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या हुसैन की सदा से गूंज उठी फिजां
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Wed, 02 Dec 2015 12:49 AM IST
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अंजुमन अंसारे हुसैनी शहर के नेतृत्व में मंगलवार को चेहल्लुम का जुलूस बागमीरपेटू से दुलदुल और अलम के साथ निकाला गया। अंजुमनों ने नौहा ख्वानी और मातम कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की। इस दौरान मौला अली और या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं।
बागमीरपेटू से जुलूस वाराणसी से आए मौलाना मजाहिर हुसैन की मजलिस के बाद निकाला गया। जुलूस पुरानी कोतवाली से मुख्य चौक पर पहुंचा।
चौक पर जुलूस को खिताब करते हुए जीशान हैदर निजामाबादी ने कहा कि इस वक्त दुनिया की सबसे पहली जरुरत आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देना है ताकि बेगुनाओं को बचाया जा सके।
उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत और कुर्बानी का मकसद इंसानियत की हिफाजत करना था। जुलूस चौक से सब्जी मंडी होता कटरा स्थित इमामबाड़ा अंसारे हुसैनी पहुंचा। जहां पर मौलाना शारिब अकबरपुरी ने तकरीर किया। उसके बाद ताबूत, झूला, अलम और जुलजनाह निकाला गया।
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कटरा से जुलूस कर्बला पहुंचा। यहां पर आग का मातम किए जाने के बाद कर्बला के शहीदों के ताबूत निकाले गए। जिसकी जियारत कर अजादार रो पड़े।
ताबूतों पर शहादतनामा जीशान अली आजमी और कौसेन सुल्तानपुरी ने पेश किया। जुलूस कर्बला में समाप्त हुआ। जुलूस में अंजुमन अंसारे हुसैनी कदीम मुबारकपुर, अंजुमन गुलशने इस्लाम मित्तूपुर,
अंजुमन मोहिब्बाने हुसैनी, अंजुमन इमामिया जलालपुर, अंजुमन हैदरिया कोपागंज, अंजुमन मोहिब्बाने हुसैन कदीम समंदरपुर ने नौहा और मातम पेश किया। सुरक्षा के मद्दनेजन शहर कोतवाल ईसा खां मयफोर्स मौजूद रहे।
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बागमीरपेटू से जुलूस वाराणसी से आए मौलाना मजाहिर हुसैन की मजलिस के बाद निकाला गया। जुलूस पुरानी कोतवाली से मुख्य चौक पर पहुंचा।
चौक पर जुलूस को खिताब करते हुए जीशान हैदर निजामाबादी ने कहा कि इस वक्त दुनिया की सबसे पहली जरुरत आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देना है ताकि बेगुनाओं को बचाया जा सके।
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उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत और कुर्बानी का मकसद इंसानियत की हिफाजत करना था। जुलूस चौक से सब्जी मंडी होता कटरा स्थित इमामबाड़ा अंसारे हुसैनी पहुंचा। जहां पर मौलाना शारिब अकबरपुरी ने तकरीर किया। उसके बाद ताबूत, झूला, अलम और जुलजनाह निकाला गया।
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कटरा से जुलूस कर्बला पहुंचा। यहां पर आग का मातम किए जाने के बाद कर्बला के शहीदों के ताबूत निकाले गए। जिसकी जियारत कर अजादार रो पड़े।
ताबूतों पर शहादतनामा जीशान अली आजमी और कौसेन सुल्तानपुरी ने पेश किया। जुलूस कर्बला में समाप्त हुआ। जुलूस में अंजुमन अंसारे हुसैनी कदीम मुबारकपुर, अंजुमन गुलशने इस्लाम मित्तूपुर,
अंजुमन मोहिब्बाने हुसैनी, अंजुमन इमामिया जलालपुर, अंजुमन हैदरिया कोपागंज, अंजुमन मोहिब्बाने हुसैन कदीम समंदरपुर ने नौहा और मातम पेश किया। सुरक्षा के मद्दनेजन शहर कोतवाल ईसा खां मयफोर्स मौजूद रहे।