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आतिशबाजी से शहर की आबोहवा में घुला जहर, मापक यंत्र ही नहीं
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आजमगढ़। दीपावली को देर रात तक आतिशबाजी की गई। इससे आबोहवा में काफी जहर घुला है लेकिन प्रदूषण नियंत्रण विभाग के पास इसे मापने का कोई संसाधन नहीं है।
दीपावली पर लाखों रुपये के पटाखे जलाए गए। पटाखा मार्केट दीपावली की शाम तक खाली हो गया था। कानफोड़ू पटाखों का शोर भोर तक सुनाई देता रहा। बताया जा रहा है कि महंगाई के बावजूद इस साल पिछले साल से अधिक आतिशबाजी की गई। मार्केट में ग्रीन पटाखों की बिक्री हुई। इसके बावजूद रात को आतिशबाजी से वातावरण भारी हो गया था। शहर में धुंध के बादल छाए रहे। शहर की आबोहवा में खूब जहर घुला लेकिन क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय संसाधनों की कमी के कारण इसे नाप न सका। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कालिका सिंह का कहना है कि
आतिशबाजी होने से वातावरण प्रदूषित होता है। इसलिए पहले से ही लोगों को आतिशबाजी न करने के लिए जागरूक किया जाता है। जिले में वातावरण मापने के लिए कोई यंत्र नहीं है जिससे कि वहां का पर्यावरण मापा जा सके। कई बार प्रयोगशाला के लिए प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन मंजूरी नहीं मिला।
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दीपावली पर लाखों रुपये के पटाखे जलाए गए। पटाखा मार्केट दीपावली की शाम तक खाली हो गया था। कानफोड़ू पटाखों का शोर भोर तक सुनाई देता रहा। बताया जा रहा है कि महंगाई के बावजूद इस साल पिछले साल से अधिक आतिशबाजी की गई। मार्केट में ग्रीन पटाखों की बिक्री हुई। इसके बावजूद रात को आतिशबाजी से वातावरण भारी हो गया था। शहर में धुंध के बादल छाए रहे। शहर की आबोहवा में खूब जहर घुला लेकिन क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय संसाधनों की कमी के कारण इसे नाप न सका। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कालिका सिंह का कहना है कि
आतिशबाजी होने से वातावरण प्रदूषित होता है। इसलिए पहले से ही लोगों को आतिशबाजी न करने के लिए जागरूक किया जाता है। जिले में वातावरण मापने के लिए कोई यंत्र नहीं है जिससे कि वहां का पर्यावरण मापा जा सके। कई बार प्रयोगशाला के लिए प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन मंजूरी नहीं मिला।
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