहमदुल्लाह फूलपूरी ने कहा कि कुर्बानी इस्लामी पहचान का महत्वपूर्ण कार्य है। इस्लामी महीना जिल्हिज्जा की 10, 11और 12 तारीख को कुर्बानी का दिन है। कुर्बानी करने पर सिर्फ तकवा अल्लाह तक पहुंचता है।
अरबी माह के जिल्हिज्जा की नौवीं की फज्र से लेकर 13वीं तक की असर तक प्रत्येक नमाज के बाद एक बार जोर से तकबीर कहें। यह तकबीर पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए अनिवार्य है। हजरत इब्राहीम को एक सपने में दिखाया गया था कि वह अपने बेटे इस्माईल को कुर्बान कर रहे हैं। हजऱत इब्राहिम अलैहिस्सलाम अल्लाह की इस आज्ञा को पूरा करने के लिए मक्का पहुंचे। जब पिता ने अपने बेटे इस्माईल से कहा कि अल्लाह ने तुम्हें कुर्बान करने की आज्ञा दी है तो इस्माईल ने उत्तर दिया अब्बा जान आपको सही करने की आज्ञा दी गई है। मैं तैयार हूं। कुर्बानी इस्लाम के अनुष्ठानों में से एक है और इस इबादत का कोई विकल्प नहीं है। अमीर लोगों को कुर्बानी के साथ गरीबों की मदद करनी चाहिए। मुफ्ती अहमदुल्लाह फूलपूरी ने मुसलमानों से अपील की कि वे खुले में कुर्बानी न कराए।
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कुर्बानी के अमल का कोई विकल्प नहीं : मुफ्ती अहमदुल्लाह
सरायमीर। मदरसा इस्लामिया अरबिया बैतुल ओलूम के नाजिम मुफ्ती अहमदुल्लाह फूलपूरी ने कहा कि कुर्बानी इस्लामी पहचान का महत्वपूर्ण कार्य है। इस्लामी महीना जिल्हिज्जा की 10, 11और 12 तारीख को कुर्बानी का दिन है। कुर्बानी करने पर सिर्फ तकवा अल्लाह तक पहुंचता है।
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अरबी माह के जिल्हिज्जा की नौवीं की फज्र से लेकर 13वीं तक की असर तक प्रत्येक नमाज के बाद एक बार जोर से तकबीर कहें। यह तकबीर पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए अनिवार्य है। हजरत इब्राहीम को एक सपने में दिखाया गया था कि वह अपने बेटे इस्माईल को कुर्बान कर रहे हैं। हजऱत इब्राहिम अलैहिस्सलाम अल्लाह की इस आज्ञा को पूरा करने के लिए मक्का पहुंचे। जब पिता ने अपने बेटे इस्माईल से कहा कि अल्लाह ने तुम्हें कुर्बान करने की आज्ञा दी है तो इस्माईल ने उत्तर दिया अब्बा जान आपको सही करने की आज्ञा दी गई है। मैं तैयार हूं। कुर्बानी इस्लाम के अनुष्ठानों में से एक है और इस इबादत का कोई विकल्प नहीं है। अमीर लोगों को कुर्बानी के साथ गरीबों की मदद करनी चाहिए। मुफ्ती अहमदुल्लाह फूलपूरी ने मुसलमानों से अपील की कि वे खुले में कुर्बानी न कराए।

शहर के तकिया मुहल्ले से बकरीद के लिए खरिदारी करती महिलाएं।- फोटो : AZAMGARH

शहर के करबला मैदान में बकरे की खरिदारी करते लोग।- फोटो : AZAMGARH
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