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स्वदेशी और प्राकृतिक रंगों से ही खेलें होली

Sun, 13 Mar 2022 11:28 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 13 Mar 2022 11:28 PM IST
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Play Holi with indigenous and natural colors
होली में केमिकल युक्त रंग और गुलाल का इस्तेमाल खतरनाक साबित हो सकता है। इन दिनों बाजार में सस्ते दर पर केमिकल युक्त रंग और गुलाल बड़े पैमाने पर बिक रहा है। ऐसे रंगों के इस्तेमाल से चर्म रोग होने के साथ ही आंखों को भी क्षति पहुंच सकती है। चिकित्सकों ने स्वदेशी और प्राकृतिक रंगों से होली खेलने की सुझाव लोगों को दिया है।
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चर्म रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. अंशुमान राय ने बताया कि बाजार में रसायन युक्त रंग और अबीर बिक रहा है। इनमें कुछ घातक रसायन मिले होते हैं। इस रंग के बजाय प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करना चाहिए अन्यथा रसायनयुक्त रंगों से एलर्जी हो सकती है। ऐसे रंग के प्रभाव से छोटे-छोटे दाने निकलना, जलन होने की समस्या पैदा हो सकती है। रंग खेलने के पहले शरीर में नारियल व तिली का तेल लगाना चाहिए। जलन होने पर नारियल तेल में कपूर डालकर इस्तेमाल करना चाहिए। इसके बाद चर्मरोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। मशहूर नेत्र चिकित्सक डॉ. श्रवण यादव ने बताया कि आंख में रंग या गुलाल पड़ने पर तत्काल ठंडे पानी से धोएं और नेत्ररोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर दवा डालें। दुकान से दवा लेकर आंख में कतई ना डालें अन्यथा आंख अधिक खराब हो सकती है। जहां तक हो सके रसायन युक्त रंगों की जगह प्राकृतिक रंग व अबीर का प्रयोग करें।
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