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पीपीपी मॉडल से जिले में बनेगा पैरामेडिकल कालेज, मांगा प्रस्ताव
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आजमगढ़। जिले से मेडिकल कालेज की मांग लंबे समय से हो रही है। यह मांग तो पूरी नहीं हुई, लेकिन शासन से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर आजमगढ़ में पैरामेडिकल कालेज खोले जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने की तैयारी हो रही है। वहीं प्रमुख सचिव के निर्देश पर राजकीय मेडिकल कालेज एवं सुपर फसिलिटी हॉस्पिटल चक्रपानपुर में पैरामेडिकल से संबंधित चार नए कोर्स संचालित होने जा रहे हैं। प्रत्येक कोर्स में 20-20 सीट तय की गई है।
प्रदेश के अस्पतालों में पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते उपकरण होते हुए तमाम तरह की जांच और दूसरी चिकित्सा सुविधाएं लोगों को नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने लोक निर्माण विभाग से इसके लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट मांगी थी। पैरामेडिकल कॉलेज के लिए जिला प्रशासन ने भूमि उपलब्ध भी करा दी है। वहीं पीडब्ल्यूडी ने 424.65 करोड़ इसका इस्टीमेट तैयार करके भेज भी दिया था। उक्त कार्य के लिए वित्तीय वर्ष 2021-22 में बजट के रूप में मात्र टोकन प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार के सीमित बजट संसाधन को ध्यान में रखते हुए 424.65 करोड़ व्यय किए जाने में कठिनाई है। इसलिए पैरामेडिकल कालेज को पीपीपी मॉडल पर संचालित किए जाने संबंधी प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराने के लिए निर्देश दिए हैं। शासन से मंजूरी मिलने पर यह पूर्वांचल का पहला पैरामेडिकल कालेज होगा।
इसी सत्र से संचालित होंगे यह नए कोर्स
आजमगढ़। राजकीय मेडिकल कालेज एवं सुपर फसिलिटी हॉस्पिटल चक्रपानपुर के प्राचार्य डा. आरपी शर्मा ने बताया कि पैरामेडिकल कोर्स अपने संसाधनों से संचालित करने के लिए प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए हैं। हमारे यहां पहले से एक्स-रे डिप्लोमा, एक्स-रे पैथोलोजी पहले से संचालित हो रहे हैं। जिसमें हर साल 25-25 बच्चे भर्ती होते थे। अब प्रमुख सचिव ने चार नए कोर्स संचालित करने के निर्देश दिए हैं। जिसमें आप्ट्रोमेट्री, फिजिकल थैरपी, ओटी टेक्नीशियन एवं फार्मेसी की 20-20 सीट पर बच्चों को प्रवेश मिलेगा।
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क्या है पीपीपी माडल : पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) माडल का सीधा अर्थ सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी से है। दोनों मिलकर किसी प्रोजेक्ट को पूरा करेंगे और लाभ अर्जित करेंगे। पीपीपी माडल को इसलिए अपनाया जाता है ताकि सरकार को किसी प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए धन और संसाधन मिल सके। सरकार किसी परियोजना को पूरा करने के लिए इस तरह के कदम उठाती है, ताकि कोई भी परियोजना समय पर पूरी हो, लागत कम आए और सरकार पर दबाव नहीं पड़े। ऐसे मामलों में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र का अनुभव परियोजनाओं को बेहतर बनाने में कारगर रहता है।
चक्रपानपुर स्थित मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरपी शर्मा ने बताया कि चक्रपानपुर पैरामेडिकल कालेज बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। बजट के अभाव में अभी उसे स्थगित कर दिया गया है। प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए हैं कि अपने संसाधनों से जो कोर्स संचालित किए जा सकते हैं उसे शुरू कराएं। दो कोर्स पहले से चल रहे हैं। इस बार नए चार कोर्स चलेंगे। पीपीपी मॉडल पर संचालित करने की बात हो रही है। निर्णय आने पर शासन हमे अवगत कराएगा। शासन से जैसा निर्देश मिलेंगे वैसे कार्य किए जाएंगे। अभी अपने संसाधन से चार विषयों पर कोर्स का संचालन किया जाएगा।
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प्रदेश के अस्पतालों में पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते उपकरण होते हुए तमाम तरह की जांच और दूसरी चिकित्सा सुविधाएं लोगों को नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने लोक निर्माण विभाग से इसके लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट मांगी थी। पैरामेडिकल कॉलेज के लिए जिला प्रशासन ने भूमि उपलब्ध भी करा दी है। वहीं पीडब्ल्यूडी ने 424.65 करोड़ इसका इस्टीमेट तैयार करके भेज भी दिया था। उक्त कार्य के लिए वित्तीय वर्ष 2021-22 में बजट के रूप में मात्र टोकन प्रावधान किया गया है। राज्य सरकार के सीमित बजट संसाधन को ध्यान में रखते हुए 424.65 करोड़ व्यय किए जाने में कठिनाई है। इसलिए पैरामेडिकल कालेज को पीपीपी मॉडल पर संचालित किए जाने संबंधी प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराने के लिए निर्देश दिए हैं। शासन से मंजूरी मिलने पर यह पूर्वांचल का पहला पैरामेडिकल कालेज होगा।
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इसी सत्र से संचालित होंगे यह नए कोर्स
आजमगढ़। राजकीय मेडिकल कालेज एवं सुपर फसिलिटी हॉस्पिटल चक्रपानपुर के प्राचार्य डा. आरपी शर्मा ने बताया कि पैरामेडिकल कोर्स अपने संसाधनों से संचालित करने के लिए प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए हैं। हमारे यहां पहले से एक्स-रे डिप्लोमा, एक्स-रे पैथोलोजी पहले से संचालित हो रहे हैं। जिसमें हर साल 25-25 बच्चे भर्ती होते थे। अब प्रमुख सचिव ने चार नए कोर्स संचालित करने के निर्देश दिए हैं। जिसमें आप्ट्रोमेट्री, फिजिकल थैरपी, ओटी टेक्नीशियन एवं फार्मेसी की 20-20 सीट पर बच्चों को प्रवेश मिलेगा।
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क्या है पीपीपी माडल : पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) माडल का सीधा अर्थ सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी से है। दोनों मिलकर किसी प्रोजेक्ट को पूरा करेंगे और लाभ अर्जित करेंगे। पीपीपी माडल को इसलिए अपनाया जाता है ताकि सरकार को किसी प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए धन और संसाधन मिल सके। सरकार किसी परियोजना को पूरा करने के लिए इस तरह के कदम उठाती है, ताकि कोई भी परियोजना समय पर पूरी हो, लागत कम आए और सरकार पर दबाव नहीं पड़े। ऐसे मामलों में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र का अनुभव परियोजनाओं को बेहतर बनाने में कारगर रहता है।
चक्रपानपुर स्थित मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरपी शर्मा ने बताया कि चक्रपानपुर पैरामेडिकल कालेज बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। बजट के अभाव में अभी उसे स्थगित कर दिया गया है। प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए हैं कि अपने संसाधनों से जो कोर्स संचालित किए जा सकते हैं उसे शुरू कराएं। दो कोर्स पहले से चल रहे हैं। इस बार नए चार कोर्स चलेंगे। पीपीपी मॉडल पर संचालित करने की बात हो रही है। निर्णय आने पर शासन हमे अवगत कराएगा। शासन से जैसा निर्देश मिलेंगे वैसे कार्य किए जाएंगे। अभी अपने संसाधन से चार विषयों पर कोर्स का संचालन किया जाएगा।